फिल्ममेकर एसएस राजामौली अपनी अगली बड़ी पेशकश 'वाराणसी' को लेकर लगातार सुर्खियों में बने हुए हैं। इस मेगा प्रोजेक्ट में महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन जैसे दिग्गज कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आने वाले हैं। फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच काफी समय से उत्साह का माहौल बना हुआ है, और निर्देशक इसे हर स्तर पर भव्य बनाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसा बताया जा रहा है कि इस महत्वाकांक्षी फिल्म की पूरी शूटिंग आईमैक्स फॉर्मेट में की गई है, जो इसे सिनेमाघरों में देखने का एक अलग और शानदार अनुभव प्रदान करेगी। सिर्फ शूटिंग ही नहीं, बल्कि इसके पोस्ट-प्रोडक्शन और विशेषकर डबिंग के काम पर भी बेहद बारीकी से काम किया जा रहा है ताकि वैश्विक स्तर पर इसका प्रभाव बेहतरीन हो सके।
1500 से अधिक ऑडिशन और एआई का विरोध
फिल्म से जुड़े सूत्रों के अनुसार, मेकर्स ने यह तय किया है कि अलग-अलग भाषाओं में रिलीज होने वाले संस्करणों के लिए किसी भी तरह की एआई से बनी आवाजों का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। इसके बजाय, असली वॉइस ओवर आर्टिस्टों को ही चुना जाएगा। अपनी फिल्म के हर एक किरदार की मूल भावनाओं और गहराई को बनाए रखने के लिए, टीम ने वॉइस ओवर कलाकारों को फाइनल करने से पहले लगभग 1,500 से ज्यादा अलग-अलग आवाजों को सुनने और उनके ऑडिशन लेने का बड़ा फैसला किया है। एसएस राजामौली का यह स्पष्ट मानना है कि डबिंग प्रक्रिया केवल संवादों का साधारण अनुवाद मात्र नहीं होनी चाहिए, बल्कि आवाज के माध्यम से किरदार का व्यक्तित्व, उसके इरादे और उसकी आंतरिक भावनाएं पूरी तरह से दर्शकों तक पहुंचनी चाहिए। वह डबिंग में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के प्रयोग के पूरी तरह खिलाफ हैं और उनका मानना है कि ऐसा करना कलाकारों की मेहनत और अभिनय के साथ अन्याय होगा।
120 देशों और 50 भाषाओं में ग्लोबल रिलीज
यह फिल्म सिर्फ भारत तक सीमित रहने वाली पैन इंडिया फिल्म नहीं है, बल्कि इसे एक बड़े पैमाने पर पैन वर्ल्ड ग्लोबल फिल्म के रूप में तैयार किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, महेश बाबू, प्रियंका चोपड़ा और पृथ्वीराज सुकुमारन स्टारर 'वाराणसी' दुनिया भर के 120 देशों में एक साथ रिलीज की जाएगी। इस फिल्म को कुल 50 अलग-अलग भाषाओं में डब करके प्रदर्शित किया जाएगा, जिससे यह दुनिया के हर कोने के दर्शकों तक आसानी से पहुंच सके। इन भाषाओं में प्रमुख रूप से तेलुगु, हिंदी, तमिल, मलयालम, और बंगाली के साथ-साथ फ्रेंच, स्पेनिश, जर्मन, अरबी, जापानी और कोरियाई जैसी कई अंतरराष्ट्रीय भाषाएं भी शामिल हैं। निर्देशक यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जब फिल्म भाषाई सीमाओं को पार करे, तो कलाकारों के अभिनय और उनके द्वारा पर्दे पर छोड़े गए प्रभाव में किसी भी प्रकार की कोई कमी न आए।


















