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ठाकुरनगर में मतुआ सम्मेलन पहुंचे शुभेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी पर लगाया समाज को बांटने और CAA विरोध का आरोपपश्चिम बंगाल
1 नव॰ 2026, 2:38 pm (1 घंटे पहले)· 1

ठाकुरनगर में मतुआ सम्मेलन पहुंचे शुभेंदु अधिकारी, ममता बनर्जी पर लगाया समाज को बांटने और CAA विरोध का आरोप

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ठाकुरनगर में अंतरराष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन 2026 में भाग लेते हुए पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर मतुआ समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगाया।

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी रविवार को उत्तर 24 परगना जिले के ठाकुरनगर पहुंचे, जहां उन्होंने मतुआ समुदाय के पारंपरिक गढ़ में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन 2026 में शिरकत की। इस सम्मेलन के दौरान मीडियाकर्मियों से चर्चा करते हुए उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर तीखे राजनीतिक प्रहार किए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछली सरकार ने इस वर्ग के कल्याण पर ध्यान देने के बजाय समाज को विभाजित करने की दिशा में कार्य किया और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) जैसे महत्वपूर्ण विषय का भी पुरजोर विरोध किया।

ठाकुरनगर के विकास को बताया सर्वोच्च प्राथमिकता

पत्रकारों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने ठाकुरनगर क्षेत्र के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मतुआ समाज के इस ऐतिहासिक और सांस्कृतिक केंद्र के उत्थान के लिए ठोस कार्य कर पाना उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि साबित होगी। इस मौके पर उन्होंने कहा, "अगर मैं ठाकुरनगर के लिए कुछ कर सका तो यह मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।" मुख्यमंत्री ने आगे स्पष्ट किया कि पिछली मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतुआ समाज के समग्र विकास के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया, बल्कि प्रत्यक्ष तौर पर उनके हितों को प्रभावित करते हुए नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का खुला विरोध किया। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया कि सम्मेलन के मंच से इस समुदाय के हित में कई अहम घोषणाएं की जाएंगी और आगामी दिनों में उनके सशक्तिकरण के लिए लगातार कार्य जारी रहेगा।

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मतुआ समुदाय की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और सामाजिक आंदोलन

मतुआ समुदाय का सामाजिक और राजनीतिक इतिहास काफी समृद्ध और गहरा रहा है। इस समुदाय की ऐतिहासिक जड़ें अविभाजित पूर्वी बंगाल और वर्तमान बांग्लादेश के भूभाग से जुड़ी हुई हैं। यह एक अनुसूचित जाति (SC) समुदाय है, जिसकी सामाजिक चेतना और उत्थान का आधार 19वीं सदी के उत्तरार्ध में शुरू हुआ एक व्यापक सामाजिक सुधार आंदोलन बना। इस ऐतिहासिक आंदोलन की शुरुआत हरिचंद ठाकुर के नेतृत्व में हुई थी, जिन्होंने सामाजिक बराबरी और अधिकारों के लिए आवाज उठाई।

हरिचंद ठाकुर के मार्गदर्शन में चले इस आंदोलन ने अविभाजित पूर्वी बंगाल के नमोशूद्र वर्ग को संगठित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। पश्चिम बंगाल में नमोशूद्र समुदाय भी अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में शामिल है और वर्तमान समय में राज्य के सामाजिक तथा राजनीतिक ताने-बाने में इस समुदाय की बेहद अहम और निर्णायक भूमिका मानी जाती है।

सवाल-जवाब

शुभेंदु अधिकारी किस कार्यक्रम में शामिल होने ठाकुरनगर पहुंचे थे?
शुभेंदु अधिकारी रविवार को उत्तर 24 परगना के ठाकुरनगर में आयोजित अंतरराष्ट्रीय मतुआ गोसाई सम्मेलन 2026 में भाग लेने पहुंचे थे।
शुभेंदु अधिकारी ने ममता बनर्जी पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतुआ समाज के लिए कुछ नहीं किया, समाज को बांटने का काम किया और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का विरोध किया।
ठाकुरनगर के संबंध में मुख्यमंत्री ने क्या बात कही?
उन्होंने कहा कि यदि वे ठाकुरनगर के लिए कुछ कर सके तो यह उनके लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होगी।
मतुआ समुदाय की ऐतिहासिक उत्पत्ति कहां हुई थी?
मतुआ समुदाय की ऐतिहासिक उत्पत्ति वर्तमान बांग्लादेश के क्षेत्र में हुई थी।
मतुआ समुदाय किस सामाजिक आंदोलन से जुड़ा है और इसके प्रणेता कौन थे?
यह समुदाय 19वीं सदी के उत्तरार्ध में शुरू हुए सामाजिक सुधार आंदोलन से जुड़ा है, जिसका नेतृत्व हरिचंद ठाकुर ने किया था।
मतुआ और नमोशूद्र समुदाय किस प्रशासनिक श्रेणी में आते हैं?
मतुआ और नमोशूद्र समुदाय पश्चिम बंगाल में अनुसूचित जाति (SC) की श्रेणी में आते हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 4

Ravikash Gupta@ravikash·27 मिनट पहले

मतुआ समाज को लेकर राजनीति गरमाती जा रही है, चुनाव से पहले हर कोई अपना पासा फेंक रहा है।

Arjun Mehta@arjun-mehta·26 मिनट पहले

रविकेश जी, पासा फेंकने वाली बात ठीक है, पर मुझे लगता है कि यह सिर्फ चुनाव की बात नहीं है, मतुआ वोट बैंक का गणित बहुत पुराना और पक्का है।

Rohan Verma@rohan-verma·51 मिनट पहले

पिछली बार जब मैं बंगाल गया था, तो ठाकुरनगर के लोगों से बात करके समझ आया था कि सीएए और नागरिकता का मुद्दा उनके लिए कितना संवेदनशील है। चुनाव के वक्त यह हलचल और तेज हो जाती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·51 मिनट पहले

रोहन जी, बिल्कुल सही कहा आपने। चुनाव के समय नागरिकता और सीएए का मुद्दा यहाँ सबसे बड़ा मुद्दा बन जाता है।

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