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घर में चाकूबाजी के खौफ से अब तक नहीं उबरे सैफ अली खान, बोले आज भी धारदार हथियार देख सहम जाता है मनमनोरंजन
20 सित॰ 2026, 1:50 am (39 मिनट पहले)· 0

घर में चाकूबाजी के खौफ से अब तक नहीं उबरे सैफ अली खान, बोले आज भी धारदार हथियार देख सहम जाता है मन

बांद्रा स्थित घर में हुए जानलेवा हमले को याद करते हुए सैफ अली खान ने बताया कि वह उस खौफनाक हादसे से अब भी पूरी तरह बाहर नहीं आ पाए हैं और आज भी चाकू देखते ही उनका बर्ताव बदल जाता है।

बांद्रा स्थित अपने आवास पर हुए जानलेवा हमले को याद करते हुए बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान ने साझा किया है कि वह उस खौफनाक हादसे के मानसिक आघात से अब भी पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं। उनके मुताबिक, उस भयानक रात की यादें आज भी उनके जेहन में इस कदर ताजा हैं कि सामान्य जिंदगी में किसी चाकू पर नजर पड़ते ही उनकी स्वाभाविक प्रतिक्रिया एकदम बदल जाती है। अभिनेता ने बताया कि उस अप्रत्याशित संकट ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन सबने बेहद धैर्य और परिपक्वता के साथ इस कठिन दौर का सामना किया।

हमले के बाद परिवार की मनोदशा और मानसिक आघात

सैफ अली खान ने बताया कि इस खौफनाक वारदात का सबसे गहरा भावनात्मक प्रभाव उनकी पत्नी करीना कपूर पर पड़ा था। उनका कहना है कि करीना बेहद संवेदनशील स्वभाव की हैं, जिसके चलते इस अचानक हुए हिंसक वाकये ने उन्हें अंदर तक विचलित कर दिया था। हालांकि समय बीतने के साथ पूरे परिवार ने खुद को काफी हद तक संभाला है और वे उस दहशत भरे साए से बाहर निकलने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। इसके बावजूद, अभिनेता यह स्वीकार करते हैं कि वह खुद को इस हादसे के असर से शत-प्रतिशत मुक्त नहीं मान सकते, क्योंकि किसी भी धारदार चाकू को देखते ही पुराना खौफ उनके अवचेतन में अचानक उभर आता है।

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हमलावर का टूटा हथियार बना जान बचने की सबसे बड़ी वजह

उस डरावने मंजर के बारे में विस्तार से बात करते हुए सैफ अली खान ने माना कि वह मौत के मुंह से केवल अपनी अच्छी किस्मत की बदौलत सुरक्षित लौट सके। उन्होंने याद किया कि उस सिरफिरे शख्स ने उन पर अंधाधुंध वार किए थे, जिससे उनके पूरे जिस्म पर गहरे घाव और कट लग गए थे। खून से लथपथ होने के बावजूद एक अप्रत्याशित मोड़ ने उनकी जान बचा ली। अभिनेता के अनुसार, हमलावर जिस चाकू का इस्तेमाल कर रहा था, वह बेहद घटिया दर्जे का था और वार करते वक्त बीच से ही टूट गया।

सैफ अली खान ने कहा कि अगर हमलावर के पास कोई असली रैंबो जैसा धारदार मजबूत हथियार होता, तो वार शरीर के किसी भी नाजुक अंदरूनी हिस्से को भेद सकता था और उनका जिंदा बचना नामुमकिन हो जाता। वह अक्सर सोचते हैं कि उस पल तकदीर ने उनका कितना बड़ा साथ दिया। अभिनेता ने यह भी जोड़ा कि अब वह मानसिक रूप से इस कड़वे सच को स्वीकार कर चुके हैं कि जो अनहोनी होनी थी, वह घट चुकी है। इसी आत्मिक शांति के चलते वे अपने दिल में कोई स्थायी नफरत रखने के बजाय उस हमलावर को सहर्ष माफ करने की भावना भी रखते हैं।

अस्पताल के बिस्तर पर जिंदगी और विदाई के विचार

घातक हमले के तुरंत बाद जब सैफ अली खान खून से लथपथ हालत में पड़े थे, तब उनके दिमाग में जिंदगी का अंतिम सच कौंधने लगा था। उन्हें लगा कि शायद अब दुनिया से विदा लेने का वक्त आ चुका है। उस नाजुक घड़ी में उनके भीतर यह सुकून भरा अहसास आया कि उन्होंने एक बेहद शानदार और भरपूर जिंदगी जी है, जिसमें उन्हें बेहिसाब प्यार और खूबसूरत अनुभव हासिल हुए। उस समय उनकी अकेली दिली ख्वाहिश यही थी कि कोई उनका हाथ थाम ले और वह शांति से अंतिम सांस ले सकें, क्योंकि वह कभी भी गंभीर रूप से लाचार या अपाहिज होकर जिंदगी नहीं गुजारना चाहते थे।

उनका मानना था कि एक योद्धा की भांति गरिमा के साथ जान जाना किसी भी तरह के पछतावे का कारण नहीं होता। हालांकि, जब वह गंभीर चोटों के बीच अस्पताल के बिस्तर पर भर्ती थे, तब उनके भीतर जीवन को हर पल पूरी शिद्दत से जीने का एक नया जज्बा भी पैदा हुआ। उस दौरान वह मन ही मन योजना बना रहे थे कि पूरी तरह स्वस्थ होने के बाद दोस्तों के संग सुकून से महफिल सजाएंगे, बेहतरीन वाइन का आनंद लेंगे और आगे की जिंदगी का भरपूर लुत्फ उठाएंगे।

16 जनवरी 2025 की वारदात और कानूनी कार्रवाई

यह सनसनीखेज घटना 16 जनवरी 2025 को घटी थी, जब एक अज्ञात घुसपैठिया बांद्रा स्थित सैफ अली खान के निजी अपार्टमेंट में जबरन दाखिल हो गया था। घर के भीतर घुसते ही उस शख्स ने अभिनेता पर चाकुओं से ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए थे, जिससे वह गंभीर रूप से लहूलुहान हो गए थे। हमले के तत्काल बाद उन्हें आनन-फानन में लीलावती अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों की टीम ने उनकी आपातकालीन सर्जरी की।

लीलावती अस्पताल में गहन चिकित्सीय निगरानी और इलाज के तहत 5 दिनों तक भर्ती रहने के बाद उन्हें छुट्टी दी गई थी। इस मामले में तत्परता दिखाते हुए पुलिस प्रशासन ने वारदात के दो दिन बाद ही आरोपी को धर दबोचा था। पकड़े गए आरोपी की पहचान मोहम्मद शरीफुल इस्लाम के रूप में हुई थी, जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में बंद है और मामले की कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहा है।

सवाल-जवाब

सैफ अली खान पर हमला कब और कहां हुआ था?
यह हमला 16 जनवरी 2025 को बांद्रा स्थित उनके निजी अपार्टमेंट में हुआ था।
हमले के बाद सैफ अली खान कितने दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहे?
उन्हें गंभीर चोटों के चलते लीलावती अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां इमरजेंसी सर्जरी के बाद वे 5 दिन भर्ती रहे।
हमले से सैफ अली खान की जान कैसे बची?
हमलावर का चाकू बेहद खराब दर्जे का था और वार करते समय टूट गया, जिससे गंभीर अंदरूनी अंगों तक घातक वार नहीं पहुंच सका।
इस हमले के आरोपी की क्या पहचान सामने आई है?
हमलावर की पहचान मोहम्मद शरीफुल इस्लाम के रूप में हुई, जिसे घटना के दो दिन बाद गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·3 मिनट पहले

सैफ अली खान द्वारा इस गंभीर मानसिक आघात को सार्वजनिक करना और करीना कपूर के संवेदनशील स्वभाव पर इसके असर का जिक्र करना इस बात का संकेत है कि सेलिब्रिटी परिवारों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य जैसे मुद्दे अब केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि मुख्यधारा की चर्चा का केंद्र बन रहे हैं, जिससे भविष्य में स्टार सुरक्षा और गोपनीयता के मानकों में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

Kavya Nair@kavya-nair·3 मिनट पहले

स्नेहा की बात को आगे बढ़ाते हुए, यह घटना सेलिब्रिटी लाइफस्टाइल और वैश्विक पर्यटन के बीच एक बड़े बदलाव को दर्शाती है। आज के समय में हाई-प्रोफाइल हस्तियां जब दुनिया भर के खूबसूरत डेस्टिनेशन या अपने घरों में भी इस तरह की सुरक्षा चुनौतियों का सामना करती हैं, तो यह वैश्विक स्तर पर लग्जरी हॉस्पिटैलिटी, प्राइवेट होटलों और रिसॉर्ट्स की सुरक्षा प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल रहा है। अब यात्रा और जीवनशैली में केवल विलासिता नहीं, बल्कि फुल-प्रूफ पर्सनल सिक्योरिटी सबसे बड़ा ट्रेंड बन चुका है, जो आने वाले समय में पर्यटन उद्योग की दिशा तय करेगा।

Aisha Khan@aisha-khan·23 मिनट पहले

सैफ अली खान का यह बयान सिर्फ एक पुरानी घटना का जिक्र नहीं है, बल्कि यह पीटीएसडी यानी पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर की उस गहरी सच्चाई को उजागर करता है जो बड़े-बड़े हादसों के बाद सेलिब्रिटीज के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करती है। जनता अमूमन सितारों की चकाचौंध भरी जिंदगी देखती है, लेकिन घरों में सुरक्षा में सेंध लगने और जानलेवा हमले का यह खौफ उनके अवचेतन में लंबे समय तक घर कर जाता है। यह मामला दिखाता है कि शारीरिक घाव तो भर जाते हैं, मगर मानसिक आघात से उबरने के लिए किस हद तक संघर्ष करना पड़ता है।

Tanvi Desai@tanvi-desai·23 मिनट पहले

मनोरंजन जगत में अक्सर ऑन-स्क्रीन हिंसा या थ्रिलर प्रोजेक्ट्स की तो चर्चा होती है, लेकिन कलाकारों का निजी जीवन जब ऐसी त्रासदियों से गुजरता है, तो उसका प्रभाव उनके करियर और मानसिक दृढ़ता पर भी पड़ता है। ओटीटी और सिनेमा की दुनिया में काम करने वाले कलाकारों के लिए यह मानसिक आघात काम के दौरान भी चिंता का विषय बन सकता है। जब कोई अभिनेता कैमरे के सामने सहजता से अभिनय करने की कोशिश करता है, तब पर्दे के पीछे इस तरह के गहरे मनोवैज्ञानिक घावों से जूझना एक अदृश्य और कठिन चुनौती है।

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