सिनेमा जगत से एक अत्यंत दुखद खबर सामने आई है, जहां अपनी स्वाभाविक अदाकारी से दर्शकों के दिलों पर राज करने वाले वरिष्ठ अभिनेता मुश्ताक खान का निधन हो गया है। मुख्य धारा की व्यावसायिक फिल्मों में भले ही उन्होंने कभी नायक की मुख्य भूमिकाएं नहीं निभाईं, लेकिन अपनी छोटी और प्रभावी मौजूदगी से उन्होंने हर दृश्य को यादगार बना दिया। चाहे वह पुलिस अधिकारी का संजीदा रूप हो, किसी गिरोह के गुंडे का किरदार, टैक्सी चालक की भूमिका या फिर किसी बेबस आम नागरिक का दर्द, उन्होंने हर चरित्र में पूरी जान फूंक दी थी।
हास्य और संजीदा किरदारों से बनाई पहचान
नब्बे के दशक में हिंदी सिनेमा के पर्दे पर चरित्र अभिनेताओं का एक अलग ही दबदबा हुआ करता था, और मुश्ताक खान उस दौर के सबसे व्यस्त चेहरों में गिने जाते थे। विशेष रूप से हास्यप्रधान फिल्मों में उनकी टाइमिंग का कोई जवाब नहीं था। वर्ष 2007 में पर्दे पर आई लोकप्रिय कॉमेडी फिल्म वेलकम में उनके द्वारा निभाया गया बल्लू का किरदार आज भी सिनेप्रेमियों के जेहन में ताजा है। इस एक रोल ने उनके अभिनय जीवन को एक नई पहचान दी और उनकी कॉमिक टाइमिंग को घर-घर में सराहा गया।
बचपन के नाटकों और रामलीला से शुरुआत
मुश्ताक खान का जन्म मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में स्थित बैहर नामक कस्बे में हुआ था। उनके जन्म वर्ष को लेकर सार्वजनिक दस्तावेजों और प्रोफाइल्स में दो अलग-अलग तारीखें दर्ज मिलती हैं। कुछ जगहों पर उनका जन्म 31 दिसंबर 1969 बताया गया है, जबकि कई अन्य विवरणों में वर्ष 1959 का उल्लेख मिलता है। अभिनय के प्रति उनका आकर्षण सातवीं कक्षा से ही शुरू हो गया था, जब उन्होंने पहली बार स्कूल और स्थानीय स्तर के नाटकों में भाग लेना शुरू किया। अपनी कला को निखारने के लिए वह स्थानीय रामलीला के मंचनों में भी अभिनय किया करते थे। कॉलेज की पढ़ाई के दौरान भी उनका यह जुड़ाव कभी कमजोर नहीं पड़ा और वह लगातार थिएटर मंचों से जुड़े रहे।
पारिवारिक पृष्ठभूमि और अगली पीढ़ी का सफर
व्यक्तिगत जीवन की बात करें तो मुश्ताक खान ने सलमा खान के साथ वैवाहिक जीवन शुरू किया था। उन्होंने अपनी निजी जिंदगी को हमेशा चकाचौंध और मीडिया की नजरों से दूर ही रखा। उनके परिवार में उनकी पत्नी सलमा खान के अलावा दो बेटे, मोहम्मद अरशद खान और मोहसिन खान हैं। उनके बड़े बेटे मोहम्मद अरशद खान का विवाह सबा खान से हुआ है, जो पेशे से एक शिक्षिका हैं। वहीं उनके छोटे बेटे मोहसिन खान ने अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए मनोरंजन उद्योग का ही रुख किया। हालांकि उन्होंने कैमरे के आगे अभिनय करने के बजाय निर्देशन, निर्माण और कहानी लेखन की राह चुनी। मोहसिन खान ने डिलीवरी बॉय नामक फिल्म का निर्देशन किया है और वह हिंदी के साथ-साथ मराठी सिनेमा में भी बतौर निर्देशक और निर्माता अपनी सक्रिय सेवाएं दे रहे हैं।
फिल्मों में शुरुआती कदम और बड़ा करियर
सिनेमाई पर्दे पर मुश्ताक खान के पदार्पण को लेकर भी कुछ भिन्न तथ्य सामने आते हैं। कई प्रमुख फिल्म अभिलेखों में वर्ष 1980 की क्लासिक फिल्म अल्बर्ट पिंटो को गुस्सा क्यों आता है को उनके शुरुआती काम के तौर पर दर्ज किया गया है, जबकि उसी वर्ष 1980 में रिलीज हुई थोड़ी सी बेवफाई को भी उनके आरंभिक प्रोजेक्ट्स में गिना जाता है। माना जाता है कि थोड़ी सी बेवफाई के निर्माण के दौरान फिल्म निर्देशक इस्माइल श्रॉफ का ध्यान उनकी सहज अभिनय प्रतिभा पर गया था। इसके बाद उनके लिए हिंदी सिनेमा के दरवाजे खुलते चले गए और उन्हें कई फिल्मों में काम मिलने लगा।
अपने आरंभिक दौर में उन्होंने कालिया, सजाए मौत, मैं आजाद हूं और आखिरी गुलाम जैसी प्रमुख फिल्मों में महत्वपूर्ण सहयोगी भूमिकाएं निभाईं। वर्ष 1992 में निर्देशक महेश भट्ट की फिल्म जुनून में उनके द्वारा निभाया गया आदिवासी भीमा का किरदार काफी चर्चित रहा था। इसके अलावा उन्होंने आशिकी जैसी सुपरहिट फिल्मों में भी काम किया। अपने पूरे फिल्मी जीवन के दौरान मुश्ताक खान ने 250 से ज्यादा फिल्मों में काम किया और पर्दे पर विविध प्रकार के भावों को जीवंत किया।
















