हर साल 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देशभर में गूंजने वाला प्रसिद्ध देशभक्ति गीत मेरा रंग दे बसंती चोला केवल एक संगीतमय रचना नहीं है, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का एक अमर दस्तावेज है. इस कालजयी गीत की रचना महान क्रांतिकारी पंडित राम प्रसाद बिस्मिल ने की थी. उन्होंने वर्ष 1927 में काकोरी षड्यंत्र के बाद लखनऊ सेंट्रल जेल में अपने साथियों के साथ बंद रहने के दौरान इन पंक्तियों को कागज पर उकेरा था. उस कठिन समय में रचा गया यह रचना आज भी हर भारतीय के दिल में राष्ट्रप्रेम और बलिदान की भावना भर देता है.
भारतीय सिनेमा में इस अमर रचना का सफर
आजादी के बाद भारतीय सिनेमा ने इस ऐतिहासिक गीत को बड़ी ही श्रद्धा के साथ दर्शकों तक पहुंचाया. अभिनेता मनोज कुमार की मशहूर क्लासिक फिल्म शहीद में इस रचना को विशेष रूप से शामिल किया गया. फिल्म के लिए संगीतकार और गीतकार प्रेम धवन ने इस गीत को नए सिरे से सजाया और अपनी बेहतरीन बंदिश दी. इस देशभक्ति रचना को संगीत जगत के महान गायकों मुकेश, महेंद्र कपूर और राजेंद्र मेहता ने अपनी दमदार आवाजों से सजाया था. फिल्म शहीद के इस बेहद लोकप्रिय गीत के लिए प्रेम धवन को सम्मानित भी किया गया था.
नए दौर में एआर रहमान की संगीतमय प्रस्तुति
समय बदलने के बाद भी इस गीत की लोकप्रियता और इसका प्रभाव कभी कम नहीं हुआ. बाद में बनी फिल्म द लीजेंड ऑफ भगत सिंह के लिए ऑस्कर विजेता संगीतकार एआर रहमान ने इस राष्ट्रप्रेमी रचना को नए दौर के अनुसार रीक्रिएट किया. रहमान की धुनों ने युवा पीढ़ी के बीच भी इस अमर गीत का जादू कायम रखा. आज भी जब देश आजादी का जश्न मनाता है, तब पंडित राम प्रसाद बिस्मिल की यह रचना स्वतंत्रता संग्राम की यादों को ताजा कर देती है.


















