तकनीक के विस्तार के साथ ही उसके गलत इस्तेमाल के मामले भी तेजी से बढ़ने लगे हैं। फिल्म जगत में अब यह समस्या कलाकारों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुकी है। हाल ही में अभिनेत्री श्रेया सरन ने इस गंभीर विषय पर खुलकर बात की है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक के जरिए तस्वीरों के साथ होने वाली छेड़छाड़ पर अपना गुस्सा जाहिर किया है।
मॉर्फ्ड तस्वीरों और आपत्तिजनक बदलावों का सामना
दृश्यम और आरआरआर जैसी चर्चित फिल्मों में अपनी कला का प्रदर्शन कर चुकीं श्रेया सरन ने साझा किया कि उन्हें अक्सर इस तरह की विकृतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने बताया कि तकनीक की मदद से उनकी तस्वीरों और वीडियो को इस हद तक बदल दिया जाता है कि कई बार उनके लिए खुद यह पहचान पाना भी मुश्किल हो जाता है कि वह तस्वीर वास्तव में उनकी है या नहीं। कभी शरीर के आकार से छेड़छाड़ की जाती है तो कभी तस्वीरों से कपड़ों को तक हटा दिया जाता है। इस तरह के कृत्य बेहद विचलित करने वाले हैं और इन्हें अनदेखा नहीं किया जाना चाहिए।
तकनीक के सकारात्मक और नकारात्मक पहलू
एक ओर जहां श्रेया ने इस बात को स्वीकार किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता कई क्षेत्रों में मददगार साबित हो सकती है और इसके अच्छे उपयोग भी हैं, वहीं दूसरी ओर उन्होंने इसके खतरनाक परिणामों पर भी जोर दिया। उनका मानना है कि हर नई तकनीक के साथ कुछ चुनौतियां अवश्य आती हैं, जिनसे पार पाना जरूरी होता है। हालांकि इस तरह के गंभीर दुरुपयोगों को सामान्य मानकर स्वीकार नहीं किया जा सकता क्योंकि यह सीधे तौर पर किसी की गरिमा पर प्रहार है।
जाह्नवी कपूर के वीडियो पर हुआ था बड़ा विवाद
यह पूरा मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ समय पहले जाह्नवी कपूर से जुड़े एक वीडियो को लेकर भारी हंगामा मचा था। फिल्म देवरा पार्ट 1 के लोकप्रिय गाने चुट्टमल्ले में जाह्नवी के साथ जूनियर एनटीआर नजर आए थे। इस गाने से जुड़े एक मॉर्फ्ड वीडियो को कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बदलकर अश्लील रूप दे दिया गया था, जो मूल गीत का हिस्सा बिल्कुल नहीं था। इस घटना के खिलाफ 4 अक्टूबर 2026 को जाह्नवी ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए अपनी कड़ी आपत्ति जताई थी। उस दौरान उनके समर्थन में दक्षिण भारतीय सिनेमा के कई बड़े नाम जैसे जूनियर एनटीआर, चिरंजीवी, विजय देवरकोंडा और खुशबू सुंदर जैसे सितारे खुलकर सामने आए थे।
सिनेमा जगत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
इन तमाम तकनीकी चुनौतियों के बीच श्रेया सरन ने फिल्म उद्योग में महिलाओं की बदलती भूमिका को लेकर खुशी भी जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज के समय में कैमरे के पीछे महिलाओं की उपस्थिति में काफी इजाफा हुआ है। अब वे केवल अभिनय तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि कथा चयन, फिल्म निर्माण में निवेश और रचनात्मक फैसलों में भी अपनी मजबूत भागीदारी निभा रही हैं। उनका मानना है कि केवल महिलाओं पर आधारित फिल्में बनाने भर से वास्तविक बदलाव नहीं आएगा, बल्कि जरूरी यह है कि पटकथा लेखन, निर्माण और वित्तीय निर्णयों में भी महिलाओं का सीधा दखल हो। जब महिलाएं खुद ऐसे महत्वपूर्ण फैसले लेंगी, तभी उनके जीवन और संघर्षों को पर्दे पर अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से उकेरा जा सकेगा।
सिनेमा के बदलते दौर और पुरानी यादें
साक्षात्कार के दौरान अभिनेत्री ने फिल्म उद्योग में आए बदलावों पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत को याद करते हुए बताया कि उन्होंने साल 2001 में आई फिल्म इष्टम से अपने अभिनय सफर की शुरुआत की थी। उस दौर में शूटिंग का माहौल आज के मुकाबले काफी अलग हुआ करता था। शुरुआती तीन फिल्मों की शूटिंग के दौरान उनके पास कोई वैनिटी या मेकअप वैन तक नहीं होती थी। कलाकार और क्रू मेंबर किसी पेड़ की छांव में बैठकर भोजन करते थे और एक-दूसरे के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताते थे। पुराने दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि उस वक्त निर्देशक और कलाकार जीवन, साहित्य और संगीत पर लंबी चर्चाएं करते थे। लोग रिकॉर्डर साथ लेकर बैठते थे और मिलकर गाने सुनते थे। इसके विपरीत आज के दौर में सेट पर हर कोई अपने ईयरफोन में व्यस्त रहता है और आपसी बातचीत काफी कम हो गई है। उन्होंने स्वीकार किया कि सिनेमा निर्माण की शैली और कहानियों को बयां करने का तरीका अब पूरी तरह बदल चुका है।























