टेलीविजन धारावाहिक अनुपमा में आने वाले एपिसोड्स में जबरदस्त हलचल देखने को मिलने वाली है। अपने आशियाने का सपना चकनाचूर हो जाने के बाद अनुपमा ने हिम्मत हारने के बजाय धोखेबाज बिल्डर के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है। जब वह बिल्डर के दफ्तर पहुंची तो वहां उसे कई ऐसे असहाय लोग रोते-बिलखते दिखे, जिनकी पूरी जिंदगी की जमा पूंजी डूब चुकी थी। दूसरों की यह हालत देखकर अनुपमा अपना निजी दर्द भूल गई और उसने हर पीड़ित को उसका हक दिलाने का पक्का इरादा कर लिया।
बिल्डर के दफ्तर पर हंगामा और पीड़ितों का विरोध
घर छिन जाने के सदमे में अनुपमा बेहद भावुक नजर आती है और उसकी यह स्थिति देखकर दिग्विजय भी काफी दुखी हो जाता है। इसी दौरान परिवार के अन्य सदस्यों के बीच भी भारी तनाव देखने को मिलता है। ईशानी, अंश और प्रेरणा के बीच पैसों के नुकसान और इस धोखेबाजी को लेकर तीखी नोकझोंक होती है। वहीं दूसरी तरफ पाखी और पारितोष अपनी पुरानी फितरत के मुताबिक अनुपमा की लाचारी और इस परेशानी का मजाक उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं। परिवार के इस माहौल से बेपरवाह अनुपमा सीधे बिल्डर के दफ्तर का रुख करती है, जहां पहले से ही ठगे गए फ्लैट खरीदार जोरदार प्रदर्शन कर रहे होते हैं।
हताश खरीदार को दी हिम्मत और पुलिस से लगाई गुहार
विरोध प्रदर्शन के दौरान स्थिति तब बेहद गंभीर हो जाती है जब अपनी खून पसीने की कमाई गंवा चुका एक शख्स निराशा में आकर जान देने की बात करने लगता है। यह सुनते ही अनुपमा तुरंत आगे बढ़कर उसे रोकती है और ढांढस बंधाती है। वह समझाती है कि इंसान की जिंदगी किसी भी आर्थिक धोखे से कहीं ज्यादा अनमोल होती है। अनुपमा वहां इकट्ठा हुए सभी खरीदारों का हौसला बढ़ाते हुए कहती है कि एक मध्यमवर्गीय इंसान जब अपना सब कुछ गंवा बैठता है, तो उसके भीतर खोने का डर पूरी तरह खत्म हो जाता है। इसके बाद वह मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारियों से गुजारिश करती है कि वे अपनी जिम्मेदारी ईमानदारी से निभाएं और इस फरार बिल्डर को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा दिलवाएं। अनुपमा की बातें सुनकर सभी प्रदर्शनकारियों में नया जोश भर जाता है और वे अपने हक के लिए एकजुट होकर लड़ने का संकल्प लेते हैं।
शाह परिवार में स्वार्थ की सियासत और आगामी मोड़
दूसरी तरफ घर में पाखी और पारितोष एक बार फिर अपनी चालबाजियों में जुट जाते हैं। दोनों मिलकर लीला के मन में यह जहर घोल देते हैं कि कहीं हसमुख अनुपमा की आर्थिक मदद करने के चक्कर में अपना घर ही न बेच दें। यह सुनकर लीला एक चौंकाने वाली प्रतिक्रिया देती है और कहती है कि अच्छा ही हुआ जो अनुपमा को यह भारी नुकसान झेलना पड़ा, कम से कम अब वह घर पर टिककर सभी की देखभाल तो कर सकेगी। लीला की यह संवेदनहीन बात सुनकर खुद पाखी और पारितोष भी हैरान रह जाते हैं कि लीला उनसे भी ज्यादा स्वार्थी निकली। वहीं दूसरी ओर आने वाले घटनाक्रम में दिखाया गया है कि अनुपमा और राही एक कैटरिंग के काम में व्यस्त हैं। वहां राही को अनुज की याद सताने लगती है, जिस पर अनुपमा उसे भरोसा दिलाती है कि अनुज एक न एक दिन जरूर लौटेगा।




















