राजधानी दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र का पर्दाफाश करते हुए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय नार्को-टेरर मॉड्यूल की कमर तोड़ने का दावा किया है। दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की इस कार्रवाई में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान से लेकर विदेशों तक फैले एक खतरनाक नेटवर्क का खुलासा हुआ है, जिसमें प्रतिबंधित पदार्थों की तस्करी के बदले हथियारों का आदान-प्रदान किया जा रहा था। इस पूरे सिंडिकेट का संचालन देश की सीमाओं से पार बैठे हैंडलर्स के इशारे पर हो रहा था।
कूरियर पार्सल से खुला राज
इस बड़े मामले की परतें 7 फरवरी को तब उघड़ीं जब दिल्ली से कनाडा के लिए बुक किए गए एक संदिग्ध कूरियर पार्सल की गहन जांच की गई। इस पार्सल में चालाकी से बिस्किट के डिब्बे, मिठाई के पैकेट और अन्य घरेलू सामान के नीचे करीब 3 किलो अफीम छिपाई गई थी। इस सुराग के आधार पर जब जांच का दायरा बढ़ाया गया, तो पुलिस टीमों ने विभिन्न ठिकानों से कुल 5.138 किलो अफीम बरामद करने में सफलता हासिल की। तस्करों ने ड्रग्स छिपाने के लिए बेहद शातिर तरीके अपनाए थे।
फर्जी दस्तावेजों और ऐप्स का इस्तेमाल
इस नार्को-टेरर नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप में पुलिस ने सिमरनजीत सिंह, हरदीप सिंह, यदविंदर सिंह और जीवन सिंह को गिरफ्तार किया है। आरोपियों के मोबाइल फोन के डेटा और उनसे हुई पूछताछ के आधार पर जांच अधिकारियों को इस गिरोह के तौर-तरीकों की अहम जानकारियां मिली हैं। आरोपी अपनी पहचान छुपाने के लिए फर्जी केवाईसी दस्तावेजों का इस्तेमाल करते थे और अन्य व्यक्तियों के नाम पर कूरियर पार्सल बुक कराते थे।
तस्कर कार्टन के फॉल्स बॉटम यानी दोहरी तली और कई बार कपड़ों के भीतर बड़ी सफाई से अफीम को छिपाकर विदेश भेजते थे। देश-विदेश में बैठे अपने सहयोगियों और आकाओं के संपर्क में रहने के लिए ये लोग कनाडाई नंबरों पर आधारित व्हाट्सएप और सिग्नल जैसे सुरक्षित माने जाने वाले मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। शुरुआती जांच से यह भी साफ हुआ है कि इस अवैध कारोबार से होने वाली भारी-भरकम कमाई का इस्तेमाल देश में आपराधिक गिरोहों के संचालन और आतंकवादी गतिविधियों को वित्तपोषित करने के लिए किया जा रहा था।
ड्रग्स-फॉर-वेपन्स का खतरनाक गठजोड़
पुलिस जांच में सबसे चौंकाने वाला पहलू ड्रग्स और हथियारों के इस खतरनाक गठजोड़ का सामने आना है, जिसे ड्रग्स-फॉर-वेपन्स नेक्सस कहा जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, कनाडा भेजी गई अफीम की बिक्री से मिलने वाले पैसों का इस्तेमाल अवैध हथियारों की खरीद के लिए किया जाता था। ये हथियार ड्रोन के जरिए पाकिस्तान की सीमा पार से सीधे पंजाब के सीमावर्ती इलाकों में गिराए जाते थे।
इस पूरे सिंडिकेट के तार कनाडा में बैठे वांछित और नामित खालिस्तानी आतंकवादी अर्शदीप सिंह उर्फ अर्श डल्ला से जुड़ रहे हैं। रिकॉर्ड के अनुसार, अर्श डल्ला साल 2018 में कनाडा चला गया था और भारत सरकार ने जनवरी 2023 में उसे आधिकारिक तौर पर आतंकवादी घोषित किया था। पुलिस का आकलन है कि कनाडा के बाजार में करीब 3.5 करोड़ रुपये की भारी कीमत पर अफीम खपाकर ये लोग अकूत मुनाफा कमाते थे। इस मुनाफे के जरिए एक तरफ जहां आपराधिक गिरोहों को पाला जा रहा था, वहीं दूसरी तरफ भारत विरोधी और आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए हथियार जुटाए जा रहे थे।
फिलहाल इस मामले में चार प्रमुख आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, लेकिन क्राइम ब्रांच की टीमें विदेशी धरती पर बैठे हैंडलर्स और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य फरार संदिग्धों की सरगर्मी से तलाश कर रही हैं। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे इस बहुआयामी जांच का दायरा और आगे बढ़ेगा, इस नार्को-टेरर सिंडिकेट से जुड़े कई और नए चेहरों और मोर्चों का खुलासा हो सकता है।



















