उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में एक बेहद दुखद और हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां वाजिदपुर इलाके में रहने वाले एक ही परिवार के तीन सगे भाइयों ने महज छह महीने के अंतराल में अपनी जान गंवा दी। इन लगातार हुई मौतों के बाद से न केवल पीड़ित परिवार गहरे सदमे में है, बल्कि पूरे मोहल्ले में भी डर और सन्नाटे का माहौल छा गया है। आसपास रहने वाले लोगों के मन में इन घटनाओं को लेकर कई तरह की आशंकाएं और सवाल पैदा हो रहे हैं। परिवार के इन तीनों युवाओं की आत्महत्या के पीछे की ठोस वजह अभी तक सामने नहीं आ सकी है।
सपनों में बुलाने की बातें और बढ़ता डर
इस परिवार में मौतों के इस सिलसिले के दौरान कई अजीबोगरीब बातें सामने आई हैं। स्थानीय लोगों और परिजनों के अनुसार, इनमें से कुछ भाइयों ने मरने से पहले यह जिक्र किया था कि उनके मृत भाई उन्हें सपनों में अपने पास बुला रहे हैं। सबसे बड़े भाई विकास निषाद की मौत 10 जुलाई को हुई थी, जिसने घर की दूसरी मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली थी। बताया जाता है कि विकास अपनी बहन और पड़ोसियों से अक्सर यह कहता था कि उसके दोनों भाई उसे बुला रहे हैं और वह उनके पास चला जाएगा। उसने यह भी कहा था कि चाहे उसका कितना भी इलाज करा लिया जाए, वह नहीं बचेगा।
एक के बाद एक तीन भाइयों की दर्दनाक मौत
परिवार पर मुसीबतों का यह पहाड़ अचानक नहीं टूटा, बल्कि छह महीने के भीतर एक-एक कर तीनों भाइयों की जान चली गई। विकास से पहले उसके दो छोटे भाइयों की भी मौत हो चुकी थी। परिवार के सबसे छोटे बेटे गोविंद ने फांसी लगाकर अपनी जान दी थी, जबकि उससे बड़े भाई अमन ने पहली मंजिल से छलांग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। गोविंद की मौत के बाद अमन ने भी घरवालों से यही कहा था कि गोविंद उसे अपने पास बुला रहा है। इन दोनों वारदातों के बाद जब सबसे बड़े भाई विकास की भी इसी तरह की परिस्थिति में मौत हुई, तो पूरा परिवार अंदर से पूरी तरह टूट गया।
झाड़-फूंक और इलाज की कोशिशें रहीं बेअसर
परिजनों ने तीनों भाइयों के इस अजीब व्यवहार और मानसिक स्थिति को सुधारने के लिए अपनी तरफ से हरसंभव प्रयास किए थे। पड़ोसियों का कहना है कि भाइयों की ऐसी बातें सुनने के बाद परिवार ने उनका डॉक्टरों से इलाज भी कराया और घरेलू स्तर पर झाड़-फूंक का सहारा भी लिया गया। घरवालों को पूरी उम्मीद थी कि समय के साथ हालात सुधर जाएंगे और उनके बच्चे सामान्य जीवन जीने लगेंगे, लेकिन सारी कोशिशें धरी की धरी रह गईं और छह महीने के भीतर तीनों भाइयों की मौत ने सबको झकझोर कर रख दिया।
वाजिदपुर इलाके में सहमे हुए लोग और बदलते हालात
इन लगातार तीन मौतों ने वाजिदपुर के स्थानीय निवासियों के दैनिक जीवन को पूरी तरह बदल दिया है। इस भयानक हादसे के बाद से लोगों में एक अज्ञात भय बैठ गया है। पड़ोसियों का कहना है कि पहले लोग देर शाम तक अपने घरों के बाहर गलियों में बैठकर बातचीत किया करते थे, लेकिन अब स्थिति बिल्कुल अलग है। लोग शाम सात बजते ही अपने घरों के दरवाजे अंदर से बंद कर लेते हैं। यदि कोई रात के समय दरवाजे की कुंडी भी खटखटा देता है, तो अंदर बैठे लोगों के मन में डर समा जाता है। दिन के उजाले में ही लोग राम शंकर के घर के बाहर एकत्र होकर इस दुखद घटना के बारे में चर्चा करते नजर आते हैं।
























