फ्रांस के एवियन शहर में जारी G-7 शिखर सम्मेलन की एक झलक इस समय सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रही है। एक वीडियो क्लिप ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की के बीच की दूरी को एक बार फिर सबके सामने ला दिया है। इस फुटेज में ट्रंप मौके पर मौजूद बाकी देशों के नेताओं से एक-एक कर गर्मजोशी से मिलते और हाथ मिलाते दिखते हैं, लेकिन जैसे ही उनकी बारी जेलेंस्की तक पहुंचती है, वे बिना हाथ मिलाए दूसरी दिशा में मुड़ जाते हैं। दोनों नेताओं के बीच कोई बातचीत भी होती नहीं दिखी।
दोनों नेताओं के बीच पुरानी तल्खी
यह सर्द रवैया अचानक सामने आई कोई बात नहीं है। ट्रंप और जेलेंस्की के रिश्ते बीते कुछ समय से काफी तनावपूर्ण बने हुए हैं। इसी साल जब दोनों की मुलाकात अमेरिकी राष्ट्रपति के आधिकारिक निवास व्हाइट हाउस में हुई थी, तब उस बैठक में दोनों के बीच तीखी बहस और टकराव देखने को मिला था। माना जा रहा है कि उसी कड़वाहट की छाया अब इस अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी पड़ती दिख रही है, जहां दोनों नेता एक-दूसरे से दूरी बनाते नजर आए।
मोदी और ट्रंप की 16 महीने बाद हुई मुलाकात
इसी सम्मेलन में एक अलग तस्वीर भी सामने आई। एवियन में G-7 समिट के दौरान भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप आमने-सामने बैठे और दोनों के बीच करीब 5:00 मिनट तक बातचीत हुई। बैठक में दोनों नेता साथ बैठे नजर आए। खास बात यह रही कि यह मुलाकात पूरे 16 महीनों के अंतराल के बाद हुई। इससे पहले दोनों आखिरी बार फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में मिले थे। प्रधानमंत्री मोदी और ट्रंप G7 आउटरीच सेशन में भी एक-साथ बैठे दिखे। इसके अलावा पीएम मोदी की इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी से भी बातचीत हुई।
क्या है यह G-7 शिखर सम्मेलन
यह सम्मेलन फ्रांस के एवियन शहर में 15 से 17 जून तक आयोजित किया जा रहा है। इसमें समूह के सदस्य देशों कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन और अमेरिका के शीर्ष नेता शिरकत कर रहे हैं, साथ ही यूरोपीय संघ के प्रतिनिधि भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं। मेजबान फ्रांस ने इस बार सदस्य देशों के अलावा कई और देशों के नेताओं को भी सम्मेलन में बुलाया है।
भारत की भागीदारी
पार्टनर देश के रूप में इस शिखर सम्मेलन में भारत की यह 13वीं उपस्थिति है। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिहाज से यह 7वां मौका है जब वे इस वैश्विक मंच का हिस्सा बन रहे हैं। भारत की यह लगातार बनी मौजूदगी इस मंच पर देश की बढ़ती कूटनीतिक अहमियत को दर्शाती है।













