हिंदी सिनेमा की दिग्गज अभिनेत्री सायरा बानो ने अपने 82वें जन्मदिन के मौके पर अपनी निजी जिंदगी से जुड़े कुछ बेहद खास और भावनात्मक संस्मरण साझा किए हैं। सायरा बानो और दिलीप कुमार की प्रेम कहानी आज भी फिल्मी गलियारों में एक सुनहरी मिसाल के रूप में याद की जाती है। इस विशेष अवसर पर अभिनेत्री ने अपने शुरुआती दिनों को याद करते हुए बताया कि वह बचपन के दिनों से ही दिलीप साहब की बहुत बड़ी प्रशंसक थीं।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए उन्होंने खुलासा किया कि जब वह केवल 12 वर्ष की थीं, तभी से वह दिलीप कुमार को चाहने लगी थीं। उनके दीवानेपन का आलम यह था कि उनकी मां ने दिग्गज अभिनेता के आवास के बिल्कुल पास ही उनके रहने के लिए एक नया आशियाना बनवा दिया था ताकि वह उनके करीब रह सकें।
बचपन का एकतरफा प्यार और सपने
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर पुरानी और अनदेखी तस्वीरें साझा करते हुए उन्होंने अपने शुरुआती दौर की यादों के पन्ने पलटे। उन्होंने बताया कि उस दौर में उनके जन्मदिन बहुत ही भव्य तरीके से मनाए जाते थे और समारोह में आने वाला केक इतना विशाल होता था कि देखने वाले हैरान रह जाते थे। किशोरावस्था की दहलीज पर कदम रखते ही उनके जेहन में दो ही बड़े लक्ष्य थे, पहला यह कि उन्हें हिंदी फिल्मों में अपनी पहचान बनानी थी और दूसरा यह कि किसी तरह उनकी मुलाकात दिलीप कुमार से हो जाए। वह इतनी जुनूनी फैन थीं कि उनके साथ पर्दे पर काम करना चाहती थी, हालांकि शुरुआती दौर में दिलीप साहब उन्हें उम्र में बहुत छोटा मानकर फिल्मों में साथ काम करने से इंकार कर देते थे।
उनके फिल्मी करियर में बड़ा बदलाव तब आया जब उनकी फिल्म 'जंगली' बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफल साबित हुई और उनके जीवन की दिशा ही बदल गई। सायरा बानो ने बताया कि उनकी मां नसीम बानो ने उन्हें जिंदगी का सबसे अनोखा तोहफा देते हुए दिलीप कुमार के बंगले के ठीक पास ही घर बनवाकर दिया था। इसके बाद वर्ष 1966 में मां के विशेष आग्रह पर दिलीप कुमार मद्रास से एक विशेष विमान के जरिए उनके जन्मदिन के जश्न में शरीक होने पहुंचे थे, जिसके बाद से दोनों के बीच रिश्तों की एक नई और खूबसूरत शुरुआत हुई थी।
दिलीप साहब की यादें आज भी हैं साथ
इन पुरानी बातों को याद करते हुए अभिनेत्री काफी भावुक हो गईं। उन्होंने कहा कि उनके जीवन की सबसे बड़ी पूंजी कोई आलीशान दावतें या महंगे तोहफे नहीं हैं, बल्कि वह बेइंतिहा प्यार है जो उन्हें अपने परिवार और दिलीप कुमार से मिला। दिलीप साहब को सिनेमा का बेताज बादशाह बताते हुए उन्होंने कहा कि भले ही आज वह उनके बीच नहीं हैं, लेकिन हर जन्मदिन पर उन्हें ऐसा अहसास होता है जैसे उनका प्यार कमरे में उनसे पहले ही मौजूद हो।



















