घर की सफाई के लिए बेहतरीन वेट एंड ड्राई वैक्यूम क्लीनर, अमेज़न पर 2,999 रुपये से शुरू है शुरुआती कीमतउदयपुर के होटल में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, अवैध रूप से रह रहीं थाईलैंड की तीन महिलाएं हिरासत मेंसौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से मिली राहत, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दी जमानतमिथिलांचल की खास स्टाइल में ऐसे बनाएं देसी मटन, खड़े मसाले का यह तरीका बढ़ा देगा स्वादउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव का प्रचार थमा, भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी ने झोंकी पूरी ताकतअमित शाह ने पुलिस स्मृति दिवस पर किया प्रोजेक्ट कर्मवीर का ऐलान, देश भर के वीरों को दी गई श्रद्धांजलिहैदराबाद के चौहत्तर साल के भद्रन्ना ने पसीने की मेहनत से पेश की अनूठी मिसालउत्तर प्रदेश के पुलिसकर्मियों के लिए बड़ा एलान, योगी आदित्यनाथ सरकार ने भत्तों में की भारी बढ़ोतरीबिहार के मधुबनी में सड़क हादसा, मेला देखने जा रहे बाइक सवार तीन युवकों में से एक की मौत और दो गंभीर रूप से घायलहैलोवीन 2026: इन 8 डरावनी फिल्मों से सजाएं अपनी विश लिस्ट, रोंगटे खड़े कर देंगी ये कहानियां
सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से मिली राहत, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दी जमानतभारत
21 अक्तू॰ 2026, 6:59 pm (1 घंटे पहले)· 3

सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से मिली राहत, विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत ने दी जमानत

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका को तिहाड़ जेल से रिहाई मिल गई है। हिरासत की अवधि समाप्त होने पर विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।

कॉकरोच जनता पार्टी के नेता सौरव दास और आशुतोष रांका की तिहाड़ जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है। बुधवार शाम को उनकी हिरासत की अवधि पूरी होने पर उन्हें दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट यानी एसईएम अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें जमानत प्रदान कर दी गई। इससे पहले इन दोनों नेताओं ने अपनी न्यायिक हिरासत बढ़ाए जाने के आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल की गई अपनी याचिका वापस ले ली थी।

इन दोनों नेताओं को 13 अक्टूबर को हिरासत में लिया गया था। उन पर मुख्य आरोप यह था कि उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रवेश पाने के लिए वहां लगे बंद गेट को पार किया था। घटना के समय दिल्ली पुलिस द्वारा जंतर-मंतर का अधिकृत प्रदर्शन स्थल वाला दर्जा पहले ही वापस लिया जा चुका था। इसी घटनाक्रम के चलते दोनों के खिलाफ शांति भंग करने की कोशिश के आरोप में कानूनी कार्रवाई की गई थी।

ये भी पढ़ें

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और हिरासत की पूरी पृष्ठभूमि

यह पूरा कानूनी मामला मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी द्वारा आयोजित किए गए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा हुआ है। पार्टी ने वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया में कथित तौर पर अनियमितताएं होने का आरोप लगाते हुए यह प्रदर्शन किया था। 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर का अधिकृत प्रदर्शन स्थल का दर्जा वापस ले लिया था, जिसे बाद में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट में अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से चुनौती दी गई।

इस फैसले के दो दिन बाद यानी 13 अक्टूबर को सौरव दास और आशुतोष रांका राष्ट्रीय ध्वज लेकर जंतर-मंतर पहुंचे थे। आरोप लगाया गया कि दोनों ने वहां अंदर जाने के लिए बंद गेट को पार किया था, जिसके अगले दिन उन्हें हिरासत में ले लिया गया। इसके पश्चात विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने शांति भंग होने की आशंका जताते हुए दोनों को पांच दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया था।

जमानतियों पर उठे सवाल और अदालत की कार्यवाही

बीती 19 अक्टूबर को विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने दोनों नेताओं की तरफ से पेश किए गए जमानतियों को स्वीकार करने से मना कर दिया था। अदालत को यह संदेह था कि जमानती दोनों नेताओं के नियमों का पालन सुनिश्चित कराने में सक्षम हैं या नहीं। इसके अलावा, जमानतियों के पहचान संबंधी दस्तावेजों में भी कुछ कमियां और गड़बड़ियां पाई गई थीं।

इन कारणों के चलते दोनों नेताओं की न्यायिक हिरासत को दो दिन के लिए और बढ़ा दिया गया था। इसी आदेश के खिलाफ सौरव दास और आशुतोष रांका ने दिल्ली हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हालांकि बाद में उन्होंने अपनी वह याचिका वापस ले ली। हिरासत की अवधि समाप्त होने पर एसईएम अदालत में हुई सुनवाई के बाद दोनों को आखिरकार राहत मिल गई है।

मुख्य चुनाव आयुक्त को लेकर विवाद की मुख्य वजह

कॉकरोच जनता पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार मुखर रही है। पार्टी का मुख्य तर्क है कि मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर प्रक्रिया के दौरान गंभीर अनियमितताएं बरती गईं। इसी मुद्दे को लेकर जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया था।

इस बीच, मुख्य चुनाव आयुक्त से जुड़ा विवाद तब और गहरा गया जब एक मीडिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया कि दस महीने की समयावधि के दौरान चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त के फैसलों पर चौदह बार आपत्तियां दर्ज कराई थीं। हालांकि इस दावे के जवाब में निर्वाचन आयोग की तरफ से स्पष्ट किया गया था कि उनके संस्थान के सभी निर्णय आपसी सहमति और सर्वसम्मति से लिए गए हैं।

सवाल-जवाब

सौरव दास और आशुतोष रांका को किस अदालत से जमानत मिली?
उन्हें दिल्ली की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत से जमानत मिली है।
इन दोनों नेताओं को किस जेल में रखा गया था?
दोनों नेताओं को तिहाड़ जेल में रखा गया था।
उन्हें किस आरोप में हिरासत में लिया गया था?
उन पर जंतर-मंतर पर प्रवेश करने के लिए बंद गेट पार करने और शांति भंग करने की कोशिश का आरोप था।
कॉकरोच जनता पार्टी का मुख्य विरोध प्रदर्शन किस मांग को लेकर था?
यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया गया था।
दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर के संबंध में क्या निर्णय लिया था?
दिल्ली पुलिस ने 11 अक्टूबर को जंतर-मंतर का अधिकृत प्रदर्शन स्थल का दर्जा वापस ले लिया था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·41 मिनट पहले

जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल वाला दर्जा अचानक वापस लेना ही असली झगड़े की जड़ लग रहा है, वरना बंद गेट फांदने पर इतनी बात नहीं बढ़ती।

Laxmi Gupta@laxmi-gupta·40 मिनट पहले

रविकेश जी, बात तो सही है, लेकिन अंक भी तो देखिए—13 तारीख को पकड़े जाना और फिर मुकद्दर का खेल, सब ग्रहों की चाल का फेर लगता है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 घंटे पहले

जंतर-मंतर का प्रदर्शन स्थल वाला दर्जा अचानक वापस लेना ही पूरे विवाद की जड़ है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·1 घंटे पहले

करण जी, बात सिर्फ जंतर-मंतर के दर्जे की नहीं है, बिना अनुमति के गेट फांदकर अंदर जाना भी तो नियम तोड़ना ही था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp