भारतीय सिनेमा के दो बड़े कलाकारों शाहरुख खान और नाना पाटेकर के बीच का संबंध केवल फिल्मी पर्दे तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों के बीच गहरे और आत्मीय रिश्ते भी थे। दोनों कलाकार साथ बैठकर चाय पीते थे और कैरम खेलने में वक्त बिताते थे। इस प्रगाढ़ रिश्ते की सबसे अहम कड़ी 1990 के दशक की शुरुआत में देखने को मिली थी, जब एक विवाद के चलते शाहरुख खान को पुलिस हिरासत में जाना पड़ा था और उस कठिन समय में नाना पाटेकर उनकी मदद के लिए सामने आए थे।
मैगजीन की रिपोर्ट और पारिवारिक तनाव
यह घटना उस दौर की है जब शाहरुख खान हिंदी सिनेमा में अपनी पहचान बनाने के लिए लगातार संघर्ष कर रहे थे। उस समय उनकी गौरी खान से नई-नई शादी हुई थी और वे निर्देशक कुंदन शाह की फिल्म 'कभी हां कभी ना' पर काम कर रहे थे। उसी दौरान एक पत्रिका में उनकी एक सह-कलाकार के साथ नाम जोड़ते हुए एक लेख छपा था। इस निराधार गपशप वाली खबर ने उनके वैवाहिक जीवन में तनाव पैदा कर दिया था। शाहरुख खान ने एक सार्वजनिक मंच पर साझा किया था कि इस छपी रिपोर्ट की वजह से गौरी खान बेहद आहत और परेशान हो गई थीं।
पत्रकार के घर तलवार और खुकरी लेकर पहुंचे शाहरुख
अपनी पत्नी की परेशानी देखकर शाहरुख खान ने उस संबंधित पत्रकार से संपर्क साधा जिसने वह लेख लिखा था। पत्रकार ने इसे केवल एक मजाक करार दिया, लेकिन इस स्पष्टीकरण से शाहरुख का रोष कम नहीं हुआ। उन्होंने सीधा सामना करने का मन बना लिया। शाहरुख खान के पास एक हथियार मौजूद था, जो उन्हें उनके ससुर की ओर से मिला था। उनके ससुर सेना में अधिकारी थे और पंजाबी वैवाहिक परंपराओं के तहत उन्होंने शाहरुख को वह तलवार भेंट की थी। शाहरुख उस हथियार को लेकर संबंधित लोगों के पास पहुंच गए। वहां स्थिति काफी तनावपूर्ण हो गई, जिसमें उन्होंने वहां मौजूद लोगों को धमकाया और एक युवक 'खुकरी' से घायल भी हो गया।
फिल्म के सेट से गिरफ्तारी और थाने से धमकी भरा फोन
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पुलिस हरकत में आई और कानूनी कार्रवाई शुरू हुई। पुलिस की टीम सीधे 'कभी हां कभी ना' के शूटिंग सेट पर पहुंची और शाहरुख खान को हिरासत में ले लिया। शाम 6 बजे के बाद का समय होने के कारण उन्हें उस दिन तुरंत जमानत नहीं मिल सकी और उन्हें हवालात में रात बितानी पड़ी। जेल में रहने के दौरान नियमों के तहत उन्हें एक फोन कॉल करने की सुविधा दी गई। शाहरुख ने किसी कानूनी सलाहकार या परिवार के सदस्य को फोन लगाने के बजाय सीधे उसी शख्स का नंबर मिलाया जिससे उनका विवाद हुआ था। फोन पर उन्होंने अपना गुस्सा जाहिर करते हुए उस व्यक्ति को सख्त चेतावनी दी कि बाहर आने के बाद वह उसे नहीं छोड़ेंगे।
मुसीबत में नाना पाटेकर बने मददगार
मामला जब आगे बढ़ा और गौरी खान की चिंताएं और अधिक बढ़ गईं, तब शाहरुख खान ने इस विवाद को कानूनी रूप से शांत करने का निर्णय लिया। इस नाजुक मोड़ पर नाना पाटेकर ने दखल दिया और शाहरुख खान की कानूनी रिहाई सुनिश्चित कराने में सक्रिय मदद की। दोनों कलाकारों ने वर्ष 1992 में रिलीज हुई निर्देशक अजीज मिर्जा की फिल्म 'राजू बन गया जेंटलमैन' में एक साथ स्क्रीन साझा की थी। इसी फिल्म के सेट पर शुरू हुआ उनका संपर्क बाद में अटूट दोस्ती में बदल गया।
नाना पाटेकर का सिनेमाई सफर और सामाजिक योगदान
नाना पाटेकर का 75 वर्ष की उम्र में गोवा स्थित उनके आवास पर दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। उन्होंने अपने लंबे करियर की शुरुआत फिल्म 'गमन' से की थी, जिसके बाद वे 'सलाम बॉम्बे', 'परिंदा', 'तिरंगा' और 'क्रांतिवीर' जैसी यादगार फिल्मों में प्रभावशाली किरदारों में नजर आए। हिंदी और मराठी सिनेमा के साथ-साथ रंगमंच पर भी उनका योगदान असाधारण रहा। अभिनय के अलावा वे किसानों के कल्याण और सामाजिक कार्यों में भी गहराई से जुड़े रहे। नाना पाटेकर ने अपने एक साक्षात्कार में शाहरुख के व्यवहार की सराहना करते हुए कहा था कि इतने वर्षों बाद और शोहरत की ऊंचाइयों पर पहुंचने के बावजूद शाहरुख उनसे हमेशा उसी गर्मजोशी और सम्मान के साथ मिलते रहे।



















