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राजीव कपूर की वो अधूरी कहानी, जिन्हें भाई ऋषि ने बताया था सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली लेकिन फिल्मों में नहीं चला सिक्कामनोरंजन
25 अग॰ 2026, 4:01 am (1 घंटे पहले)· 2

राजीव कपूर की वो अधूरी कहानी, जिन्हें भाई ऋषि ने बताया था सबसे ज्यादा प्रतिभाशाली लेकिन फिल्मों में नहीं चला सिक्का

राज कपूर के बेटे राजीव कपूर ने फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से जबरदस्त सफलता पाई थी, लेकिन इसके बावजूद उनका फिल्मी सफर उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा। उनके भाई ऋषि कपूर ने अपनी किताब में उनकी छिपी हुई प्रतिभाओं का जिक्र किया था।

हिंदी सिनेमा के प्रतिष्ठित कपूर खानदान का नाम जेहन में आते ही राज कपूर, ऋषि कपूर और रणबीर कपूर जैसे कई दिग्गज कलाकारों की तस्वीरें उभर जाती हैं। इसी परिवार में एक नाम राजीव कपूर का भी है, जिन्हें फिल्मी दुनिया में वह मुकाम हासिल नहीं हुआ जो उनके परिवार के अन्य सदस्यों को मिला। राज कपूर के छोटे बेटे राजीव ने अभिनय की दुनिया में कदम रखा और एक बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म भी दी, लेकिन उनका करियर उम्मीद के मुताबिक आगे नहीं बढ़ पाया।

मुंबई में 25 अगस्त 1962 को जन्मे राजीव कपूर को परिवार और करीबियों के बीच प्यार से चिंपू बुलाया जाता था। उनके बड़े भाई ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा 'खुल्लम खुल्ला: ऋषि कपूर अनसेंसर्ड' में उनके जीवन के कई अनछुए पहलुओं पर रोशनी डाली थी। ऋषि ने अपनी किताब में लिखा था कि उनके तीनों भाइयों में यदि किसी के पास सबसे अधिक नैसर्गिक प्रतिभा थी, तो वह राजीव ही थे। इसके बावजूद वह अपनी योग्यताओं का पूरा लाभ उठाने में असफल रहे।

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ऋषि कपूर ने अपनी किताब में बताया था कि राजीव संगीत के मामले में बेहद कुशाग्र थे। उन्होंने पियानो बजाने की कोई औपचारिक शिक्षा प्राप्त नहीं की थी, फिर भी वह बहुत शानदार पियानो बजा लेते थे। इसके अलावा उनमें निर्देशन और संपादन की अद्भुत समझ थी। जब ऋषि ने 'आ अब लौट चलें' फिल्म बनाई थी, तब राजीव ने उस प्रोजेक्ट के संपादन कार्य में महत्वपूर्ण सहयोग दिया था। ऋषि का यह भी मानना था कि यदि राजीव अभिनय के बजाय संपादन को अपना मुख्य करियर चुनते, तो वह इस क्षेत्र में बहुत ऊंचाइयों तक पहुंच सकते थे।

अभिनय के मोर्चे पर राजीव ने आसमान, लवर बॉय और जबरदस्त जैसी कई फिल्मों में काम किया। उन्होंने केवल अभिनय तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि निर्माण और निर्देशन के मैदान में भी हाथ आजमाया। साल 1991 में उन्होंने हिना फिल्म का निर्माण किया, जिसका निर्देशन उनके भाई रणधीर कपूर ने संभाला था। इसके बाद उन्होंने 1996 में प्रेम ग्रंथ का निर्देशन किया, हालांकि यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई। उन्होंने टेलीविजन के लिए वंश सीरियल बनाया और 1999 में आ अब लौट चलें का निर्माण किया, जिसका निर्देशन ऋषि कपूर ने किया था।

राजीव कपूर के करियर का सबसे सुनहरा पल साल 1985 में आया, जब उन्होंने राम तेरी गंगा मैली में मुख्य भूमिका निभाई। उनके पिता राज कपूर के निर्देशन में बनी यह उनकी आखिरी फिल्म थी और बॉक्स ऑफिस पर इसने भारी सफलता हासिल की। हालांकि, इस बड़ी कामयाबी के बाद भी वह अपनी इस सफलता के सिलसिले को बरकरार नहीं रख सके और धीरे-धीरे उन्होंने अभिनय से दूरी बना ली। 9 फरवरी 2021 को 58 वर्ष की आयु में राजीव कपूर का निधन हो गया, जिससे कपूर परिवार का एक और सितारा हमेशा के लिए बुझ गया।

सवाल-जवाब

राजीव कपूर का जन्म कब और कहां हुआ था?
राजीव कपूर का जन्म 25 अगस्त 1962 को मुंबई में हुआ था।
राजीव कपूर को किस फिल्म से सबसे बड़ी सफलता मिली थी?
उन्हें साल 1985 में आई फिल्म 'राम तेरी गंगा मैली' से सबसे बड़ी और मुख्य पहचान मिली थी।
ऋषि कपूर ने अपनी आत्मकथा में राजीव कपूर के बारे में क्या बताया था?
ऋषि कपूर ने अपनी किताब 'खुल्लम खुल्ला' में लिखा था कि राजीव तीनों भाइयों में सबसे ज्यादा टैलेंटेड थे और वे पियानो व एडिटिंग में माहिर थे।
राजीव कपूर का निधन कब हुआ था?
राजीव कपूर का निधन 9 फरवरी 2021 को 58 साल की उम्र में हुआ था।
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