मनोरंजन उद्योग से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां प्रसिद्ध तमिल संगीतकार देवा अब इस दुनिया में नहीं रहे। स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं से जूझने के बाद उन्होंने 75 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनके इस तरह अचानक दुनिया से चले जाने से उनके चाहने वाले और पूरी फिल्म बिरादरी गहरे सदमे में है, क्योंकि उन्होंने अपने अद्भुत संगीत के सफर से अनगिनत लोगों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी थी।
संगीत की दुनिया में उनके जाने से एक ऐसा खालीपन आ गया है जिसे भरना असंभव है। इस दुखद समाचार के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया पर शोक संवेदनाओं का तांता लग गया है और हर कोई उन्हें अपनी नम आंखों से याद कर रहा है।
अस्पताल में ली अंतिम सांस
प्राप्त जानकारी के अनुसार, देवा का स्वास्थ्य अचानक काफी ज्यादा खराब हो गया था। उन्हें शनिवार, 17 अक्टूबर को सुबह लगभग 8:30 बजे चेन्नई के एक प्राइवेट अस्पताल में ले जाया गया था। चिकित्सा सूत्रों ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल पहुंचाया गया था तब उनकी नब्ज काम नहीं कर रही थी। डॉक्टरों की पूरी टीम ने उन्हें बचाने की तमाम कोशिशें कीं लेकिन वे असफल रहे। उनके निधन के बाद से प्रशंसक सोशल मीडिया पर लगातार अपनी शोक भावनाएं व्यक्त कर रहे हैं।
गाना संगीत को दिलाई मुख्यधारा में पहचान
उनका मूल नाम देवानेसन चोक्लिंगम था। फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने से पहले वह तमिलनाडु सरकार के लोक निर्माण विभाग यानी पीडब्ल्यूडी में कार्यरत थे। उन्होंने अपने संगीतकार सफर की शुरुआत वर्ष 1986 में रिलीज हुई फिल्म माट्टुकारा मन्नारू से की थी। भले ही वह फिल्म टिकट खिड़की पर सफल नहीं हो पाई लेकिन उसके गीत बाद में अत्यधिक प्रसिद्ध हुए। उन्हें मुख्य सफलता वर्ष 1990 में आई फिल्म वैकासी पोरंथचू के जरिए मिली। इस मूवी के लिए उन्हें अपना पहला तमिलनाडु स्टेट फिल्म अवॉर्ड भी प्रदान किया गया था।
रजनीकांत की फिल्मों के जरिए मिली बड़ी सफलता
देवा ने अपने पूरे करियर के दौरान कई ब्लॉकबस्टर गाने और शानदार बैकग्राउंड स्कोर रचे। उन्होंने चेन्नई के पारंपरिक गाना संगीत को मुख्यधारा के तमिल सिनेमा का अभिन्न हिस्सा बना दिया था। उन्हें प्यार से थेनिसई थेन्द्रल देवा कहकर भी पुकारा जाता था। सुपरस्टार रजनीकांत की लोकप्रिय फिल्मों जैसे अन्नामलाई, अरुणाचलम और बादशाह के गानों तथा संगीत ने बॉक्स ऑफिस पर नए आयाम स्थापित किए थे। फिल्म अन्नामलाई का संगीत आज भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय है। उनके संगीत में स्थानीय मिट्टी की महक और शास्त्रीय धुनों का ऐसा अनूठा संगम होता था जो किसी का भी दिल जीत लेता था।

















