मशहूर अभिनेता और कॉमेडियन पारितोष त्रिपाठी ने अपने पिता प्रोफेसर रामायण तिवारी की पुण्यतिथि के अवसर पर सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी गहरी भावनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने अपने पिता के जाने के नौ साल पूरे होने पर एक भावुक संदेश लिखा, जिसे पढ़कर उनके चाहने वाले भी काफी गमगीन हो गए। इस पोस्ट में उन्होंने पिता के बिना बीत रहे समय और उनके प्रति अपनी यादों को बेहद मार्मिक ढंग से बयां किया है।
इंस्टाग्राम प्लेटफॉर्म पर अपने पिता की कुछ पुरानी तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने लिखा कि समय बहुत तेजी से निकल गया है और इस बात पर यकीन करना आज भी मुश्किल लगता है कि उनके पिता अब इस दुनिया में नहीं हैं। उन्होंने अफसोस जताया कि उनका इस तरह अचानक चले जाना वक्त से पहले हुआ और उन्हें जीवन में और भी कई चीजें देखनी थीं। आज के समय में हर खुशी और गम के अवसर पर परिवार को उनकी कमी खलती है, जिसे सहन करना काफी कठिन होता है.
यादों की भीड़ और मेले में छूटा हाथ
अपनी पोस्ट में उन्होंने उस भयानक सच का जिक्र किया जिससे हर इंसान डरता है। उन्होंने जुलाई 2017 का वह दौर याद किया जब एक फोन कॉल ने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी थी। फोन के दूसरी तरफ की खामोशी और रोने की आवाज ने सबकुछ अतीत में बदल दिया था। उन्होंने पिता के बिना जीने की तुलना एक ऐसे बच्चे से की जो मेले में अपनों का हाथ छूट जाने के बाद अकेला रह जाता है। उन्होंने बताया कि समय के साथ यादों का कारवां तो बड़ा होता जाता है, लेकिन वह थामने वाला हाथ नजर नहीं आता है.
बेटी मीशा और परिवार का जिक्र
आगे लिखते हुए उन्होंने साझा किया कि हालांकि वक्त के साथ उनके अपने हाथ और शब्द मजबूत हुए हैं, लेकिन भीतर बैठा बच्चा आज भी अपने पिता को पुकारने के लिए जोर-जोर से रोता है ताकि उसकी आवाज उन तक पहुंच सके। उन्होंने अपनी बेटी मीशा का जिक्र करते हुए बताया कि वह अब बाबा, मां, पापा और जय जय जैसे शब्द बोलने लगी है। जब वह सुबह नहाकर पूजा के लिए बैठते हैं तो घंटी की आवाज सुनकर वह दौड़कर पास आ जाती है। उन्होंने यह भी कहा कि जब उनकी बेटी की पढ़ाई शुरू होगी, तो वर्णमाला का पहला अक्षर वे खुद अपने हाथों से सिखाएंगे.
पिता की विद्वत्ता और आगे की यात्रा
पारितोष ने अपने पिता की याद करते हुए लिखा कि वह अंग्रेजी के एक जाने-माने विद्वान और संस्कृत के बड़े पंडित हुआ करते थे। उन्होंने इच्छा जताई कि काश उनकी बेटी मीशा को उसके बाबा ही पहला अक्षर लिखना सिखाते। इसके बावजूद उन्हें इस बात का अहसास है कि उनके पिता की ऊर्जा और आशीर्वाद हमेशा उनके साथ है। उन्होंने अपनी बात खत्म करते हुए कहा कि आज वे जो कुछ भी हैं अपने पिता की बदौलत हैं और उनकी अभिनय की तथा जीवन की यात्रा निरंतर आगे बढ़ रही है.



















