अस्सी के दशक में हिंदी सिनेमा के पर्दे पर छाने वाली अदाकारा मंदाकिनी ने अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के साथ सामने आई अपनी पुरानी तस्वीर और उससे जुड़े विवाद पर वर्षों बाद स्थिति साफ की है. उन्होंने साफ तौर पर कहा कि उन्हें किसी का न्योता नहीं मिला था, बल्कि वहां की परिस्थिति के चलते वह छवि बन गई जिसने उनके पूरे सिनेमाई सफर को अंधेरे में धकेल दिया.
दुबई के क्रिकेट स्टेडियम की सच्चाई
उस दौर की चर्चित घटना का ब्योरा साझा करते हुए मंदाकिनी ने बताया कि वह अपने पेशेवर काम के सिलसिले में एक मंच प्रस्तुति देने के लिए दुबई पहुंची थीं. कार्यक्रम संपन्न होने के उपरांत वह अन्य जाने-माने चेहरों की तरह मुकाबला देखने खेल मैदान में मौजूद थीं. वहीं पर अन्य हस्तियों की मौजूदगी के बीच वह दृश्य कैमरे में दर्ज हुआ, जिसे बाद में बिल्कुल अलग नजरिए के साथ प्रचारित किया गया.
मुलाकात और विवाद पर अभिनेत्री का पक्ष
घटना की पृष्ठभूमि समझाते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि एक कलाकार के रूप में सार्वजनिक जगहों पर अनगिनत लोग सामने आते हैं और उस समय किसी से दूरी बनाना आसान नहीं होता. मंदाकिनी ने कहा,
मुझे दाऊद ने इनविटेशन नहीं दिया था.उनके अनुसार उस क्षण उन्हें बिल्कुल भनक नहीं थी कि इस गैर-इरादतन उपस्थिति का क्या भीषण असर उनके भविष्य पर पड़ने वाला है. उस दौर में इस छवि के सार्वजनिक होते ही तरह-तरह की मनगढ़ंत बातें गढ़ी जाने लगीं, जिससे उनके निजी और पेशेवर जीवन में भारी उथल-पुथल मच गई.
विवाद का फिल्मी सफर पर असर और पीआर की कमी
अदाकारा ने इस बात को खुले तौर पर माना कि इस अनचाहे विवाद ने उनके तेजी से आगे बढ़ते काम पर बहुत गहरा आघात किया. अपने संघर्ष को याद करते हुए उन्होंने कहा,
इस कॉन्ट्रोवर्सी ने मेरे करियर को भारी नुकसान पहुंचाया.मंदाकिनी ने जिक्र किया कि उन्होंने हर मंच से सच्चाई सामने रखने और अफवाहों को खारिज करने का प्रयास किया था. हालांकि, बाद में उन्हें महसूस हुआ कि ऐसे गंभीर संकट के क्षणों में किसी मजबूत जनसंपर्क तंत्र या पेशेवर प्रबंधन दल का होना कितना जरूरी होता है, जिसकी कमी के कारण वह अपना पक्ष प्रभावी ढंग से स्थापित नहीं कर सकीं.
राज कपूर की खोज से शीर्ष अदाकारा बनने की यात्रा
मंदाकिनी ने वर्ष 1985 में महान फिल्मकार राज कपूर द्वारा निर्देशित बहुचर्चित चलचित्र ‘राम तेरी गंगा मैली’ से हिंदी फिल्म जगत में कदम रखा था. अभिनेता राजीव कपूर के साथ आई इस पहली ही फिल्म ने टिकट खिड़की पर अभूतपूर्व सफलता अर्जित की और अभिनेत्री को पूरे देश में लोकप्रिय बना दिया. इस फिल्म में उनके अभिनय और विशेष दृश्यों, खासकर जलप्रपात वाले दृश्य ने खूब सुर्खियां बटोरीं और उन्हें उस दौर की प्रमुख अभिनेत्रियों की कतार में ला खड़ा किया.
अस्सी और नब्बे के दशक में बड़े सितारों संग अभिनय
शुरुआती बड़ी कामयाबी के बाद उन्होंने कई लोकप्रिय और व्यावसायिक फिल्मों में अपनी प्रतिभा दिखाई. उन्होंने ‘जीवा’, ‘डांस डांस’, ‘प्यार करके देखो’, ‘कमांडो’, ‘जीते हैं शान से’ तथा ‘कहां है कानून’ जैसी फिल्मों में महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं. अपने सक्रिय वर्षों के दौरान मंदाकिनी ने मिथुन चक्रवर्ती, गोविंदा और आदित्य पंचोली जैसे स्थापित कलाकारों के साथ पर्दे पर काम किया. अंततः वर्ष 1996 में रिलीज हुई फिल्म ‘जोरदार’ उनके अभिनय सफर की अंतिम कृति बनी, जिसके पश्चात उन्होंने सिने जगत से स्थायी तौर पर दूरी बना ली.


















