इंटरनेट मंचों पर अभिनेत्रियों की शारीरिक बनावट, वजन में उतार-चढ़ाव और निजी फैसलों की निर्मम समीक्षा करने की आदत लगातार बढ़ती जा रही है। साइबर अपराध की पृष्ठभूमि पर बनी नई थ्रिलर पेशकश ‘स्कैम 2024 – द डिजिटल अरेस्ट स्टोरी’ में अभिनय कर रहीं विद्या मालवदे ने इस आभासी कटुता पर खुलकर अपनी बात रखी है। उनका स्पष्ट मानना है कि किसी के रूप या व्यक्तिगत विकल्पों पर उंगली उठाने वाले लोग असल में अपनी ही मानसिक स्थिति और संकीर्ण सोच का सार्वजनिक प्रदर्शन करते हैं।
टिप्पणियों में छुपा होता है लेखक का अपना चरित्र
जब अभिनेत्रियों को मातृत्व के बाद बढ़े वजन या उम्र के साथ बदलते चेहरों के कारण निशाना बनाए जाने की संस्कृति पर सवाल उठा, तो विद्या मालवदे ने पूरे मामले को दो अलग नजरियों से समझाया। उनका कहना था कि किसी को नीचा दिखाने के लिए की जाने वाली टिप्पणियां पीड़ित व्यक्ति की कमजोरी नहीं, बल्कि टिप्पणीकार की भीतरी कलुषता को उजागर करती हैं। उनके अनुसार, जब कोई इंटरनेट पर गंदी बातें लिखता है तो समस्या उसकी अपनी दृष्टि में होती है, न कि उस शख्स में जिसे निशाना बनाया गया है।
इसी तरह उन्होंने सकारात्मक प्रतिक्रियाओं को भी व्यक्ति की आंतरिक अच्छाई से जोड़ा। उन्होंने कहा कि जो इंसान अपने भीतर मिठास और सकारात्मक दृष्टिकोण रखता है, उसके शब्दों में भी वही झलक मिलती है। खुद को शांत रखने का फॉर्मूला साझा करते हुए उन्होंने बताया, “मैं कोशिश करती हूं कि दूसरों की राय से खुद को परिभाषित न होने दूं।” उनका मानना है कि बाहरी आलोचनाओं को अपने आत्मसम्मान का पैमाना कभी नहीं बनने देना चाहिए।
ऋचा चड्ढा के फलसफे और नकारात्मकता से दूरी का सबक
इस बातचीत में विद्या मालवदे ने अपनी समकालीन कलाकार ऋचा चड्ढा की एक पुरानी और प्रभावी सीख का भी उल्लेख किया। उन्होंने याद दिलाया कि किसी अनजान जगह पर बैठकर जहर उगलने वाले की बातों को कभी भी अपने दिल पर हावी नहीं होने देना चाहिए। उनका तर्क है कि आभासी दुनिया में बैठे आलोचकों के शब्द महज उनकी निजी राय होते हैं, कोई अंतिम सत्य नहीं।
ऐसी जहरीली टिप्पणियों के पीछे की मनोदशा पर बात करते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि जो व्यक्ति स्क्रीन के पीछे बैठकर दूसरों के लिए कड़वे शब्द गढ़ता है, वह खुद भीतर से गहरी नकारात्मकता से भरा होता है। ऐसे लोगों का मुकाबला बहस से करने के बजाय उनसे मानसिक व भावनात्मक दूरी बना लेना ही सबसे समझदारी भरा कदम है।
माइक्रो ड्रामा प्रारूप में नई डिजिटल शुरुआत
विद्या मालवदे ने इस साइबर थ्रिलर परियोजना के जरिए माइक्रो ड्रामा के उभरते प्रारूप में अपना पहला कदम रखा है। ‘स्कैम 2024 – द डिजिटल अरेस्ट स्टोरी’ शीर्षक वाली यह प्रस्तुति वर्तमान में टीवी ऐप पर दर्शकों के लिए उपलब्ध है। इस कथावस्तु में साइबर ठगी और मनोवैज्ञानिक दबाव के ताने-बाने को पर्दे पर उकेरा गया है।
इस शो की मुख्य अभिनय मंडली में विद्या मालवदे के अलावा कई कलाकार शामिल हैं। इस रोमांचक ड्रामा में संदीप अरोड़ा, प्रियांशी त्रिपाठी, पूजा झा, आयुषी त्यागी, शीतल तेजवानी, अशोक के. झा तथा योगेश पवार महत्वपूर्ण भूमिकाओं में नजर आ रहे हैं। कलाकारों की यह टोली डिजिटल दुनिया के खतरों और छल-कपट की परतें दर्शकों के सामने खोलती है।


















