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रेखा की 'मनहूस' फिल्म ने तोड़ी अमिताभ और धर्मेंद्र की दोस्तीमनोरंजन
18 जून 2026, 9:24 pm (45 दिन पहले)· 6

रेखा की 'मनहूस' फिल्म ने तोड़ी अमिताभ और धर्मेंद्र की दोस्ती

फिल्म 'राम बलराम' ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर सफलता पाई, बल्कि यह अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की दोस्ती को भी खत्म कर दिया। इस फिल्म ने कई विवादों को जन्म दिया, जो आज भी चर्चा का विषय है।

70-80 के दशक में, देवानंद के भाई विजय आनंद को दो मशहूर सितारों, अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र, के साथ काम करने का मौका मिला। फिल्म का नाम था ‘राम बलराम’, जिसे पूरा करने में विजय आनंद को काफी मेहनत करनी पड़ी। यह फिल्म 1975 में शुरू हुई और चार साल बाद, 1980 में रिलीज हुई। यह रेखा और जीनत अमान की एकमात्र फिल्म थी, जिसमें दोनों ने एक साथ काम किया। हालांकि, यह फिल्म इतनी 'मनहूस' साबित हुई कि इसके चलते अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की दोस्ती में दरार आ गई। इसी के साथ, यश चोपड़ा के साथ भी अमिताभ का रिश्ता खराब हो गया।

‘राम बलराम’ में प्रमुख भूमिकाओं में अमिताभ बच्चन, धर्मेंद्र, रेखा और जीनत अमान थे। इसके अलावा, अजीत, प्रेम चोपड़ा, हेलेन और अमजद खान ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएँ निभाईं। फिल्म का निर्देशन और संपादन विजय आनंद ने किया, और उन्होंने ही कहानी भी लिखी थी। स्क्रीनप्ले के लिए कमलेश्वर और विजय आनंद ने मिलकर काम किया, जबकि डायलॉग भी कमलेश्वर ने लिखे थे। इस फिल्म के प्रोड्यूसर टीटो थे। यह अमिताभ और धर्मेंद्र की साथ में तीसरी और अंतिम फिल्म थी।

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फिल्म का संगीत लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था, और गीतकार आनंद बख्शी थे। इसके कई गाने अत्यधिक लोकप्रिय हुए, जिनमें ‘हमसे भूल हो गई’ शामिल है। विजय आनंद ने इस फिल्म को रजनीश के आश्रम से लौटकर बनाया था, और प्रोड्यूसर टीटो ने धर्मेंद्र और अमिताभ को इस फिल्म के लिए साइन किया था।

प्रोड्यूसर टीटो का असली नाम कुशाल दीप सिंह जुनेजा था। इस फिल्म के लिए धर्मेंद्र ने अमिताभ बच्चन से अधिक पैसे लिए थे, जिसमें धर्मेंद्र को 6 लाख रुपये और अमिताभ को 4 लाख रुपये मिले थे। अधिक फीस मिलने के बावजूद, धर्मेंद्र ने फिल्म के प्रति रुचि नहीं दिखाई, जिसके कारण फिल्म की प्रगति में देरी होने लगी।

इसी दौरान, प्रोड्यूसर टीटो ने अमिताभ बच्चन को एक और फिल्म ‘मिस्टर नटवरलाल’ में साइन कर लिया। जब धर्मेंद्र को इस बारे में पता चला, तो वह खुद को असुरक्षित महसूस करने लगे और काम में रुचि खोने लगे। उन्होंने धीरे-धीरे काम में इमोशन डालना बंद कर दिया और अमिताभ की नकल करने लगे।

विजय आनंद ने देखा कि धर्मेंद्र अपनी परफॉर्मेंस पर ध्यान नहीं दे रहे थे, जबकि अमिताभ घर से डायलॉग और सीन की तैयारी करके आते थे। फिल्म की डबिंग के दौरान भी धर्मेंद्र ने नखरे दिखाए। गोल्डी ने कई बार उन्हें समझाया, लेकिन धर्मेंद्र ने उनकी मौजूदगी में डबिंग करना बंद कर दिया। फिल्म को पूरा करने में चार साल से अधिक का समय लगा, और यह 28 नवंबर 1980 को रिलीज हुई। फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन किया और उस साल की तीसरी बड़ी हिट फिल्म बनी, लेकिन इसने अमिताभ और धर्मेंद्र के बीच हमेशा के लिए दरार पैदा कर दी। इसके बाद, दोनों ने कभी साथ में काम नहीं किया।

इतना ही नहीं, इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन और यश चोपड़ा की दोस्ती को भी प्रभावित किया। दरअसल, अमिताभ इस फिल्म के निर्माण के दौरान ‘मिस्टर नटवरलाल’ और ‘सिलसिला’ में भी काम कर रहे थे। ‘मिस्टर नटवरलाल’ का निर्देशन राकेश कुमार कर रहे थे, जिन्होंने स्क्रीनप्ले भी लिखा था और अमिताभ के करीबी दोस्त बन गए थे। अमिताभ, मि. नटवरलाल के मुंबई के डिस्ट्रीब्यूटर भी थे, जिससे वह यश चोपड़ा की फिल्म ‘सिलसिला’ को समय पर डब नहीं कर पाए। जब यश चोपड़ा को इस बात का पता चला, तो वह दुखी हुए, और ‘सिलसिला’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल नहीं हो पाई। इस घटना ने यश चोपड़ा और अमिताभ बच्चन के रिश्ते को भी खराब कर दिया।

सवाल-जवाब

फिल्म 'राम बलराम' कब रिलीज हुई थी?
फिल्म 'राम बलराम' 28 नवंबर 1980 को रिलीज हुई थी।
इस फिल्म में रेखा और जीनत अमान ने क्यों काम किया?
यह फिल्म रेखा और जीनत अमान की एकमात्र फिल्म थी, जिसमें दोनों ने साथ में काम किया।
धर्मेंद्र को फिल्म के लिए कितनी फीस मिली थी?
धर्मेंद्र को इस फिल्म के लिए 6 लाख रुपये की फीस मिली थी।
इस फिल्म ने अमिताभ और धर्मेंद्र की दोस्ती को कैसे प्रभावित किया?
इस फिल्म ने अमिताभ और धर्मेंद्र की दोस्ती में दरार पैदा कर दी, जिससे दोनों ने कभी साथ में काम नहीं किया।
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