कनाडा के जनसांख्यिकीय आंकड़ों में आधिकारिक स्तर पर किए गए ताजा संशोधन ने अर्थव्यवस्था को लेकर बन रही नकारात्मक धारणा को पलट दिया है। स्टेटिस्टिक्स कनाडा की ओर से जारी संशोधित आंकड़ों के अनुसार, चालू वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही के दौरान देश की आबादी में सालाना आधार पर 0.5 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया है। इस वृद्धि ने उन पिछली आशंकाओं को पूरी तरह खत्म कर दिया है, जिनमें आबादी में संकुचन की चेतावनी दी जा रही थी। हालांकि, जनसंख्या बढ़ने के बावजूद प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद यानी जीडीपी के आंकड़ों में कुछ नरमी देखने को मिली है, जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि आने वाले समय में आर्थिक मोर्चे पर संरचनात्मक चुनौतियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं।
जनसांख्यिकी बदलाव और आर्थिक संकेतकों पर इसका असर
रॉयल बैंक ऑफ कनाडा की अर्थशास्त्री रेचल बट्टाग्लिया का मानना है कि जनसंख्या के नए आंकड़ों से व्यापक आर्थिक परिदृश्य में कोई बुनियादी फेरबदल नहीं हुआ है। उनके अनुसार, देश अब भी ऐतिहासिक रूप से सबसे कमजोर विकास दर की ओर बढ़ रहा है। रेचल बट्टाग्लिया ने कहा, "कनाडाई संरचनात्मक जनसांख्यिकीय विकास संबंधी बाधाएं अभी भी महत्वपूर्ण हैं, हालांकि 2026 में पहली बार आबादी में सीधी गिरावट की संभावना अब नहीं दिखती।"
अर्थशास्त्री के अनुसार, जनसंख्या के अनुमानों में लगातार फेरबदल होने के कारण अब विश्लेषकों का ध्यान ऐसे संकेतकों पर केंद्रित हो गया है जो जनसांख्यिकीय उतार-चढ़ाव से सीधे प्रभावित नहीं होते। इन पैमानों में बेरोजगारी दर सबसे प्रमुख है, जो जनसंख्या संशोधन से अप्रभावित रहकर अर्थव्यवस्था की वास्तविक सेहत को स्पष्ट रूप से दर्शाती है। वर्ष 2026 में अब तक बेरोजगारी के आंकड़ों में निरंतर सुधार देखा जा रहा है, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का प्रमाण है। इसके बावजूद आने वाले महीनों में जनसंख्या वृद्धि धीमी पड़ने से कुल जीडीपी और रोजगार सृजन की रफ्तार कुछ सुस्त पड़ने की संभावना बनी हुई है।
ऑस्ट्रेलियाई रोजगार रिपोर्ट और मुद्रा बाजार की स्थिति
वैश्विक विदेशी मुद्रा बाजार में गुरुवार के एशियाई कारोबारी सत्र के दौरान ऑस्ट्रेलियाई डॉलर में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोरी देखी गई और यह 0.7000 के मनोवैज्ञानिक स्तर की तरफ लुढ़क गया। इस गिरावट की मुख्य वजह ऑस्ट्रेलिया का अगस्त महीने का रोजगार आंकड़ा रहा। आंकड़ों के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया की बेरोजगारी दर बढ़कर 4.6 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि बाजार को इसके 4.5 प्रतिशत रहने का अनुमान था। हालांकि, इसी अवधि में नए रोजगार सृजन के आंकड़े उम्मीद से बेहतर रहे और अर्थव्यवस्था में 39.5 हजार नए रोजगार जुड़े। रोजगार बढ़ने के बावजूद बेरोजगारी दर में बढ़ोतरी ने निवेशकों के बीच सतर्कता बढ़ा दी है।
दूसरी ओर, अमेरिकी डॉलर के मुकाबले जापानी येन में भी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। डॉलर-येन जोड़ी तीन सप्ताह के उच्चतम स्तर से फिसलकर एशियाई सत्र में 158.00 के करीब आ गई। जापान में बॉन्ड यील्ड में आए उछाल और मुद्रा बाजार में संभावित सरकारी हस्तक्षेप के डर ने येन को सहारा दिया। इसके विपरीत, अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से सख्त मौद्रिक नीति जारी रहने के दावों और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी के दम पर डॉलर सूचकांक दो महीने के उच्च स्तर के करीब बना हुआ है।
केंद्रीय बैंकों की नीतियां: स्विट्जरलैंड और जापान का रुख
वैश्विक केंद्रीय बैंकों ने भी अपनी मौद्रिक नीतियों को लेकर महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। स्विस नेशनल बैंक यानी एसएनबी ने बाजार की आम सहमति के अनुरूप अपनी प्रमुख नीतिगत ब्याज दरों को 0 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखने का निर्णय लिया है। अपनी समीक्षा में एसएनबी ने स्पष्ट किया कि बैंकों द्वारा रखी जाने वाली दृष्टि जमा राशि पर एक निश्चित सीमा तक नीतिगत दर के बराबर प्रतिफल दिया जाएगा। स्विस केंद्रीय बैंक ने वर्ष 2026 के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को 0.6 प्रतिशत से थोड़ा बढ़ाकर 0.7 प्रतिशत कर दिया है। इसके साथ ही चेतावनी दी गई है कि वैश्विक आर्थिक माहौल में आने वाले उतार-चढ़ाव स्विट्जरलैंड के आर्थिक परिदृश्य के लिए सबसे बड़ा जोखिम बने हुए हैं।
इसके विपरीत, बैंक ऑफ जापान ने मौद्रिक नीति को सामान्य बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। बैंक ऑफ जापान की नीतिगत बैठक में 7-2 के बहुमत से अल्पकालिक ब्याज दर के लक्ष्य को 1.00 प्रतिशत से बढ़ाकर 1.25 प्रतिशत करने की मंजूरी दी गई। केंद्रीय बैंक का यह फैसला बाजार विश्लेषकों के उस अनुमान के बिल्कुल अनुकूल रहा, जिसकी उम्मीद पिछले कई हफ्तों से जताई जा रही थी। इस नीतिगत बढ़ोतरी से जापानी बॉन्ड बाजारों में नई हलचल देखने को मिल रही है।
सोने में नरमी और भू-राजनीतिक वार्ता पर टिकी नजरें
अंतरराष्ट्रीय जिंस बाजार में सोने की कीमतों में लगातार दूसरे कारोबारी दिन मंदी का रुख बना रहा। यूरोपीय सत्र के पहले पहर के दौरान सोना गिरकर 4,300 डॉलर प्रति औंस के नीचे कारोबार करता नजर आया, जो इसका एक सप्ताह का निचला स्तर है। सर्राफा बाजार में इस दबाव का मुख्य कारण अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली प्रस्तावित उच्चस्तरीय बैठक को लेकर निवेशकों की सतर्कता है।
हालांकि वित्तीय बाजारों को इस द्विपक्षीय बातचीत से किसी बहुत बड़े नीतिगत समझौते की उम्मीद नहीं है, फिर भी कारोबारी दुर्लभ पृथ्वी खनिजों की आपूर्ति, प्रौद्योगिकी प्रतिबंधों और मौजूदा व्यापार समझौते के विस्तार से जुड़े घटनाक्रमों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं। इस वार्ता के संभावित नतीजों को देखते हुए निवेशक फिलहाल जोखिम भरे निवेशों और सुरक्षित माने जाने वाले सोने दोनों में ही सतर्क रुख अपना रहे हैं।



















