बांद्रा स्थित अपने आवास पर हुए जानलेवा हमले को याद करते हुए बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने साझा किया है कि वह उस खौफनाक हादसे के मानसिक आघात से अब भी पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। उनके मुताबिक, उस भयानक रात की यादें आज भी उनके जेहन में इस कदर ताजा हैं कि सामान्य जिंदगी में किसी चाकू पर नजर पड़ते ही उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया एकदम बदल जाती है। अभिनेता ने बताया कि उस अप्रत्याशित संकट ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन सबने बेहद धैर्य और परिपक्वता के साथ इस कठिन दौर का सामना किया।
हमले के बाद परिवार की मनोदशा और मानसिक आघात
सैफ अली खान ने बताया कि इस खौफनाक वारदात का सबसे गहरा भावनात्मक प्रभाव उनकी पत्नी करीना कपूर पर पड़ा था। उनका कहना है कि करीना बेहद संवेदनशील स्वभाव की हैं, जिसके चलते इस अचानक हुए हिंसक वाकये ने उन्हें अंदर तक विचलित कर दिया था। हालांकि समय बीतने के साथ पूरे परिवार ने खुद को काफी हद तक संभाला है और वे उस दहशत भरे साए से बाहर निकलने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद, अभिनेता यह स्वीकार करते हैं कि वह खुद को इस हादसे के असर से शत-प्रतिशत मुक्त नहीं मान सकते, क्योंकि किसी भी धारदार चाकू को देखते ही पुराना खौफ उनके अवचेतन में अचानक उभर आता है।
हमलावर का टूटा हथियार बना जान बचने की सबसे बड़ी वजह
उस डरावने मंजर के बारे में विस्तार से बात करते हुए सैफ अली खान ने माना कि वह मौत के मुंह से केवल अपनी अच्छी किस्मत की बदौलत सुरक्षित लौट सके। उन्होंने याद किया कि उस सिरफिरे शख्स ने उन पर अंधाधुंध वार किए थे, जिससे उनके पूरे जिस्म पर गहरे घाव और कट लग गए थे। खून से लथपथ होने के बावजूद एक अप्रत्याशित मोड़ ने उनकी जान बचा ली। अभिनेता के अनुसार, हमलावर जिस चाकू का इस्तेमाल कर रहा था, वह बेहद घटिया दर्जे का था और वार करते वक्त बीच से ही टूट गया।
सैफ अली खान ने कहा कि अगर हमलावर के पास कोई असली रैंबो जैसा धारदार मजबूत हथियार होता, तो वार शरीर के किसी भी नाजुक अंदरूनी हिस्से को भेद सकता था और उनका जिंदा बचना नामुमकिन हो जाता। वह अक्सर सोचते हैं कि उस पल तकदीर ने उनका कितना बड़ा साथ दिया। अभिनेता ने यह भी जोड़ा कि अब वह मानसिक रूप से इस कड़वे सच को स्वीकार कर चुके हैं कि जो अनहोनी होनी थी, वह घट चुकी है। इसी आत्मिक शांति के चलते वे अपने दिल में कोई स्थायी नफरत रखने के बजाय उस हमलावर को सहर्ष माफ करने की भावना भी रखते हैं।
अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और विदाई के विचार
घातक हमले के तुरंत बाद जब सैफ अली खान खून से लथपथ हालत में पड़े थे, तब उनके दिमाग में जिंदगी का अंतिम सच कौंधने लगा था। उन्हें लगा कि शायद अब दुनिया से विदा लेने का वक्त आ चुका है। उस नाजुक घड़ी में उनके भीतर यह सुकून भरा अहसास आया कि उन्होंने एक बेहद शानदार और भरपूर जिंदगी जी है, जिसमें उन्हें बेहिसाब प्यार और खूबसूरत अनुभव हासिल हुए। उस समय उनकी अकेली दिली ख्वाहिश यही थी कि कोई उनका हाथ थाम ले और वह शांति से अंतिम सांस ले सकें, क्योंकि वह कभी भी गंभीर रूप से लाचार या अपाहिज होकर जिंदगी नहीं गुजारना चाहते थे।
उनका मानना था कि एक योद्धा की भांति गरिमा के साथ जान जाना किसी भी तरह के पछतावे का कारण नहीं होता। हालांकि, जब वह गंभीर चोटों के बीच अस्पताल के बिस्तर पर भर्ती थे, तब उनके भीतर जीवन को हर पल पूरी शिद्दत से जीने का एक नया जज्बा भी पैदा हुआ। उस दौरान वह मन ही मन योजना बना रहे थे कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद दोस्तों के संग सुकून से महफिल सजाएंगे, बेहतरीन वाइन का आनंद लेंगे और आगे की जिंदगी का भरपूर लुत्फ उठाएंगे।
16 जनवरी 2025 की वारदात और कानूनी कार्रवाई
यह सनसनीखेज घटना 16 जनवरी 2025 को घटी थी, जब एक अज्ञात घुसपैठिया बांद्रा स्थित सैफ अली खान के निजी अपार्टमेंट में जबरन दाखिल हो गया था। घर के भीतर घुसते ही उस शख्स ने अभिनेता पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए थे, जिससे वह गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए थे। हमले के तत्काल बाद उन्हें आनन-फानन में लीलावती अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने उनकी आपातकालीन सर्जरी की।
लीलावती अस्पताल में गहन चिकित्सीय निगरानी और इलाज के तहत 5 दिनों तक भर्ती रहने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई थी। इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस प्रशासन ने वारदात के दो दिन बाद ही आरोपी को धर दबोचा था। पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहम्मद शरीफुल इस्लाम के रूप में हुई थी, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में बंद है और मामले की कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है।





















