पश्चिम बंगाल की रेजिनगर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव के नतीजे सामने आने के बाद राज्य का सियासी माहौल पूरी तरह गर्मा गया है। इस चुनाव में आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) के प्रमुख और विधायक हुमायूं कबीर को बड़ा राजनीतिक झटका लगा, जब उनके बेटे गुलाम नबी आजाद को हार का सामना करना पड़ा। उल्लेखनीय है कि रेजिनगर विधानसभा सीट हुमायूं कबीर द्वारा खुद इस्तीफा दिए जाने के चलते ही रिक्त हुई थी। मतगणना के बाद शुक्रवार को सामने आए चुनावी फैसले के फौरन बाद हुमायूं कबीर ने अपने रुख में बड़ा बदलाव दिखाते हुए वर्ष 2029 के आम चुनाव में उतरने का एलान कर दिया। उन्होंने साफ कहा कि वे 2029 के लोकसभा चुनाव में बहरामपुर संसदीय क्षेत्र से किस्मत आजमाएंगे और कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी को शिकस्त देंगे। इससे ठीक एक दिन पहले, यानी गुरुवार को उन्होंने सक्रिय राजनीति से किनारा करने के संकेत दिए थे।
उपचुनाव प्रक्रिया और पुलिस प्रशासन पर धांधली के गंभीर आरोप
मतगणना में सामने आए परिणाम पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हुमायूं कबीर ने पूरी चुनावी निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए। उन्होंने मतदान को अनुचित बताते हुए आरोप लगाया कि वास्तविक मतदान कराने के बजाय जनादेश छीना गया है। उनके मुताबिक पुलिस तंत्र ने मुस्लिम मतदाताओं को मतदान केंद्रों तक पहुंचकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करने से रोका। उन्होंने बेलडांगा थाने के प्रभारी अधिकारी और पुलिस अधीक्षक पर सांठगांठ करके 5 करोड़ रुपये लेने का सीधा आरोप लगाया और दावा किया कि यह सब मुख्यमंत्री से बेहतर पदस्थापना पाने की मंशा से किया गया।
अपनी पार्टी के प्रदर्शन का बचाव करते हुए उन्होंने कहा कि तमाम विपरीत परिस्थितियों के बीच भी उनके बेटे को 54 हजार वोट हासिल हुए। हुमायूं कबीर ने दावा किया कि यदि मतदान वाले दिन पुलिस प्रशासन उन्हें हिरासत में नहीं रखता, तो उनके बेटे को 1 लाख 50 हजार वोट मिलते। इसके साथ ही उन्होंने प्रतिद्वंद्वी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार पर भी निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी ने एक ही मतदान केंद्र में जाकर तीन अलग-अलग वोट डाले।
मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद निर्माण और अदालती फैसलों का हवाला
चुनावी नतीजों के इतर हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद में प्रस्तावित बाबरी मस्जिद के निर्माण कार्य पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट कहा कि उन्हें किसी भी राजनीतिक दल या भारतीय जनता पार्टी से कोई प्रमाण पत्र लेने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि भाजपा की राजनीति हमेशा मंदिर केंद्रित रही है, और जब उन्होंने बाबरी मस्जिद की आधारशिला रखी थी तब विरोधियों ने भी मंदिर निर्माण की नींव रखी थी।
मस्जिद निर्माण की वैधानिक स्थिति को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि इस परियोजना के संचालन के लिए बाकायदा एक ट्रस्ट गठित किया गया है, जिसकी पूरी जानकारी भारत सरकार को भी है। उन्होंने बताया कि कलकत्ता उच्च न्यायालय ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मस्जिद का नाम तय करने का वैधानिक अधिकार ट्रस्ट के पास सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के फैसलों के अनुरूप यह ढांचा बाबरी के नाम से ही तैयार किया जाएगा। उन्होंने समयसीमा साझा करते हुए बताया कि इस मस्जिद का निर्माण 6 दिसंबर 2028 तक पूरा कर लिया जाएगा, जहां एक साथ 1 लाख मुस्लिम नमाजी नमाज अदा कर सकेंगे।
संन्यास की बात से पलटे, बहरामपुर से ताल ठोकने और विदेश जाने की बात कही
गुरुवार को विधायकी छोड़ने और राजनीति से हटने की मंशा जताने वाले हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को संन्यास के मुद्दे पर पूरी तरह यू-टर्न ले लिया। अपने नए राजनीतिक कार्यक्रम की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि साल 2029 के मार्च और अप्रैल महीने में होने वाले आम चुनाव में वे बहरामपुर लोकसभा सीट से अपनी उम्मीदवारी पेश करेंगे।
अधीर रंजन चौधरी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस नेता की भाजपा के साथ अंदरूनी सांठगांठ है। उन्होंने दावा किया कि वे शुक्रवार और शनिवार को दिल्ली जाकर नितिन गडकरी से मुलाकात करते हैं। हुमायूं कबीर ने संकल्प दोहराया कि वे आगामी लोकसभा चुनाव में अधीर रंजन चौधरी को पराजित करके दिखाएंगे और उस चुनावी जीत के बाद भारत छोड़कर दुबई चले जाएंगे। इसके अलावा हुमायूं कबीर ने यह भी ऐलान किया कि मुख्यमंत्री और शुभेंदु के खिलाफ उनके रुख के तहत वे अब भविष्य में विधानसभा की कार्यवाही में भाग लेने नहीं जाएंगे।






















