पाकिस्तान में रहने वाली हिंदू आबादी को लेकर दिए गए बयान पर मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने देश के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी को करारा जवाब दिया है। जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर आसिफ अली जरदारी के दावों की हवा निकालते हुए उन पर तंज कसा, जिसके बाद इंटरनेट पर लोगों के बीच इस मुद्दे को लेकर तीखी बहस शुरू हो गई है।
अल्पसंख्यकों पर आसिफ अली जरदारी का विवादित बयान
पूरा मामला 14 अगस्त का है, जब इस्लामाबाद में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने हिंदू समुदाय का जिक्र किया था। उन्होंने अपने भाषण में यह दावा किया कि पाकिस्तान अपने देश में हिंदुओं को बर्दाश्त करता है और वे वहां अपनी धार्मिक गतिविधियों के लिए पूरी तरह स्वतंत्र हैं। जरदारी का यह भी कहना था कि हिंदू भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में ही रहना पसंद करेंगे। इसके अलावा, उन्होंने अपने भाषण में दावा किया था कि पाकिस्तान में हिंदू आबादी 4 प्रतिशत है और भारतीय लोग 'अखंड भारत' की अवधारणा में विश्वास करते हैं।
जावेद अख्तर ने जरदारी पर क्यों कसा तंज
राष्ट्रपति जरदारी की इस टिप्पणी के बाद प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट साझा की। उन्होंने आसिफ अली जरदारी की राजनीतिक पृष्ठभूमि का जिक्र करते हुए लिखा कि वे बेनजीर भुट्टो से शादी के बाद चर्चा में आए थे। जरदारी द्वारा 3 से 4 प्रतिशत हिंदू आबादी को बर्दाश्त करने की बात पर जावेद अख्तर ने पुराना तंज कसते हुए लिखा कि वे समझ सकते हैं कि 10 प्रतिशत से कम आबादी वाली किसी भी कम्युनिटी के प्रति जरदारी हमेशा से संवेदनहीन रहे हैं।
सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं
जावेद अख्तर के इस जवाब के बाद इंटरनेट उपयोगकर्ताओं ने तरह-तरह की राय दी। एक यूजर ने सवाल उठाते हुए लिखा कि कोई व्यक्ति इतना संवेदनहीन कैसे हो सकता है और क्या पाकिस्तान के संविधान के तहत कोई हिंदू देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। वहीं एक अन्य यूजर ने टिप्पणी की कि कम से कम राष्ट्रपति ने गैर-मुस्लिमों के प्रति अपनी सोच को खुलकर स्वीकार कर लिया है, जिसे ध्यान में रखते हुए ही आगे का रुख तय किया जाना चाहिए।
जनगणना के आंकड़ों ने खोली जरदारी के दावों की पोल
आसिफ अली जरदारी द्वारा बताए गए आबादी के आंकड़े सरकारी रिपोर्ट से मेल नहीं खाते हैं। पाकिस्तान की साल 2023 की जनगणना के अनुसार, वहां हिंदू आबादी लगभग 52 लाख (5.2 मिलियन) है। यह संख्या पाकिस्तान की कुल आबादी का मात्र 2.17 प्रतिशत ही बनती है। यह वास्तविक आंकड़ा राष्ट्रपति द्वारा दावा किए गए 4 प्रतिशत के आंकड़े से काफी कम है, जिससे उनके बयान की प्रामाणिकता पर सवाल खड़े हो गए हैं।



















