राजस्थान के आर्थिक रूप से कमजोर और जरूरतमंद परिवारों के लिए राज्य सरकार द्वारा मुख्यमंत्री कन्यादान योजना का संचालन किया जा रहा है, जिसे सहयोग एवं उपहार योजना के नाम से भी जाना जाता है। इस जनकल्याणकारी पहल का प्रमुख उद्देश्य राज्य के बीपीएल, अंत्योदय, विधवा, विशेष योग्यजन, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक श्रेणियों से ताल्लुक रखने वाले परिवारों को बेटियों की शादी के मौके पर वित्तीय संबल प्रदान करना है ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी बेटियों का विवाह संपन्न करा सकें।
योजना के तहत मिलने वाली वित्तीय सहायता का दायरा
इस योजना के अंतर्गत पात्र लाभार्थियों को बेटी के विवाह के शुभ अवसर पर 21,000 रुपये से लेकर 51,000 रुपये तक की नकद सहायता सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर की जाती है। अब तक इस कल्याणकारी योजना के माध्यम से राज्य के 33,321 से अधिक परिवारों को प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित किया जा चुका है, जिससे गरीब परिवारों को बहुत बड़ी राहत मिली है।
श्रेणीवार सहायता राशि का ब्योरा
सरकार द्वारा तय नियमों के मुताबिक, मिलने वाली सहायता राशि का निर्धारण परिवार के वर्ग और कन्या की शैक्षणिक योग्यता के आधार पर किया जाता है। सामान्य वर्ग के बीपीएल, अंत्योदय, विधवा और विशेष योग्यजन परिवारों को 21,000 रुपये की मूल सहायता राशि दी जाती है। वहीं, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अल्पसंख्यक वर्ग के बीपीएल परिवारों के लिए यह मूल सहायता राशि 31,000 रुपये तय की गई है।
बेटी की शिक्षा के आधार पर अतिरिक्त प्रोत्साहन
बेटियों की उच्च शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से राज्य सरकार द्वारा अतिरिक्त राशि भी दी जाती है। यदि विवाह के समय कन्या 10वीं पास है, तो उसकी मूल सहायता राशि में 10,000 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी की जाती है। इसके अलावा, यदि कन्या स्नातक पास है, तो आधार राशि में 20,000 रुपये की अतिरिक्त मदद जोड़ी जाती है। इन शैक्षणिक योग्यताओं के जुड़ने से पात्र लाभार्थियों को अधिकतम 51,000 रुपये तक की कुल सहायता राशि प्राप्त होती है।
पात्रता और शर्तें
इस योजना का लाभ उठाने के लिए कुछ जरूरी शर्तों का पालन करना आवश्यक है। आवेदक परिवार मूल रूप से राजस्थान का स्थायी निवासी होना चाहिए। विवाह के वक्त कन्या की कम से कम आयु 18 वर्ष और दूल्हे की उम्र कम से कम 21 वर्ष होनी अनिवार्य है। इसके अलावा, परिवार की कुल वार्षिक आय 2.5 लाख रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। यह लाभ एक परिवार की अधिकतम दो कन्याओं के विवाह के लिए ही दिया जाता है।
जरूरी दस्तावेज और आवेदन की प्रक्रिया
योजना के तहत आवेदन करने के लिए पहचान और पते के रूप में जन आधार कार्ड, आधार कार्ड और राजस्थान का मूल निवास प्रमाण पत्र होना जरूरी है। पात्रता साबित करने के लिए बीपीएल कार्ड, अंत्योदय कार्ड, विधवा या विशेष योग्यजन प्रमाण पत्र अथवा जाति प्रमाण पत्र देना होगा। इसके अलावा, आयु और विवाह की पुष्टि के लिए जन्म प्रमाण पत्र या 10वीं की मार्कशीट के साथ मैरिज सर्टिफिकेट भी देना जरूरी है। ध्यान देने योग्य बात यह है कि विवाह के 1 साल के भीतर ही आवेदन करना अनिवार्य होता है। इसके साथ ही शैक्षणिक योग्यता के प्रमाण पत्र और बैंक खाते का विवरण भी देना होता है। इस योजना का लाभ उठाने के लिए आवेदक राजस्थान सरकार के आधिकारिक ई-मित्र पोर्टल या राज एसएसओ पोर्टल के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के अंतर्गत ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।



















