भारतीय परंपरा में शुभ कार्यों, मांगलिक उत्सवों, पूजा अनुष्ठानों और त्योहारों के अवसर पर घर की चौखट को सजाने के लिए गेंदे की मालाओं का इस्तेमाल मुख्य रूप से किया जाता है। प्रवेश द्वार पर लटकती गेंदे की नारंगी और पीली लड़ियां पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा और सुंदरता बिखेर देती हैं। यदि आप भी अपने बगीचे या बालकनी में रखे गमलों में प्रचुर मात्रा में गेंदे के फूल खिलाना चाहते हैं, तो इसकी सही बागवानी विधि अपनाकर आसानी से सफलता पाई जा सकती है। इस पौधे की बुवाई के लिहाज से सितंबर का समय सबसे आदर्श माना जाता है, जब मौसम में हल्का बदलाव शुरू होता है। इस मौसम में सही वैरायटी का चुनाव करके आप गमले को कलियों से भर सकते हैं।
गेंदे की उन्नत किस्में और बुवाई का समय
गेंदे के पौधे में प्रचुर मात्रा में फूल तभी आते हैं जब उसकी किस्म अच्छी हो। मुख्य रूप से अफ्रीकन मैरीगोल्ड, फ्रेंच मैरीगोल्ड, हाइब्रिड मैरीगोल्ड, मोनिका प्लस और पूसा नारंगी ऐसी उन्नत किस्में हैं, जिनमें शाखाएं तेजी से निकलती हैं और फूलों की संख्या बहुत अधिक रहती है। सितंबर महीने में इन किस्मों को लगाने से पौधों को बढ़ने का पूरा समय मिलता है। इन किस्मों के फूलों का रंग गहरा होता है और वे लंबे समय तक ताजे बने रहते हैं, जिससे घरेलू सजावट के लिए बाजार से बार-बार फूल खरीदने की आवश्यकता नहीं पड़ती।
पूजा के सूखे फूलों से बीज तैयार करना और अंकुरण
गेंदा उगाने के लिए किसी महंगे बीज पैकेट की जरूरत नहीं होती। आप घर में पूजा में उपयोग किए गए किसी बड़े आकार के गेंदे के फूल को पूरी तरह सुखाकर उसके काले रंग के बीज निकाल सकते हैं। यदि आप चाहें तो नर्सरी या बीज भंडार से भी बढ़िया गुणवत्ता वाले पैकेट वाले बीज ला सकते हैं। बीजों को अंकुरित करने के लिए एक छोटे कंटेनर में कोकोपीट की परत बिछाकर उस पर बीज छिड़कें। फिर बीजों के ऊपर कोकोपीट की हल्की सी परत डाल दें। हल्के पानी का छिड़काव बनाए रखने पर केवल 5 दिन में बीज अंकुरित होने लगते हैं। अंकुरण के दौरान इस छोटे बर्तन को ऐसी जगह रखें जहां सीधी और तेज धूप न पड़ती हो।
गमले के लिए आदर्श मिट्टी का मिश्रण
नन्हें पौधों के तेजी से विकास के लिए गमले की मिट्टी का संतुलित होना अनिवार्य है। मिट्टी को उपयोग में लाने से पहले अच्छी तरह छान लें ताकि कंकड़-पत्थर अलग हो जाएं। मिट्टी तैयार करने का सबसे सही अनुपात 50 प्रतिशत साधारण मिट्टी, 30 प्रतिशत कोकोपीट और 20 प्रतिशत वर्मी कंपोस्ट का रहता है। गमले में सबसे नीचे मिट्टी भरें, फिर कोकोपीट की एक हल्की परत लगाएं, इसके बाद अंकुरण वाले बीज छिड़कें या पौधे की जड़ें स्थापित करें। ऊपर से मिट्टी और कोकोपीट के मिश्रण की पतली परत डालकर वाटरिंग स्प्रे से हल्के हाथ से पानी दें। लगभग एक सप्ताह के भीतर बीज पूरी तरह अंकुरित होकर नन्हें पौधों का रूप ले लेते हैं।
पौधों को धूप दिखाना और बड़े गमले में ट्रांसप्लांट करना
जब कंटेनर में नन्हें पौधे निकल आएं, तो उन्हें सीधे तेज धूप में रखने के बजाय धीरे-धीरे मौसम के अनुकूल बनाएं। शुरुआत में पहले दिन दो घंटे धूप में रखें, दूसरे दिन धूप की अवधि बढ़ाकर चार घंटे करें, और इसी क्रम में धीरे-धीरे समय बढ़ाते जाएं। लगभग 30 दिन बीतने पर जब पौधे की ऊंचाई 5 से 6 इंच के करीब पहुंच जाए, तब उसे बड़े गमले में लगाने का समय आ जाता है। इसके लिए 9 गुना 9 इंच या 12 गुना 12 इंच का गमला बिल्कुल उपयुक्त रहता है। एक गमले में सिर्फ एक ही पौधा लगाएं ताकि उसकी जड़ों को फैलने की पूरी जगह मिल सके। पौधों को नए गमले में शाम के समय ही लगाएं, जिससे उन्हें ट्रांसप्लांटेशन शॉक न लगे और रातभर में वे नई मिट्टी में संभल सकें। बदलते समय ध्यान रखें कि जड़ों को कोई नुकसान न पहुंचे। शुरुआत के एक-दो दिन पौधा थोड़ा मुरझाया हुआ दिख सकता है, जो कि सामान्य प्रक्रिया है।
पिंचिंग की प्रक्रिया से पौधे को बनाएं घना
लगभग डेढ़ माह का होने पर पौधे की पिंचिंग करना बेहद जरूरी कदम है। पौधे की मुख्य ऊपरी टहनी के सिरे को उंगलियों से हल्का सा तोड़ देने को पिंचिंग कहा जाता है। ऐसा करने से पौधा ऊपर की ओर सीधा भागने के बजाय नीचे से कई नई शाखाएं निकालने लगता है। जितनी अधिक शाखाएं फूटेंगी, पौधा उतना ही घना और झाड़ीदार बनेगा। पौधे में जितनी ज्यादा डालियां होंगी, आगे चलकर उतनी ही अधिक कलियां और फूल खिलेंगे।
फूल न आने के कारण और घरेलू तरल पोषण
अक्सर देखा जाता है कि गेंदे का पौधा एकदम हरा-भरा रहता है लेकिन उस पर कलियां नहीं बनतीं। इसके दो मुख्य कारण होते हैं, पहला पौधे को जरूरत से ज्यादा खाद दे दी गई हो और दूसरा उसे पर्याप्त धूप न मिल रही हो। ऐसी स्थिति में पौधा अपनी सारी ऊर्जा पत्तियां बनाने में लगा देता है। इस समस्या को ठीक करने के लिए सरसों की खली का पानी सबसे असरदार उपाय है। सरसों की खली या उसके चूर्ण को 4 से 5 दिनों के लिए सादे पानी में भिगोकर रख दें। इसके बाद इस तरल घोल को पौधे की जड़ों में डालें। इसके अलावा वर्मी कंपोस्ट का घोल बनाकर भी गमले में डाला जा सकता है। एक अन्य शक्तिशाली जैविक टॉनिक बनाने के लिए केले के छिलकों के साथ दो चम्मच ताजी चाय पत्ती को पानी में भिगोएं। इस मिश्रण को 24 घंटे तक रखे रहने दें, फिर छानकर एक लीटर सादे पानी में मिलाएं और गमले में डाल दें। यह पोषण मिलने के 10 से 15 दिन बाद पौधा नई कलियों और फूलों से लद जाता है।
मासिक खाद, बायो जाइम और सूखे फूल हटाना
गमले में लगे पौधे को लगातार खुराक की जरूरत होती है। इसलिए महीने में एक बार सड़ी हुई गोबर की खाद या वर्मी कंपोस्ट गमले की ऊपरी मिट्टी की गुड़ाई करके जरूर डालें। पौधे के बेहतर विकास के लिए बायो जाइम का छिड़काव भी बहुत लाभकारी होता है। यह एक उच्च गुणवत्ता वाला समुद्री शैवाल अर्क यानी सीवीड एक्सट्रैक्ट है, जो प्लांट ग्रोथ प्रमोटर के तौर पर काम करता है। 1.5 से 2 मिलीलीटर बायो जाइम को प्रति 1 लीटर पानी में अच्छी तरह मिलाकर पौधे पर स्प्रे करें। इससे फूलों की गुणवत्ता सुधरती है और पौधे को नई ऊर्जा मिलती है। साथ ही, पौधे पर जो भी फूल सूखने या मुरझाने लगें, उन्हें तुरंत काटकर हटा दें। अगर सूखे फूलों को पौधे पर छोड़ दिया जाएगा, तो वे बीज बनाने में ऊर्जा खर्च करने लगेंगे और नई कलियों का आना रुक जाएगा।
फूलों का आकार बड़ा करने और पत्तियां चमकाने के उपाय
यदि आप चाहते हैं कि गेंदे के फूल सामान्य से बड़े आकार में खिलें, तो सरसों की खली के तैयार घोल में दो चम्मच एप्सम साल्ट मिला लें। यह मिश्रण मिट्टी में मैग्नीशियम की कमी पूरी करता है, जिससे पौधे पर अनगिनत कलियां विकसित होती हैं। इसके साथ ही इस घोल में सागरिका का सीवीड लिक्विड फर्टिलाइजर भी मिला दें। इससे पत्तियों में गहरा हरापन और प्राकृतिक चमक आती है तथा फूलों का आकार सामान्य से काफी बड़ा हो जाता है। इस संपूर्ण देखभाल प्रणाली को अपनाकर आप अपने गमले में सैकड़ों सुंदर फूल पा सकते हैं।



















