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वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर के बयान से भड़के मुकेश खन्ना, कहा- क्या आप हिंदू धर्म भूल गईंमनोरंजन
4 सित॰ 2026, 10:35 am (54 दिन पहले)· 2

वंदे मातरम पर शर्मिला टैगोर के बयान से भड़के मुकेश खन्ना, कहा- क्या आप हिंदू धर्म भूल गईं

राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम के शुरुआती दो छंदों को ही गाने की सलाह देने पर अभिनेत्री शर्मिला टैगोर और अभिनेता मुकेश खन्ना के बीच तीखा विवाद खड़ा हो गया है। मुकेश खन्ना ने उनके इस सुझाव पर कड़ी आपत्ति जताते हुए उन पर कई गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

राष्ट्रगीत वंदे मातरम के गायन को लेकर छिड़ा विवाद अब काफी तूल पकड़ चुका है। हाल ही में वरिष्ठ अभिनेत्री शर्मिला टैगोर ने एक बयान देते हुए यह सुझाव दिया था कि देश के भीतर मौजूद धार्मिक विविधता को ध्यान में रखते हुए इस गीत के केवल शुरुआती दो पदों का ही गायन किया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि इस रचना के अगले हिस्सों में विभिन्न देवी-देवताओं का उल्लेख मिलता है, जिससे उन लोगों के लिए पूरा गीत गाना असहज हो सकता है जो केवल एक ईश्वर में आस्था रखते हैं। अभिनेत्री के इस प्रस्ताव के सामने आने के बाद शक्तिमान फेम अभिनेता मुकेश खन्ना ने इस पर कड़ी नाराजगी व्यक्त की है और उन पर तीखा हमला बोला है।

बंगाली संस्कृति और पृष्ठभूमि पर सवाल

मुकेश खन्ना ने एक बातचीत के दौरान शर्मिला टैगोर की पृष्ठभूमि का हवाला देते हुए उनसे तीखे सवाल किए। उन्होंने कहा कि अभिनेत्री का पालन-पोषण पश्चिम बंगाल में हुआ है, जहां काली पूजा जैसे बड़े आयोजनों को बहुत धूमधाम के साथ मनाया जाता है। बंगाली संस्कृति के बीच लंबा वक्त बिताने और कई बंगाली फिल्मों में काम करने के बाद अब अचानक उन्हें ऐसा क्यों महसूस होने लगा है कि दूसरे समुदायों के लोग इस राष्ट्रीय गीत को स्वीकार नहीं कर पाएंगे।

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मुकेश खन्ना की ओर से आयशा बेगम नाम का जिक्र

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर के विवाह का भी उल्लेख किया और उन्हें आयशा बेगम कहकर संबोधित किया। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या विवाह के पश्चात ही उन्हें इस बात का बोध हुआ कि इस्लाम एक अलग धर्म है। जब वह बेगम बनीं, क्या तब उन्हें यह एहसास हुआ कि मुसलमान एक अलग पंथ का पालन करते हैं। उन्होंने आगे कहा कि वह निकाह के समय आयशा बेगम बनी थीं और अब आज के समय में भी वैसी ही बातें कर रही हैं। उन्होंने आश्चर्य जताया कि पूरी जिंदगी सनातन संस्कृति के बीच बिताने के बाद अचानक उन्हें दूसरे धर्म के लोगों की चिंता क्यों सताने लगी है।

निराकार ईश्वर और सनातन परंपराओं पर विचार

धार्मिक मान्यताओं और मान्य परंपराओं पर चर्चा करते हुए मुकेश खन्ना ने स्पष्ट किया कि सनातन संस्कृति में तैंतीस करोड़ देवी-देवताओं का उल्लेख जरूर मिलता है, किंतु इसका मतलब यह नहीं है कि कुल ईश्वरतत्व की संख्या इतनी है। परमात्मा मूल रूप से एक ही है जो निराकार है और जिसका कोई भौतिक स्वरूप नहीं है। एक सच्चा आस्तिक उसी एक परमशक्ति को राम, कृष्ण, शिव या हनुमान के रूप में देखता है। उन्होंने यह भी दावा किया कि वंदे मातरम को लेकर उठने वाली यह आपत्ति उस पुरानी सोच से जुड़ी है जिसके तहत केवल एक विशेष शक्ति के आगे ही सिर झुकाने की बात कही जाती है। उनका तर्क था कि ऐसे लोग केवल अपने इष्ट के सामने ही झुकना पसंद करते हैं और इसी कारण अन्य प्रतीकों के प्रति आपत्ति जताते हैं।

भारत माता के प्रति सम्मान और स्वतंत्रता

देशभक्ति के विषयों पर बात करते हुए मुकेश खन्ना ने कहा कि देश की सीमाओं के भीतर बसने वाले प्रत्येक नागरिक को राष्ट्रीय प्रतीकों का पूर्ण आदर करना चाहिए। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि किसी भी व्यक्ति को शारीरिक रूप से झुकने या राष्ट्रगीत गाने के लिए बाध्य नहीं किया जाना चाहिए। हम सभी भारत माता के सामने नमन करते हैं, लेकिन यदि कोई व्यक्ति अपनी मर्जी से ऐसा नहीं करना चाहता है तो किसी पर दबाव नहीं बनाया जा रहा है। इसके बावजूद पूरे गीत के गायन पर ही रोक लगाने की बात करना उनकी समझ से परे है।

राजनीति और तुष्टीकरण के आरोप

अपनी बात को समाप्त करते हुए अभिनेता ने इस पूरे विवाद को राजनीतिक समीकरणों से जोड़ दिया। उनका आरोप था कि इस प्रकार के बयान किसी सिद्धांत के तहत नहीं दिए जा रहे हैं, बल्कि इनका उद्देश्य एक विशेष वर्ग को यह जताना है कि वह अभी भी उनके साथ खड़े हैं। उन्होंने खुलकर कहा कि इस तरह के बयों के पीछे विशुद्ध रूप से तुष्टीकरण की राजनीति काम कर रही है।

सवाल-जवाब

वंदे मातरम विवाद की शुरुआत किसने की थी?
इस विवाद की शुरुआत अभिनेत्री शर्मिला टैगोर के उस बयान से हुई जिसमें उन्होंने केवल शुरुआती दो स्टैंजा गाने की सलाह दी थी।
मुकेश खन्ना ने शर्मिला टैगोर के बयान पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मुकेश खन्ना ने उनके बयान पर कड़ी आपत्ति जताई और उनकी पृष्ठभूमि तथा विवाह का हवाला देते हुए तीखा हमला बोला।
शर्मिला टैगोर ने वंदे मातरम के पूरे गायन पर क्या आपत्ति जताई थी?
उनका मानना था कि आगे के पदों में हिंदू देवी-देवताओं का जिक्र आने से एक ईश्वर को मानने वालों के लिए इसे गाना मुश्किल हो सकता है।
मुकेश खन्ना ने इस पूरे विवाद के पीछे क्या वजह बताई?
मुकेश खन्ना ने आरोप लगाया कि इस प्रकार के बयान तुष्टीकरण की राजनीति से प्रेरित होते हैं।
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