बरसात के दिनों में अक्सर चेहरे की त्वचा तो सामान्य या तैलीय महसूस होती है, लेकिन होंठ अचानक सूखने और फटने लगते हैं। मौसम में नमी होने के बावजूद कई लोगों के होंठों की ऊपरी परत बेजान हो जाती है, उन पर सफेद पपड़ी जमने लगती है या फिर बारीक दरारें पड़ जाती हैं। ऐसी स्थिति में होंठों पर बार-बार जीभ फेरने या सूखी पपड़ी को उंगलियों से नोचने की आदत परेशानी को काफी बढ़ा देती है। इससे होंठों से खून निकलने या दर्द होने का खतरा भी बना रहता है। इन दिनों होंठों की नाजुक त्वचा को गहरा पोषण देने के लिए रसोई में मौजूद देसी घी एक पारंपरिक और बेहद उपयोगी विकल्प बनकर सामने आता है।
रूखे और बेजान होंठों पर देसी घी कैसे असर दिखाता है
प्राचीन समय से ही त्वचा के अधिक रूखे हिस्सों को कोमल बनाने के लिए शुद्ध देसी घी का प्रयोग किया जाता रहा है। होंठों की त्वचा चेहरे की बाकी त्वचा की तुलना में काफी पतली और संवेदनशील होती है, क्योंकि इसमें तैलीय ग्रंथियां नहीं होतीं। जब इस पर देसी घी की एक महीन परत लगाई जाती है, तो यह बाहरी शुष्क हवा से बचाव की ढाल तैयार कर देती है। यदि होंठ पहले से ही बहुत ज्यादा कटे-फटे हों, तो उन पर किसी भी चीज को रगड़ने की भूल न करें। सबसे सुरक्षित तरीका यही है कि उंगलियों के पोरों से घी को बेहद हल्के हाथों से थपथपाते हुए लगाया जाए।
मानसून में होंठों की सही देखरेख के लिए रात का समय सबसे अनुकूल माना जाता है। सोने से पहले गुनगुने पानी से होंठों को हल्के से पोंछकर साफ कर लें और फिर शुद्ध घी की हल्की परत लगा लें। घी लगाने के तुरंत बाद उसे चाटने से पूरी तरह बचें, क्योंकि लार में मौजूद एंजाइम होंठों को और भी अधिक सूखा बना देते हैं। इसके अलावा दिनभर पर्याप्त मात्रा में पानी पीना भी उतना ही जरूरी है। शरीर के भीतर पानी का संतुलन बिगड़ने पर होंठ सबसे पहले सूखने लगते हैं, इसलिए बाहरी लेप के साथ अंदरूनी जलयोजन का भी पूरा ध्यान रखना चाहिए।
देसी घी और एक चुटकी हल्दी का रात का प्रयोग
पारंपरिक घरेलू देखभाल में हल्दी को उसके शांत और उपचारात्मक गुणों के लिए प्रमुख स्थान दिया जाता है। लगभग आधा चम्मच शुद्ध देसी घी लेकर उसमें मात्र एक चुटकी पिसी हुई हल्दी अच्छी तरह मिला लें। इस मिश्रण को रात में सोने से पूर्व होंठों पर बहुत कोमल स्पर्श के साथ लगाएं। यहां इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि हल्दी की मात्रा ज्यादा न हो और इसे फटे हुए होंठों पर कतई न रगड़ा जाए।
हल्दी का अधिक उपयोग या तेज घर्षण नाजुक त्वचा पर जलन पैदा कर सकता है। यदि मिश्रण लगाने के बाद किसी भी तरह की बेचैनी, तेज जलन, लालिमा या खुजली महसूस होती है, तो उसे तुरंत सादे पानी से धोकर साफ कर देना चाहिए। जिन लोगों की त्वचा ज्यादा संवेदनशील होती है, उन्हें किसी भी नए नुस्खे को पूरे होंठों पर आजमाने से पहले हाथ या होंठ के किसी छोटे कोने पर पैच टेस्ट करके जरूर देख लेना चाहिए ताकि किसी अनचाही एलर्जी से बचा जा सके।
हल्की प्राकृतिक चमक के लिए चुकंदर के रस का मिश्रण
कई लोग होंठों पर बाजार के रासायनिक लिपस्टिक या टिंट के बजाय प्राकृतिक रंग और चमक देखना पसंद करते हैं। इसके लिए आधा चम्मच देसी घी में चार से पांच बूंद ताजा चुकंदर का रस मिलाकर एक घरेलू लिप बाम तैयार किया जा सकता है। रात के समय इसकी थोड़ी सी मात्रा होंठों पर लगाने से होंठों को नमी तो मिलती ही है, साथ ही चुकंदर का अर्क उन्हें हल्की गुलाबी या लाल रंगत भी प्रदान करता है।
यहां इस सच्चाई को समझना बेहद आवश्यक है कि ऐसा मिश्रण लगाने से किसी के होंठ सात दिन में स्थायी रूप से गुलाबी हो जाएंगे, यह दावा पूरी तरह सही नहीं है। होंठों का स्वाभाविक रंग आनुवंशिकी, खानपान और धूप के प्रभाव जैसे कई कारणों पर निर्भर करता है। इसलिए इस उपाय को केवल एक प्राकृतिक मॉइस्चराइजर और अस्थायी टिंट के रूप में ही देखना चाहिए। यदि आप इस मिश्रण को पहले से बनाकर रखना चाहते हैं, तो इसे कांच या साफ प्लास्टिक के ढक्कनदार छोटे डिब्बे में ही रखें। इसे हफ्तों तक चलाने के बजाय हर कुछ दिनों में ताजा बनाना ज्यादा सुरक्षित और गुणकारी होता है।
शहद और देसी घी का पोषण देने वाला लेप
शहद प्राकृतिक रूप से नमी को बांधकर रखने वाला तत्व माना जाता है। आधा चम्मच देसी घी में कुछ बूंद शुद्ध शहद मिलाकर लगाने से बहुत रूखे होंठों को तेजी से राहत मिलती है। शहद की प्रकृति गाढ़ी और चिपचिपी होती है, इसलिए मिश्रण में इसकी मात्रा बहुत कम रखनी चाहिए ताकि होंठ भारी या असहज महसूस न करें। रात को इसकी बहुत पतली परत लगाकर सो जाने से अगली सुबह तक होंठों का खुरदरापन काफी हद तक शांत हो जाता है।
कुछ लोग होंठों की मृत त्वचा हटाने के लिए घी में पिसी हुई चीनी मिलाकर स्क्रब करने की सलाह भी देते हैं। हालांकि, जब होंठ फटे हुए हों या उनमें बारीक दरारें पड़ चुकी हों, तब चीनी का दानेदार स्क्रब बिल्कुल नहीं करना चाहिए। चीनी के तेज कण कटी हुई त्वचा को छील सकते हैं, जिससे तेज चुभन और घाव होने की आशंका बढ़ जाती है। एक्सफोलिएशन केवल तभी किया जाना चाहिए जब होंठ पूरी तरह ठीक हों, उन पर कोई चोट न हो और वह भी महीने में एकाध बार बेहद हल्के हाथों से किया जाए।
नाभि में देसी घी लगाने की पुरानी परंपरा की हकीकत
भारतीय घरों में एक बहुत पुराना नुस्खा प्रचलित है जिसके अनुसार रात में नाभि पर देसी घी लगाने से फटे होंठ ठीक हो जाते हैं और उनका रंग सुधरता है। इस उपाय को अक्सर आयुर्वेद और पारंपरिक दादी-नानी के नुस्खों से जोड़कर देखा जाता है। हालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के पास ऐसा कोई ठोस वैज्ञानिक प्रमाण या शोध अध्ययन मौजूद नहीं है जो यह साबित कर सके कि नाभि में घी डालने से होंठों की नमी या उनके रंग पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
इसलिए इस उपाय को किसी पक्के चिकित्सीय उपचार के तौर पर लेने के बजाय एक पारंपरिक घरेलू आदत के रूप में ही देखा जाना चाहिए। होंठों की असली सुरक्षा के लिए सीधे होंठों पर ही नमी बनाए रखने वाले उपाय करना अधिक व्यावहारिक और प्रभावी साबित होता है।
होंठों को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी सावधानियां
बरसात और बदलते मौसम में होंठों की हिफाजत के लिए कुछ बुनियादी गलतियों से बचना बेहद आवश्यक है। सबसे पहले तो उंगलियों या दांतों से होंठों की सूखी पपड़ी को खींचकर हटाने का प्रयास कभी न करें, क्योंकि इससे त्वचा छिल जाती है। अत्यधिक फटे होंठों पर नींबू का रस, तेज खट्टे पदार्थ या कोई भी दानेदार कठोर स्क्रब लगाने से बचें क्योंकि ये तीव्र जलन पैदा कर सकते हैं। इसके अलावा जब भी दिन के समय बाहर तेज धूप में निकलना हो, तो सामान्य बाम के स्थान पर SPF युक्त लिप बाम लगाना चाहिए ताकि पराबैंगनी किरणों से होंठों की कोमलता सुरक्षित रह सके।


















