सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिशा सालियान की मौत के मामले ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। दिशा सालियान की जान 9 जून 2020 को तड़के लगभग 2:25 बजे एक बहुमंजिला इमारत की 12वीं मंजिल से नीचे गिरने के कारण गई थी। उस दौरान जांच अधिकारियों ने इस पूरी घटना को आत्महत्या करार दिया था और प्रारंभिक पड़ताल में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी या साजिश का प्रमाण नहीं मिलने की बात कही गई थी। इसके अतिरिक्त, राज्य सरकार द्वारा गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम को भी दिशा की मृत्यु के मामले में किसी तरह की संदिग्ध गतिविधि या छेड़छाड़ के संकेत नहीं मिले थे। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में अब नए तथ्य सामने आने के बाद जांच की दिशा पर गंभीर सवाल खड़े होने लगे हैं।
गृह मंत्रालय की रिपोर्ट और नए साक्ष्यों का दावा
दिशा के पिता सतीश सालियान का प्रतिनिधित्व कर रहे वकील नीलेश ओझा ने शनिवार, 3 अक्टूबर को बयान जारी करते हुए कहा कि उनके पुराने दावों की पुष्टि अब उपलब्ध दस्तावेजों से हो रही है। उनके मुताबिक, प्रशासनिक स्तर पर सामने आए नए साक्ष्य इस मामले में पहले उठाए गए सभी संदेहों को मजबूत कर रहे हैं। वकील ने उल्लेख किया कि पूर्व पुलिस अधिकारी सचिन वाजे की सेवा में वापसी को लेकर गृह मंत्रालय को एक विस्तृत रिपोर्ट सौंपी गई थी, जिसने इस प्रकरण से जुड़े घटनाक्रमों पर दोबारा विमर्श छेड़ दिया है। दिशा के परिवार का कहना है कि उन्होंने शुरुआत से जिस पृष्ठभूमि की ओर इशारा किया था, आधिकारिक पन्नों में दर्ज विवरण अब उसी दिशा में संकेत दे रहे हैं।
सचिन वाजे की बहाली और तय नियमों का उल्लंघन
वकील नीलेश ओझा के अनुसार, गृह मंत्रालय के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज में दर्ज है कि 5 जून 2020 को सचिन वाजे को तत्काल प्रभाव से पुलिस सेवा में वापस शामिल किया गया था। सेवा में बहाल होते ही उन्हें क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट में महत्वपूर्ण पद पर तैनात कर दिया गया था। ओझा ने इस प्रशासनिक फैसले की वैधता पर सीधे सवाल उठाए हैं। उन्होंने तर्क दिया कि स्थापित सेवा नियमावली के तहत क्राइम इंटेलिजेंस यूनिट का नेतृत्व या प्रभार संभालने के लिए पुलिस इंस्पेक्टर रैंक के अधिकारी की योग्यता अनिवार्य थी। इसके विपरीत, सचिन वाजे उस समय इस निर्धारित पद के समकक्ष रैंक पर नहीं थे और निचले स्तर के पद पर पदस्थ थे।
सीबीआई को सौंपे गए सभी दस्तावेज
वकील ने आगे आरोप लगाते हुए कहा कि तय सेवा मानदंडों को दरकिनार करके की गई यह नियुक्ति एक सुनियोजित साजिश का हिस्सा थी। उनके मुताबिक, इस योजना के अंतर्गत दिशा की कथित हत्या, घटना पर पर्दा डालने का प्रयास, अवैध वसूली का नेटवर्क, मादक पदार्थों की तस्करी और अन्य गैर-कानूनी गतिविधियां संचालित की जा रही थीं। नीलेश ओझा ने स्पष्ट किया कि इन सभी विसंगतियों, सेवा नियमों के उल्लंघन और नए दस्तावेजों का संपूर्ण ब्योरा शनिवार, 3 अक्टूबर को सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन को सौंप दिया गया है, ताकि एजेंसी इन तमाम पहलुओं की गहराई से छानबीन कर सके।



















