अजय देवगन की बहुप्रतीक्षित सस्पेंस ड्रामा दृश्यम 3 बड़े पर्दे पर आ चुकी है और सिनेमाघरों में शुरुआती शो देखने पहुंचे दर्शकों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। बिहार की राजधानी पटना के थिएटर्स से पहले शो के बाद बाहर निकले लोगों ने फिल्म के प्लॉट, विजय के किरदार और सस्पेंस के स्तर पर खुलकर अपनी राय साझा की। ज्यादातर दर्शकों के बीच मुख्य चर्चा इस बात को लेकर रही कि फिल्म किस तरह दर्शकों को लगातार अनुमान लगाने पर मजबूर करती है और कहानी के दोनों पिछले भागों के साथ इसका तालमेल कैसा बैठता है।
थिएटर में दर्शकों के दिमाग में चलती रही समानांतर कहानी
थिएटर से बाहर आने वाले कई सिनेप्रेमियों का कहना रहा कि ढाई घंटे के इस रनटाइम के दौरान स्क्रीन पर जो घटित हो रहा था, उससे कहीं अधिक हलचल उनके अपने दिमाग में चल रही थी। दर्शक लगातार यह कयास लगाते रहे कि स्क्रीन पर आने वाला अगला मोड़ क्या होगा, मुख्य किरदार विजय सावरकर का अगला कदम क्या होगा और यह पूरा सस्पेंस आखिरकार किस अंजाम तक पहुंचेगा। कई लोगों ने यह भी माना कि स्क्रीनप्ले इतना बांधकर रखने वाला था कि इंटरवल के दौरान भी उनका मन ब्रेक लेने का नहीं हुआ और वे तुरंत आगे की कहानी जानने के लिए उत्सुक दिखे।
अपनी मां के साथ फर्स्ट शो देखकर निकलीं दर्शक शिवानी ने बताया कि पहले दोनों भागों की कहानी को एक मुकम्मल निष्कर्ष देने के लिए इसे काफी सलीके से तैयार किया गया है। उनके अनुसार, फिल्म के लेखक दर्शकों की सोचने की क्षमता और अनुमानों के साथ लगातार खेलते हैं। उन्होंने कहा कि विजय के रूप में अजय देवगन की अदाकारी दर्शकों को सोचने पर विवश कर देती है। कलाकारों की परफॉर्मेंस की तारीफ करते हुए उन्होंने विशेष रूप से गायतोंडे के किरदार की सराहना की और कहा कि ढाई घंटे का समय कब बीत गया, इसका अहसास तक नहीं हुआ। शिवानी ने इसे पांच में से चार स्टार की रेटिंग दी।
सस्पेंस से भरा निष्कर्ष और किरदारों का टकराव
सिनेमाहॉल से निकली दर्शक प्रिया ने इसे सस्पेंस से भरपूर और बेहद मनोरंजक फिल्म करार दिया। उनका कहना था कि यह कहानी शुरुआत से अंत तक दर्शकों को सीट से बांधे रखने में पूरी तरह सफल साबित होती है। वहीं एक अन्य दर्शक विनोद ने कहा कि फिल्म देखने के दौरान आम दर्शक जो भी थ्योरी तैयार करते हैं, स्क्रीन पर कहानी उससे बिल्कुल अलग दिशा में मुड़ जाती है। उन्होंने संतोष जताया कि इस तीसरे भाग के जरिए आखिरकार पूरी सीरीज को एक ठोस निष्कर्ष मिल गया है। दर्शक सुजीत कुमार सिंह ने भी फिल्म की सराहना करते हुए कहा कि पहले दो भागों की तुलना में इस तीसरे भाग में सस्पेंस का स्तर कहीं अधिक गहरा है और उन्हें उम्मीद है कि यह दर्शकों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी।
मिस्ट्री, इमोशन और तकनीकी पक्ष पर मिश्रित राय
हालांकि थिएटर से बाहर आने वाला हर दर्शक पूरी तरह उत्साहित नजर नहीं आया। कुछ दर्शकों का मानना था कि फिल्म में सस्पेंस का स्तर उनकी उम्मीदों से कुछ कम रहा। दर्शक किशन कुमार ने कहा कि फिल्म उनके लिए औसत से बेहतर रही, लेकिन बहुत अधिक असाधारण नहीं लगी। उन्होंने कहा कि जितनी भारी उम्मीद उन्होंने सस्पेंस को लेकर बांधी थी, उतना गहरा प्रभाव नहीं दिखा, फिर भी यह पूरी तरह पैसा वसूल अनुभव रहा।
फिल्म के ढांचे का विश्लेषण करते हुए उन्होंने बताया कि पहला हाफ मुख्य रूप से रहस्य और पारिवारिक भावनाओं से भरा हुआ है, जबकि दूसरे हाफ में थ्रिलर तत्वों का जोरदार मिश्रण दिखाई देता है। किशन के मुताबिक, दूसरे हाफ में मुख्य किरदार को काफी अधिक स्क्रीन स्पेस और प्रमुखता दी गई है, जिसके चलते उसके सामने बाकी किरदारों का संघर्ष थोड़ा दबा हुआ लगता है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि बैकग्राउंड म्यूजिक और कैमरा वर्क काफी प्रभावशाली है, जिसने फिल्म के माहौल को गहरा बनाने में मदद की। उन्होंने इसे पांच में से साढ़े तीन स्टार दिए।



















