नब्बे के दशक में सिनेमा के पर्दे पर कई ऐसे गाने उतरे जिन्होंने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। साल 1996 में रिलीज हुई फिल्म प्रेम ग्रंथ पर्दे पर कोई बड़ा कमाल दिखाने में कामयाब नहीं रही, लेकिन इसके संगीत ने इतिहास रच दिया। इस फिल्म का एक खास गीत मैं कमजोर औरत ये मेरी कहानी आज भी अपने हर एक बोल और सुरीले अंदाज से सुनने वालों का दिल झकझोर देता है। इस गाने में छिपी वेदना और एक मजबूर महिला की दास्तान आज भी उतनी ही प्रासंगिक लगती है।
आनंद बख्शी के बोल और लता मंगेशकर की आवाज का जादू
इस मर्मस्पर्शी गीत की रचना में उस दौर के दिग्गजों का योगदान था। गानों के बोल मशहूर गीतकार आनंद बख्शी ने लिखे थे, जो सीधे दिल पर असर करते हैं। वहीं, इसे अपनी जादुई आवाज से अमर बनाने वाली स्वर कोकिला लता मंगेशकर थीं। लता जी की गायकी ने इस गाने के दर्द को इस गहराई तक पहुँचाया कि सुनने वाले की आँखें नम हो जाएँ। इसके अलावा, संगीत की दुनिया की मशहूर जोड़ी लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने इस गीत में ऐसे सुरीले साजों का प्रयोग किया, जो इस दर्द भरी कहानी को और अधिक प्रभावशाली बना देते हैं।
फिल्म में माधुरी दीक्षित का भावुक अभिनय
फिल्म में माधुरी दीक्षित के किरदार की पीड़ा को इस गाने के जरिए पर्दे पर उतारा गया था। ऑन-स्क्रीन माधुरी के भावुक अभिनय और उनकी आँखों के आँसुओं ने इस गीत के प्रभाव को कई गुना बढ़ा दिया। फिल्म में उनके द्वारा दी गई परफॉर्मेंस ऐसी थी कि दर्शक उस किरदार के साथ खुद को जुड़ा हुआ महसूस करने लगे। आज भी समाज में जब कोई मजबूर या पीड़ित महिला इस गाने को सुनती है, तो उसकी आँखें छलक उठती हैं, क्योंकि इसके हर एक शब्द में एक बेबस इंसान की कहानी छिपी हुई है।
आज भी क्यों है यह गाना खास
भले ही प्रेम ग्रंथ सिनेमाघरों में लंबी पारी खेलने में नाकामयाब रही हो, लेकिन इसका संगीत आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर है। समय बीतने के साथ कई गाने आते और जाते हैं, लेकिन कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय की सीमा को पार कर अमर हो जाते हैं। यह गाना भी उसी श्रेणी में आता है, जो आज भी टूटे दिलों और मजबूर महिलाओं की आवाज बनकर गूंजता रहता है।



















