बॉलीवुड अभिनेत्री फातिमा सना शेख इन दिनों अपनी आने वाली सीरीज ‘हुंकार-द रोर’ को लेकर चर्चा में बनी हुई हैं। इस सीरीज के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान उन्होंने मनोरंजन जगत में गहरे तक पैठ बना चुकी पुरुषवादी मानसिकता और भेदभाव को लेकर बेबाकी से अपने विचार रखे। उनका कहना है कि सिनेमा जगत से लेकर समाज के हर कोने में पितृसत्तात्मक सोच गहराई तक जड़े जमा चुकी है, जिसका सामना हर दिन महिलाओं को करना पड़ता है।
पितृसत्ता को बढ़ावा देने में महिलाएं भी शामिल
फातिमा सना शेख का मानना है कि इस तरह की पुरुषवादी सोच के लिए अकेले पुरुषों को दोषी नहीं ठहराया जा सकता है। उनके अनुसार, महिलाएं भी उसी सामाजिक ढांचे और व्यवस्था का एक हिस्सा बन चुकी हैं। अभिनेत्री का कहना है कि हम सभी एक ऐसे ही विचार और परिवेश के बीच पैदा होते हैं, जहां यह सोच मन में घर कर जाती है। इसलिए इस गहरी मानसिकता से पार पाने के लिए महिलाओं को भी इसके खिलाफ अपनी आवाज उठानी होगी और समाज की रूढ़िवादी सोच से डटकर मुकाबला करना होगा।
फिल्म इंडस्ट्री की बैठकों का कड़वा सच
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए अभिनेत्री ने फिल्म इंडस्ट्री के अंदरूनी अनुभवों को साझा किया। उन्होंने उन खास बैठकों को याद किया जहां उन्हें ऐसी कहानियों के प्रस्ताव मिले जो महिला-प्रधान हुआ करती थीं। इन प्रोजेक्ट्स में कहानी का केंद्र एक ऐसी महिला के इर्द-गिर्द घूमता है जो समाज में अपनी आवाज और पहचान तलाशने की जद्दोजहद कर रही होती है।
निर्माताओं की अजीब प्रतिक्रियाएं
फातिमा ने एक ऐसा वाकया साझा किया जहां उन्हें यह तो बताया गया कि वह प्रोजेक्ट उनके लिए बहुत बेहतरीन है और महिला सशक्तिकरण तथा सामाजिक राजनीति से जुड़ा है, लेकिन उस कमरे में उनके अलावा एक भी अन्य महिला मौजूद नहीं होती थी। उन्होंने बताया कि जब ऐसी कहानियों पर महिलाएं अपनी राय रखने की कोशिश करती हैं, तो सामने बैठे लोग उसे सहजता से स्वीकार नहीं कर पाते हैं। वे उस बात को संभाल नहीं पाते और कई बार अजीबोगरीब मज़ाक बनाने लगते हैं। अभिनेत्री के मुताबिक, ऐसे लोग महिलाओं को यह सिखाने की कोशिश करते हैं कि किसी हिंसक अपराध या घटना के दौरान उन्हें कैसा महसूस करना चाहिए और वे यह तक जताने की कोशिश करते हैं कि हालात उतने बुरे भी नहीं हैं।
बचपन के आघात और करियर के शुरुआती संघर्ष
यह पहला मौका नहीं है जब फातिमा सना शेख ने समाज में महिलाओं के साथ होने वाले शोषण और भेदभाव पर अपनी चुप्पी तोड़ी हो। इससे पहले भी वह अपने जीवन से जुड़े कई कड़े अनुभवों को साझा कर चुकी हैं। उन्होंने एक बार खुलासा किया था कि जब वह मात्र 3 साल की थीं, तब उनके साथ छेड़छाड़ जैसी घटना हुई थी। उनका साफ तौर पर कहना है कि सेक्सिज्म लोगों के मन में बहुत गहराई तक बसा हुआ है और यह एक ऐसी रोजमर्रा की लड़ाई है जिससे हर लड़की को गुजरना पड़ता है। उन्होंने यह भी बताया था कि वह ऐसे लोगों से मिल चुकी हैं जिन्होंने यह तक कहा कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद ही नौकरी मिल सकती है और इस तरह की परिस्थितियों का सामना उन्हें खुद अपने करियर के दौरान करना पड़ा है। हालांकि, इन सभी बाधाओं से पार पाने का एकमात्र रास्ता अपने अधिकारों के लिए खड़ा होना और लड़ना सीखना है।



















