त्योहारी उल्लास के बीच जब हर कोई खुशियां बांटने में व्यस्त है, दिग्गज अभिनेता अमिताभ बच्चन ने इंटरनेट पर अपनी बातें गलत तरीके से पेश करने की होड़ पर कड़ा रुख अपनाया है। अपने प्रशंसकों से नियमित तौर पर डिजिटल माध्यमों से जुड़े रहने वाले वरिष्ठ कलाकार अक्सर संक्षिप्त और गूढ़ संदेशों के लिए जाने जाते हैं। कई बार उनके दो-तीन शब्दों के छोटे संदेशों को लेकर लोग तरह-तरह की अटकलें लगाने लगते हैं। इस बार उन्होंने स्पष्ट किया है कि सीधी बात को भी सनसनीखेज बनाकर पेश करने की प्रवृत्ति कितनी हास्यास्पद हो चुकी है।
गणेश चतुर्थी की शुभकामनाएं और शब्दों के गलत मायने
गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर गणपति बाप्पा के दर्शन करने पहुंचे अमिताभ बच्चन ने टम्बलर पर नया संदेश साझा कर लोगों को पर्व की बधाई दी। उन्होंने बताया कि उत्सव की रौनक के बीच ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त करना अत्यंत सुखद और विशेष अनुभूति प्रदान करता है। हालांकि शुभकामनाओं के साथ-साथ उन्होंने इस बात पर गहरा क्षोभ भी प्रकट किया कि उनके ब्लॉग में लिखी गई सहज और सरल बातों का भी कई बार बिल्कुल विचित्र अर्थ गढ़ लिया जाता है।
व्यूज की अंधी दौड़ और सनसनी फैलाने की प्रवृत्ति
सार्वजनिक बयानों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश करने के चलन पर बात करते हुए अमिताभ बच्चन ने कहा कि जिस तरीके से बातों को बदल दिया जाता है, वह अब हास्यास्पद लगने लगा है। उन्होंने पैपराजी संस्कृति और सबसे आगे निकलने की होड़ को आड़े हाथों लिया। उन्होंने चिंता जताई कि केवल डिजिटल व्यूज, मुनाफा कमाने और ध्यान खींचने के फेर में तथ्यों की सच्चाई को दरकिनार कर दिया जाता है। ऐसी बेचैनी का ही परिणाम है कि बिना सोचे-समझे किसी भी बात का अनर्गल अर्थ निकाला जाता है।
सच्चाई से दूर होता डिजिटल व्यापार
अभिनेता ने भाषा और समझ के गिरते स्तर पर टिप्पणी करते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है मानो रिपोर्ट करने वालों में मूल व्याकरण और अर्थ ग्रहण करने की भी क्षमता नहीं बची है। उन्होंने रेखांकित किया कि किसी बात को अपनी मर्जी के अनुरूप सिद्ध करने के लिए मनगढ़ंत कहानियां और झूठे संदर्भ जोड़ दिए जाते हैं। उनका मानना है कि यह पूरा तंत्र एक ऐसा व्यावसायिक ढांचा बन गया है, जो उन घटनाओं को भुनाने में जुटा है जिनका वास्तव में कोई अस्तित्व ही नहीं था।
हास्य के जरिए तंज और आगे की प्रतीक्षा
इस पूरे मामले पर चुटीले अंदाज में प्रहार करते हुए उन्होंने कहा कि जिस सामग्री पर पैसा लगाया गया है, वह अपनी लागत वसूलने का कोई न कोई रास्ता निकाल ही लेती है। वर्तमान समय में लाभ कमाना मुख्य प्राथमिकता बन चुका है और वास्तविक सत्य हाशिए पर चला गया है। मुस्कुराते हुए उन्होंने अपनी बात समाप्त की और कहा कि वह यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि उनके इस ताजे संदेश की पंक्तियों को तोड़-मरोड़कर इंटरनेट पर अब क्या नया रूप गढ़ा जाएगा।

















