फैशन की दुनिया में समय का चक्र घूमकर एक बार फिर नब्बे के दशक के दौर में पहुंच चुका है. कभी अलमारी के किसी कोने में पुरानी मानकर रख दी गई कमर तक की छोटी ड्रेस आज के युवाओं के बीच नए कलेवर में बेहद पसंद की जा रही है. उस दौर की वेशभूषा की सबसे बड़ी पहचान उसकी सादगी, सधी हुई फिटिंग और खास सिल्हूट हुआ करती थी. आज की नई पीढ़ी उस पुराने दौर के पहनावे को हूबहू दोहराने के बजाय वर्तमान समय के मिजाज और आधुनिक एक्सेसरीज के साथ मिलाकर एक नया रूप दे रही है. डिजिटल मंचों पर नब्बे के दशक की तस्वीरों और वीडियो की लोकप्रियता ने इस रेट्रो स्टाइल को नई पीढ़ी के जेहन में फिर से ताजा कर दिया है, जिससे यह ट्रेंड सड़कों से लेकर सोशल मीडिया फीड तक हर जगह नजर आ रहा है.
मॉडर्न लेयरिंग और एक्सेसरीज से मिल रहा फ्रेश टच
पुराने दौर में ऐसी छोटी ड्रेसेज को आमतौर पर बिना किसी अतिरिक्त लेयरिंग के अकेले ही पहना जाता था, लेकिन आज की स्टाइलिंग का तरीका पूरी तरह बदल चुका है. आजकल युवा इस आउटफिट के ऊपर ओवरसाइज शर्ट, हल्की जैकेट या श्रग पहनना पसंद कर रहे हैं, जिससे पूरे पहनावे को एक सहज और कैजुअल अंदाज मिल जाता है. अगर इस ड्रेस के ऊपर क्लासिक डेनिम जैकेट पहनी जाए, तो यह लुक बेहद रिलैक्स्ड और स्टाइलिश नजर आता है. इसके अलावा फुटवियर में हील्स की जगह स्नीकर्स का तालमेल इसे रोजमर्रा की भागदौड़ और कॉलेज या कैजुअल आउटिंग के लिए बेहद आरामदायक बना देता है. थोड़ा हटकर दिखने के लिए इसके साथ छोटे हैंडबैग, आकर्षक सनग्लासेज और हल्की ज्वेलरी का संयोजन इस साधारण दिखने वाली ड्रेस को बेहद मॉडर्न फिनिश देता है.
पुरानी सादगी और सिल्हूट का नया दौर
पहनावे के इतिहास पर नजर डालें तो पुराने ट्रेंड्स का वापस लौटना एक स्वाभाविक प्रक्रिया है. जो स्टाइल किसी एक दशक में हर तरफ छाया रहता है, कुछ बरसों बाद वही डिजाइन पुरानी और आउटडेटेड मानी जाने लगती है. फिर एक ऐसा समय आता है जब वही डिजाइन नए फैब्रिक, नए कट्स और समकालीन विचारों के साथ नए अवतार में सामने आती है. नब्बे के दशक के पहनावे में बहुत ज्यादा तड़क-भड़क या भारी सजावट के बजाय शरीर की बनावट के मुताबिक सधी हुई फिटिंग और सुंदर सिल्हूट पर ध्यान दिया जाता था. मौजूदा पीढ़ी पुराने दौर की उसी सादगी को अपनी निजी पसंद के अनुसार ढाल रही है, यही वजह है कि यह बदलाव केवल पुराने कपड़ों की नकल न होकर अतीत के बेहतरीन विचारों की आधुनिक प्रस्तुति बन चुका है.
बैगी जींस से लेकर छोटे शोल्डर बैग तक का जादू
नब्बे के दशक की यह वापसी केवल एक विशेष ड्रेस तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरा का पूरा विंटेज अंदाज दोबारा लोकप्रिय हो रहा है. उस दौर की बैगी जींस, क्रॉप टॉप, क्लासिक डेनिम जैकेट, छोटे शोल्डर बैग और स्पोर्टी स्नीकर्स आज के फैशन में प्रमुखता से शामिल हो चुके हैं. समझदारी इस बात में है कि लोग इन सभी पुराने स्टाइल्स को एक साथ पहनने के बजाय अपने वॉर्डरोब की मौजूदा चीजों के साथ खूबसूरती से मिला रहे हैं. इसी संतुलन के कारण यह विंटेज स्टाइल आज के समय में बिल्कुल भी अटपटा या पुराना नहीं लगता. जब किसी पुराने कट्स वाली ड्रेस को नए जमाने के स्नीकर्स और कॉम्पैक्ट बैग के साथ पहना जाता है, तो वह एक शानदार और अनूठा स्टाइल स्टेटमेंट बन जाता है.
मौके और अपनी सुविधा के हिसाब से तय करें अपना अंदाज
किसी भी चलन को अपनाने का यह कतई मतलब नहीं है कि सिर से पैर तक पुराने दौर की नकल कर ली जाए. फैशन का असली नियम यही है कि कमर तक की ड्रेस या किसी भी रेट्रो पीस को अपनी व्यक्तिगत सुविधा और अवसर के अनुसार पहना जाए. अगर दोस्तों के साथ दिन में कहीं बाहर घूमने का प्लान है, तो इस ड्रेस के साथ डेनिम जैकेट और स्नीकर्स सबसे बेहतरीन और सहज विकल्प साबित होते हैं. वहीं शाम के किसी हल्के-फुल्के कार्यक्रम या कैजुअल पार्टी में जाना हो, तो स्नीकर्स की जगह हल्की ज्वेलरी और छोटे स्लीक बैग को शामिल करके अपने लुक को तुरंत एलिगेंट और खास बनाया जा सकता है.


















