हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ ऐसी चीजें होती हैं जो अनपेक्षित रूप से एक संयोग बन जाती हैं। बॉलीवुड में 'खामोशी' एक ऐसा ही टाइटल रहा है जिसे लेकर एक अनूठा और दिलचस्प इत्तेफाक जुड़ा हुआ है। इस नाम से हिंदी सिनेमा में तीन अलग-अलग दौर में फिल्में बनाई गईं और सबसे खास बात यह रही कि तीनों फिल्मों में अपने-अपने समय के तीन दिग्गज सुपरस्टार राजेश खन्ना, सलमान खान और प्रभु देवा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए। हालांकि इन सभी फिल्मों की किस्मत एक जैसी रही और बॉक्स ऑफिस पर इनमें से कोई भी फिल्म बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब नहीं हो सकी।
साल 1969 की पहली खामोशी और वहीदा रहमान का अभिनय
इस सिलसिले की शुरुआत सबसे पहले साल 1969 में हुई जब 'खामोशी' नाम से पहली फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई। इस फिल्म में उस दौर के उभरते हुए सितारे राजेश खन्ना और हिंदी सिनेमा की जानी-मानी दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने मुख्य भूमिकाएं निभाईं। उस समय राजेश खन्ना इंडस्ट्री में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे थे, जबकि वहीदा रहमान पहले से ही एक स्थापित और सम्मानित अभिनेत्री के रूप में अपनी धाक जमा चुकी थीं।
फिल्म की पटकथा पूरी तरह से मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रिश्तों की जटिलताओं के इर्द-गिर्द बुनी गई थी। निर्देशक असित सेन के निर्देशन में बनी इस मूवी में वहीदा रहमान ने एक समर्पित नर्स का किरदार निभाया था। कहानी में मोड़ तब आता है जब उस नर्स की जिंदगी अपने मरीजों के साथ ज्यादा ही भावनात्मक रूप से जुड़ जाने के कारण धीरे-धीरे उलझती चली जाती है।
दूसरी तरफ राजेश खन्ना ने फिल्म में एक मरीज की भूमिका को बहुत ही संजीदगी से पर्दे पर उतारा था। उस समय फिल्म की कहानी और सभी कलाकारों के अभिनय को समीक्षकों और दर्शकों द्वारा काफी सराहा गया था। विशेष तौर पर वहीदा रहमान के शानदार काम की हर तरफ तारीफ हुई थी। इसके बावजूद फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई बहुत बड़ा चमत्कार नहीं दिखा पाई और इसे अंततः केवल एक औसत प्रदर्शन करने वाली फिल्म ही माना गया।
साल 1996 में संजय लीला भंसाली का दांव और सलमान खान
इस टाइटल के साथ दूसरी कोशिश ठीक सत्ताईस साल बाद यानी साल 1996 में की गई। इस बार जाने-माने फिल्मकार संजय लीला भंसाली ने एक बहुत बड़ा जुआ खेलते हुए इसी नाम से फिल्म बनाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी इस फिल्म में सलमान खान और मनीषा कोइराला को लीड रोल के लिए चुना। इतना ही नहीं, फिल्म में उस दौर के सबसे मजबूत कलाकारों में गिने जाने वाले और हिट की पक्की गारंटी माने जाने वाले नाना पाटेकर को भी एक अहम भूमिका में शामिल किया गया।
संजय लीला भंसाली ने साल 1969 वाली पुरानी फिल्म के नाम से ही प्रेरणा लेते हुए अपनी इस नई फिल्म का नाम 'खामोशी: द म्यूजिकल' रखा। हालांकि, सलमान खान और मनीषा कोइराला की ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री भी इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर डूबने से बचाने में पूरी तरह असफल साबित हुई। तमाम बड़े नामों के बावजूद यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बुरी तरह फ्लॉप हो गई और निर्माताओं की उम्मीदों पर पानी फेर गया।
साल 2019 की तीसरी कोशिश और प्रभु देवा का थ्रिलर प्रयोग
इस सिलसिले का तीसरा और आखिरी पड़ाव साल 2019 में आया जब मेकर्स ने एक बार फिर इसी 'खामोशी' नाम को भुनाने का जोखिम उठाया। तीसरी बार जब इसी नाम से फिल्म बनाई जा रही थी, तो इस बार मुख्य कलाकारों के रूप में प्रभु देवा और तमन्ना भाटिया को कास्ट किया गया। इस सस्पेंस से भरपूर प्रोजेक्ट के निर्देशन की कमान निर्देशक चक्रि टोलेटी के हाथों में सौंपी गई थी।
यह फिल्म पूरी तरह से एक थ्रिलर कहानी पर आधारित थी जिसमें तमन्ना भाटिया एक ऐसे किरदार में नजर आईं जिसकी जिंदगी अचानक से एक बेहद रहस्यमय स्थिति के जाल में फंस जाती है। इसके साथ ही प्रभु देवा ने भी फिल्म में अपनी एक महत्वपूर्ण और दमदार भूमिका निभाई। फिल्म से जुड़े लोगों को इससे काफी बड़ी उम्मीदें थीं, लेकिन सिनेमाघरों में रिलीज होने के बाद इसे दर्शकों की तरफ से कोई खास सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिल पाई।
बॉक्स ऑफिस पर बेहद कमजोर प्रदर्शन के चलते यह फिल्म आखिरकार एक बड़ी डिजास्टर साबित हुई। इस प्रकार यह साबित हो गया कि तीसरी बार भी इस मनहूस टाइटल के साथ आने वाली फिल्म को किसी भी तरह की सफलता नहीं मिल पाई और यह सिलसिला एक बार फिर असफलता पर जाकर ही खत्म हुआ।



















