दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर इन दिनों जाति आधारित आरक्षण के खिलाफ एक बड़ा विरोध प्रदर्शन देखने को मिल रहा है, जहां भारी संख्या में युवा और प्रदर्शनकारी एकत्र हुए हैं। हाथों में बैनर, पोस्टर और भगवा झंडे थामे इन लोगों ने जातिगत आरक्षण व्यवस्था को समाप्त करने और आरक्षण का आधार सिर्फ आर्थिक स्थिति को बनाए जाने की जोरदार मांग उठाई है। इस आंदोलन के चलते राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षा व्यवस्था और प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद नजर आ रहा है।
चिराग पासवान की प्रतिक्रिया और सरकार का रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने पटना में पत्रकारों से बातचीत करते हुए स्पष्ट किया कि यदि विरोध प्रदर्शन कर रहे लोग अपनी मांगों को एक व्यवस्थित और कायदे के तरीके से सामने रखते हैं, तो सरकार उनकी बात सुनने और बातचीत करने के लिए तैयार है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि आरक्षण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर किसी भी तरह की गलतफहमी देश के एक बड़े वर्ग में गहरी नाराजगी पैदा कर सकती है, इसलिए इस पर बेहद संवेदनशीलता की जरूरत है।
आर्थिक आधार पर आरक्षण और ईडब्ल्यूएस का मुद्दा
प्रदर्शनकारियों की प्रमुख मांग रही है कि सरकारी सहायता और आरक्षण का लाभ देने के लिए जाति के स्थान पर केवल आर्थिक मानदंडों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। इस पर अपनी बात रखते हुए चिराग पासवान ने याद दिलाया कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार पहले ही आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों यानी ईडब्ल्यूएस के लिए 10 प्रतिशत का कोटा देश भर में लागू कर चुकी है। उन्होंने यह भी कहा कि इस तरह के प्रदर्शनों और बहसों के बीच विभिन्न राजनीतिक दलों की तरफ से भी लगातार तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।





















