अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब एक नए और बड़े दौर में प्रवेश कर चुका है। दोनों देशों के बीच टकराव को आठ महीने से ज्यादा का वक्त बीत चुका है, लेकिन ईरानी पक्ष ने अभी तक घुटने नहीं टेके हैं और डटकर मुकाबला किया है। पारंपरिक सैन्य ताकत के बलबूते पर अमेरिका इस संघर्ष में ईरान को मात देने में पूरी तरह नाकाम साबित हुआ है। हालात यहां तक पहुंचे कि अमेरिका को अपने ताकतवर युद्धपोत यूएसएस अब्राहम लिंकन को भी मैदान से वापस बुलाना पड़ गया। जब हथियारों और जंग के मैदान में बात नहीं बनी, तो अब अमेरिका ने अपनी रणनीति बदलते हुए वित्तीय और आर्थिक मोर्चे पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव मोहसिन रेजाई ने वॉशिंगटन और उसका समर्थन करने वाले तमाम देशों को गंभीर परिणामों की चेतावनी दी है।
डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी और ईरान की दो टूक प्रतिक्रिया
मोहसिन रेजाई की यह चेतावनी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कड़े बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने ईरान का साथ देने वाले देशों को अब तक के सबसे भीषण आर्थिक युद्ध का सामना करने की बात कही थी। डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ पर साफ शब्दों में लिखा था कि यह अब तक के सबसे खतरनाक स्तर का आर्थिक युद्ध और अलगाव होगा। इस धमकी के जवाब में ईरानी अधिकारी मोहसिन रेजाई ने स्पष्ट कर दिया है कि जो भी राष्ट्र ईरान के खिलाफ अमेरिका के इस वित्तीय अभियान में उसका साथ देगा, उसे ईरान अपना सीधा दुश्मन मानेगा। ईरान ने अपनी रणनीति स्पष्ट करते हुए यह भी चेतावनी दी है कि यदि क्षेत्रीय देश इस आर्थिक घेराबंदी में शामिल हुए, तो ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट से किसी भी तरह का तेल निर्यात नहीं होने देगा।
क्या होता है आर्थिक युद्ध और इसके मुख्य हथियार
जब दो या दो से अधिक देश आपस में बिना किसी तरह की गोलियों, तोपों, मिसाइलों या टैंकों का इस्तेमाल किए सीधे एक-दूसरे की वित्तीय और व्यावसायिक व्यवस्था पर प्रहार करते हैं, तो उसे आर्थिक युद्ध कहा जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य विरोधी देश की अर्थव्यवस्था को अंदर से खोखला करना, उसकी मुद्रा की कीमत को रसातल में पहुंचाना और उसे दुनिया के बाकी हिस्सों से अलग-थलग करना होता है, ताकि वह मजबूर होकर आत्मसमर्पण कर दे। इस तरह के संघर्ष में सैन्य साजो-सामान की जगह पूरी तरह से वित्तीय उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। हाल ही में इसका एक अन्य उदाहरण भी देखने को मिला था, जब यूक्रेन ने रूस की सबसे बड़ी ऑनलाइन मार्केटिंग कंपनी वाइल्डबेरी के गोदामों और दफ्तरों को निशाना बनाया था ताकि उसकी अर्थव्यवस्था को कमजोर किया जा सके।
आर्थिक युद्ध के प्रमुख हथियारों में कई तरह के उपाय शामिल होते हैं
- आर्थिक प्रतिबंध: लक्षित देश के साथ आयात और निर्यात समेत तमाम व्यापारिक गतिविधियों पर आंशिक या पूर्ण पाबंदी लगा देना।
- संपत्ति फ्रीज करना: विदेशी बैंकों में रखे गए उस देश के सरकारी खजाने और व्यक्तिगत खातों के पैसों को ब्लॉक कर देना।
- वित्तीय प्रणाली से बाहर करना: स्विफ्ट जैसे अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग नेटवर्क से उस देश का नाता काट देना, जिससे वह दुनिया भर में कोई लेन-देन न कर सके।
- टैरिफ और सीमा शुल्क: विरोधी देश से आने वाले सामानों पर इतना भारी टैक्स थोप देना कि उनकी बिक्री बाजार में पूरी तरह रुक जाए, जैसा कि अमेरिका ने पिछले साल कई देशों के मामले में किया था।
- सेकेंडरी प्रतिबंध: जो भी देश या कंपनी पीड़ित राष्ट्र के साथ व्यापारिक रिश्ते रखेगी, उस पर भी कड़े प्रतिबंध लगाने की धमकी देना, जिसका इस्तेमाल डोनाल्ड ट्रंप ने बिना नाम लिए ईरान समर्थकों के खिलाफ किया है।
ईरान को घेरने की अमेरिकी रणनीति और हॉर्मुज स्ट्रेट की चेतावनी
सैन्य मोर्चे पर मुंह की खाने के बाद अमेरिका ने अब ईरान की अर्थव्यवस्था को तहस-नहस करने के लिए आर्थिक घेराबंदी का रास्ता चुना है। अमेरिकी रणनीति का मुख्य केंद्र बिंदु ईरान के तेल और गैस के व्यापार को पूरी तरह शून्य पर लाना और उसे वैश्विक बैंकिंग तंत्र से पूरी तरह काट देना है। इन सेकेंडरी प्रतिबंधों का सीधा असर भारत, चीन और रूस जैसे बड़े देशों पर पड़ने की संभावना है, जो ईरान से ऊर्जा संसाधन यानी तेल और गैस का आयात करते हैं। मोहसिन रेजाई ने दो टूक कहा कि यदि पड़ोसी देश अमेरिका के इस आर्थिक कुचक्र का हिस्सा बनते हैं, तो ईरान हॉर्मुज स्ट्रेट को पूरी तरह बंद कर देगा और वहां से तेल का निर्यात रोक दिया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि पिछले कई वर्षों के दौरान ईरान ने अमेरिकी पाबंदियों से बचने और अपने तेल की बिक्री जारी रखने के नायाब तरीके खोज लिए हैं। उनके मुताबिक, हॉर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रखा जाएगा जब तक अमेरिका पिछले साल जून में हुए ईरान-अमेरिका शांति समझौते यानी एमओयू के तहत अपनी प्रतिबद्धताओं को पूरी तरह पूरा नहीं करता।
ईरान के विदेश मंत्री का तीखा तंज
इस पूरे घटनाक्रम के बीच ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी राष्ट्रपति की नीतियों पर करारा तंज कसा है। उन्होंने कहा कि ईरान के खिलाफ अमेरिका का यह नया आर्थिक अभियान भी उसकी पुरानी और दमनकारी नीतियों की तरह बुरी तरह विफल साबित होगा। सैयद अब्बास ने अपने एक्स अकाउंट पर सिलसिलेवार तरीके से लिखा कि चौदह साल पहले इतिहास के सबसे कड़े प्रतिबंध पूरी तरह नाकाम रहे थे, आठ साल पहले अधिकतम दबाव की नीति का यही हश्र हुआ था, पांच महीने पहले बिना शर्त आत्मसमर्पण का दावा भी फेल हो गया था और आज का यह अब तक का सबसे कठोर आर्थिक अभियान भी पूरी तरह नाकाम होकर रहेगा।





















