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लता मंगेशकर के वे दो सदाबहार गीत जिन्हें लेकर फिल्म सेट पर मचा था बवाल, एक हुआ रिजेक्ट तो दूसरे ने जीता दिलमनोरंजन
9 जुल॰ 2026, 12:30 am (21 दिन पहले)· 2

लता मंगेशकर के वे दो सदाबहार गीत जिन्हें लेकर फिल्म सेट पर मचा था बवाल, एक हुआ रिजेक्ट तो दूसरे ने जीता दिल

बॉलीवुड की दो कालजयी फिल्मों 'वो कौन थी' और 'पाकीजा' के इन प्रसिद्ध गानों के पीछे छिपे हैं वे रोचक किस्से, जहां निर्देशकों की प्रतिक्रियाएं बदल गई थीं।

भारतीय सिनेमा में संगीत और फिल्मों का रिश्ता अटूट है। भावनाओं को गहराई देने के लिए गीत एक सशक्त माध्यम का काम करते हैं, और अक्सर फिल्म की पटकथा में गाने की स्थिति के अनुसार संगीत तैयार किया जाता है। कई बार ऐसा होता है कि संगीतकार की बनाई धुनों को निर्देशक तुरंत स्वीकार नहीं कर पाते। बॉलीवुड की दो अत्यंत प्रतिष्ठित फिल्में, 'वो कौन थी' और 'पाकीजा', के साथ कुछ ऐसा ही हुआ था। इन दोनों फिल्मों के संगीत में लता मंगेशकर की आवाज में दो ऐसे गाने शामिल हैं, जो आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद हैं। दिलचस्प बात यह है कि एक गाने को शुरुआत में निर्देशक ने सिरे से खारिज कर दिया था, जबकि दूसरे को सुनकर निर्देशक ने सम्मान स्वरूप अपना जूता उठा लिया था।

'वो कौन थी' और रिजेक्शन की कहानी

साल 1964 में रिलीज हुई 'वो कौन थी' एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म थी, जिसका निर्देशन राज खोसला ने किया था। मनोज कुमार, साधना और प्रेम चोपड़ा अभिनीत यह फिल्म विल्की कॉलिन्स के उपन्यास 'द वुमन इन व्हाइट' से प्रेरित थी। फिल्म का निर्माण एनएन सिप्पी ने किया था, जबकि संगीत मदन मोहन ने दिया था और बोल राजा मेहंदी अली खान ने लिखे थे। इस फिल्म का संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ, जिसमें एक गाना आज भी अमर है, 'लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो'। हालांकि, यह सदाबहार गीत पहली बार में निर्देशक राज खोसला को पसंद नहीं आया और उन्होंने इसे रिजेक्ट कर दिया था।

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शूटिंग में बहुत कम समय बचा था और मनोज कुमार ने जब मदन मोहन से इस स्थिति के बारे में बात की, तो उन्होंने सिप्पी और राज खोसला से दोबारा गाना सुनने का अनुरोध किया। दूसरी बार भी राज खोसला ने इसे नापसंद कर दिया। लेकिन तीसरी बार जब उन्होंने यह धुन सुनी, तो वे भावुक हो गए और खुद को कोसते हुए शर्मिंदगी के मारे जूता तक उठा लिया था। इस किस्से का उल्लेख उनकी अधिकृत जीवनी 'राज खोसला: द ऑथराइज्ड बायोग्राफी' में भी मिलता है। फिल्म के निर्माण में मनोज कुमार की अहम भूमिका थी और साधना के अभिनय ने फिल्म में जान फूंक दी थी। फिल्म का बजट करीब 45 लाख रुपये था और इसने 90 लाख रुपये की कमाई के साथ बॉक्स ऑफिस पर सफलता दर्ज की थी। 'नैना बरसे रिमझिम' भी इस फिल्म का एक यादगार हिस्सा था, जिसने साधना को 'मिस्ट्री गर्ल' की पहचान दी।

'पाकीजा' का वो यादगार लम्हा

दूसरे किस्से का संबंध 1972 की फिल्म 'पाकीजा' से है, जिसे कमाल अमरोही ने निर्देशित और प्रोड्यूस किया था। 16 साल के संघर्ष के बाद 4 फरवरी 1972 को यह म्यूजिकल रोमांटिक ड्रामा रिलीज हुआ था। फिल्म में मीना कुमारी और राज कुमार मुख्य भूमिका में थे और यह लखनऊ की तवायफ साहिबजान के जीवन पर आधारित थी। फिल्म के लिए गुलाम मोहम्मद और नौशाद ने संगीत तैयार किया था। इस फिल्म का गाना 'चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था' इतना प्रभावशाली था कि उसे सुनकर कमाल अमरोही इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने जूता उठाकर यह कहा था कि यह गाना बेहतरीन है और कोई इसकी आलोचना नहीं कर सकता।

'पाकीजा' के अन्य गीतों में 'मौसम है आशिकाना' भी काफी लोकप्रिय रहा, जो राग यमन कल्याण पर आधारित है। फिल्म की शूटिंग 1958 में शुरू हुई थी। हालांकि शुरुआती दिनों में दर्शकों ने इसे खास पसंद नहीं किया था, लेकिन 31 मार्च 1972 को मीना कुमारी के निधन के बाद फिल्म के प्रति लोगों की सहानुभूति और नजरिया पूरी तरह बदल गया। सिनेमाघरों में दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ी और अंततः यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई।

सवाल-जवाब

फिल्म 'वो कौन थी' के लिए कौन सा गाना राज खोसला ने रिजेक्ट कर दिया था?
राज खोसला ने फिल्म 'वो कौन थी' के लिए 'लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो' गाने को शुरुआत में रिजेक्ट कर दिया था।
कमाल अमरोही ने किस गाने के लिए अपना जूता उठाया था?
कमाल अमरोही ने 'पाकीजा' फिल्म के 'चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था' गाने को सुनकर अपनी खुशी जाहिर करने के लिए जूता उठाया था।
फिल्म 'पाकीजा' को बनने में कितने साल लगे थे?
फिल्म 'पाकीजा' के निर्माण में 16 साल का लंबा समय लगा था।
मीना कुमारी की मृत्यु का फिल्म 'पाकीजा' की सफलता पर क्या असर पड़ा?
मीना कुमारी की मृत्यु के बाद दर्शकों का फिल्म के प्रति नजरिया बदला और फिल्म देखने के लिए सिनेमाघरों में भारी भीड़ उमड़ी, जिससे यह सुपरहिट हो गई।
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