राष्ट्रमंडल खेल 2026 में भारतीय एथलीटों का शानदार प्रदर्शन जारी है। पुरुष 60 किग्रा जूडo स्पर्धा में भारत के हर्ष सिंह ने स्वर्णिम सफलता हासिल करते हुए देश की झोली में एक और स्वर्ण पदक डाला है। इससे पहले अस्मिता डे ने भी जूडो में स्वर्ण पदक जीता था, जिसके साथ ही भारत ने राष्ट्रमंडल खेलों के जूडो मुकाबलों में लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर नया इतिहास रच दिया है। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद देशभर में खुशी का माहौल है।
हर्ष सिंह की ऐतिहासिक सफलता और शानदार प्रदर्शन
पुरुषों की 60 किग्रा जूडो श्रेणी में हर्ष सिंह ने शुरुआत से ही अपनी पकड़ बनाए रखी। उन्होंने अपने प्रतिस्पर्धियों को पछाड़ते हुए फाइनल मुकाबले में शानदार जीत दर्ज की। खेल के दौरान उनकी तकनीक, अदम्य आत्मविश्वास और मजबूत रणनीति ने हर किसी को प्रभावित किया। जूडो में भारत को एक ही प्रतियोगिता में दो स्वर्ण पदक मिलना भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। अस्मिता डे और हर्ष सिंह के इस दोहरे प्रदर्शन ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारतीय जूडो खिलाड़ियों के बढ़ते दबदबे को साबित कर दिया है।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने जताया गर्व
इस बड़ी जीत के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर हर्ष सिंह की सराहना की। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रमंडल खेल 2026 में पुरुष 60 किग्रा जूडो में स्वर्ण पदक जीतने पर हर्ष सिंह को बधाई। उनकी इस उपलब्धि पर पूरा देश गर्व महसूस कर रहा है, जो उन्होंने अपने उत्कृष्ट खेल कौशल और दृढ़ संकल्प के बल पर हासिल की है। गृह मंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि जूडो में लगातार दो स्वर्ण पदक जीतकर भारत ने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी दी शुभकामनाएं
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भी हर्ष सिंह और अस्मिता डे दोनों एथलीटों को राष्ट्रमंडल खेल 2026 में जूडो में ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने पर बधाई दी। राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी संदेश में दोनों खिलाड़ियों के समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की गई। देश के शीर्ष नेतृत्व के साथ-साथ विभिन्न खेल संगठनों और दिग्गजों ने भी हर्ष सिंह के इस प्रदर्शन को युवा एथलीटों के लिए प्रेरणादायक बताया।
जनता की प्रतिक्रिया
हर्ष सिंह की इस ऐतिहासिक जीत के बाद सोशल मीडिया पर खेल प्रेमियों और आम नागरिकों की ओर से शुभकामनाओं की बाढ़ आ गई है। लोगों ने भारतीय जूडो टीम के शानदार प्रदर्शन की सराहना करते हुए इसे भारतीय खेलों के स्वर्णिम युग की शुरुआत बताया है।


























