फिल्म निर्माता विवेक अग्निहोत्री अपने बयानों के चलते एक नए बड़े विवाद के केंद्र में आ गए हैं। हिंदू धार्मिक परंपराओं और तीर्थस्थलों पर जाने वाले श्रद्धालुओं को लेकर की गई उनकी हालिया टिप्पणी पर विश्व हिंदू परिषद ने बेहद तल्ख रुख अपनाया है। संगठन की ओर से उनके इस दृष्टिकोण की सख्त शब्दों में मजम्मत की गई है और उनके रुख को कृतघ्नता करार दिया गया है। परिषद के नेताओं का कहना है कि जिस आस्था और धार्मिक समाज ने इस फिल्म निर्देशक को शोहरत और मुकाम बख्शा, आज वे उसी की नींव पर चोट करने की कोशिश कर रहे हैं।
कैंची धाम के वीडियो से उपजा सारा विवाद
इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत बुधवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर साझा किए गए एक दृश्य से हुई। विवेक अग्निहोत्री ने उत्तराखंड के प्रसिद्ध कैंची धाम में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं की विशाल भीड़ से जुड़ा एक वीडियो रीपोस्ट किया था। इस फुटेज को आगे बढ़ाते हुए फिल्म निर्माता ने तर्क दिया कि यदि हुकूमत धर्म और धार्मिक गतिविधियों पर कर लगा दे, तो भारत पलक झपकते ही पूरी दुनिया का सबसे दौलतमंद मुल्क बन सकता है। आस्था के इस केंद्र पर जुटी भीड़ को वित्तीय चश्मे से देखने की इस कोशिश ने इंटरनेट पर तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दे दिया।
विश्व हिंदू परिषद की तीखी प्रतिक्रिया और गंभीर सवाल
अग्निहोत्री की इस दलील के सामने आने के बाद रविवार को विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर फिल्म निर्माता को आड़े हाथों लिया। बंसल ने स्पष्ट किया कि जिस समाज के संबल और प्यार से किसी को बुलंदी मिलती है, उसी धर्म, उसके विश्वास और प्राचीन रीति-रिवाजों को निशाना बनाना कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अग्निहोत्री लगातार हिंदू समाज की आस्था में खोट तलाशने में जुटे हैं, जो बेहद निराशाजनक है।
प्रवक्ता ने इस बात पर गहरा आश्चर्य जताया कि अग्निहोत्री अब कुंभ मेले, पवित्र तीर्थयात्राओं, देवालयों, संतों और सदियों से चली आ रही भजन-कीर्तन की समृद्ध परंपराओं की नुक्ताचीनी करने की सीमा तक पहुंच गए हैं। बंसल ने सीधे तौर पर यह सवाल दागा कि क्या फिल्म निर्माता खुद को सनातन परंपरा का अनुयायी मानते हैं अथवा वे केवल नाममात्र के लिए हिंदू हैं। उनका आरोप था कि अग्निहोत्री उन करोड़ों श्रद्धालुओं के विश्वास को आहत कर रहे हैं, जिन्होंने उनके काम को स्वीकार किया और उन्हें एक पहचान दी।
सांस्कृतिक पहचान और आत्मसम्मान का दिया संदेश
संगठन के प्रवक्ता ने फिल्म निर्माता को नसीहत दी कि उन्हें भारत की सांस्कृतिक धरोहर, उसकी ज्ञान परंपरा, नैतिक मूल्यों और सदियों पुरानी विरासत पर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि पश्चिमी या अन्य सभ्यताओं से प्रभावित होकर अपने ही पूर्वजों के संस्कारों के प्रति हीन भावना पालने के बजाय, लोगों को अपनी मूल संस्कृति को गहराई से समझना चाहिए और उसके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करनी चाहिए। इस बीच, धार्मिक अनुष्ठानों और तीर्थयात्राओं पर कर लगाने के विचार को लेकर जनमानस में बहस छिड़ी हुई है, जबकि परिषद ने इसे आस्था पर सीधा आघात करार दिया है।



















