भारतीय सिनेमा के प्रतिष्ठित फिल्म निर्देशक, पटकथा लेखक और संगीतकार सिंगीथम श्रीनिवास राव का शनिवार को 94 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। वह बीते काफी समय से अस्वस्थ चल रहे थे और कावेरी हॉस्पिटल में उनका उपचार किया जा रहा था। बढ़ती उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के चलते उन्होंने अस्पताल में अंतिम सांस ली। छह दशकों से अधिक लंबे अपने शानदार कलात्मक सफर में उन्होंने भारतीय सिनेमा को कई कालजयी रचनाएं दीं और अपने पीछे एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत छोड़ गए हैं।
सिनेमा जगत में शोक और जूनियर एनटीआर की श्रद्धांजलि
उनके देहांत का समाचार सामने आने के बाद फिल्म जगत की हस्तियों और कला प्रेमियों के बीच गहरे शोक का माहौल बन गया। अभिनेता जूनियर एनटीआर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके रचनात्मक योगदान को नमन किया। जूनियर एनटीआर ने अपने संदेश में कहा कि सिंगीथम श्रीनिवास राव एक ऐसे दूरदर्शी फिल्मकार थे, जिनका सिनेमा समय से बहुत आगे का था और पीढ़ियां बीत जाने के बाद भी उनकी कहानियां दर्शकों को बिल्कुल नई और प्रासंगिक लगती हैं। उन्होंने 'आदित्य 369', 'पुष्पक विमान' और 'मयूरी' जैसी ऐतिहासिक फिल्मों का उल्लेख करते हुए दिवंगत निर्देशक के परिजनों के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं।
कहानी कहने के पारंपरिक ढर्रे को तोड़ते विविध प्रयोग
सिंगीथम श्रीनिवास राव उन विरले निर्देशकों में शामिल थे जिन्होंने कभी खुद को किसी एक खास शैली या ढर्रे में कैद नहीं रखा। उन्होंने हास्य, विज्ञान कथा (साइंस फिक्शन), फैंटेसी, सामाजिक ड्रामा और प्रयोगात्मक सिनेमा जैसे तमाम जॉनर में अपनी बेजोड़ कल्पनाशीलता का परिचय दिया। भारतीय सिनेमा के कई बड़े फलकों जैसे तेलुगु, तमिल, कन्नड़, मलयालम और हिंदी फिल्मों में उनका योगदान बेहद व्यापक रहा। उन्होंने अपनी रचनात्मकता से हर भाषा के दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई।
मूक सिनेमा का अनूठा जादू: 'पुष्पक विमान'
उनके निर्देशन में बनी ब्लैक कॉमेडी और मूक फिल्म 'पुष्पक विमान' भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक मील का पत्थर मानी जाती है। संवादहीन होने के बावजूद इस फिल्म ने दर्शकों को भावविभोर कर दिया था, जिसमें अभिनेता कमल हासन और अमला अक्किनेनी मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। 'पुष्पक विमान' एक रीमेक परियोजना थी जिसे स्वयं सिंगीथम ने ही रूपांतरित और निर्देशित किया था। रिलीज़ के समय इस फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त स्नेह मिला और वक्त के साथ यह सिनेमाई अध्ययन की एक कल्ट क्लासिक फिल्म बन गई।
शुरुआती सफर से लेकर 60 से अधिक फिल्मों का निर्देशन
सिंगीथम श्रीनिवास राव का फिल्मी सफर स्वतंत्र निर्देशन शुरू करने से काफी पहले ही शुरू हो चुका था। उन्होंने अपने शुरुआती दौर में दिग्गज फिल्ममेकर के. वी. रेड्डी के साथ काम किया और वर्ष 1957 की ऐतिहासिक क्लासिक फिल्म 'मायाबाजार' की निर्माण प्रक्रिया से भी जुड़े रहे। इस समृद्ध अनुभव के बाद जब उन्होंने स्वतंत्र रूप से निर्देशन की कमान संभाली, तो पीछे मुड़कर नहीं देखा। अपने छह दशक लंबे सफर में उन्होंने 60 से ज्यादा फिल्मों का निर्देशन किया।
सुधा चंद्रन की बायोपिक 'मयूरी' और कमल हासन के साथ यादगार काम
वर्ष 1985 में पर्दे पर आई 'मयूरी' उनके सबसे प्रशंसित और चर्चित सिनेमाई कार्यों में शामिल है। यह भावनात्मक फिल्म नृत्यांगना सुधा चंद्रन के जीवन और संघर्षों से प्रेरित एक बायोपिक थी, जिसमें स्वयं सुधा चंद्रन ने मुख्य भूमिका निभाकर अपनी कहानी को जीवंत किया था। फिल्म को दर्शकों के साथ-साथ समीक्षकों से भी भरपूर सराहना मिली और इसने कई प्रतिष्ठित पुरस्कार अपने नाम किए। इसके अलावा उन्होंने कमल हासन के साथ मिलकर कई ऐतिहासिक क्लासिक फिल्में तैयार कीं, जो भारतीय सिनेमा में हमेशा याद की जाएंगी।



















