ब्रिटेन की पूर्व गृह मंत्री प्रीति पटेल ने भगोड़े हीरा कारोबारी नीरव मोदी के प्रत्यर्पण मामले को लेकर एक बड़ा खुलासा किया है। पॉडकास्ट 'द डायमंड किंग' में बातचीत के दौरान उन्होंने बताया कि भारत सरकार नीरव मोदी को वापस लाने में हो रही लगातार देरी से बेहद नाराज थी। इस प्रशासनिक और कानूनी सुस्ती के कारण नई दिल्ली ने ब्रिटेन के साथ अवैध प्रवासियों और शरण पाने में असफल रहने वाले नागरिकों को वापस लेने के द्विपक्षीय समझौतों पर सहयोग करने से मना कर दिया था। 55 वर्षीय कारोबारी के प्रत्यर्पण में आ रही रुकावटों पर कड़ा रुख अपनाते हुए पटेल ने स्पष्ट कहा कि नीरव मोदी को ब्रिटेन में रहने का कोई अधिकार नहीं है और उन्हें भारत की जेल में अपनी सजा काटनी चाहिए।
भारत का कूटनीतिक दबाव और प्रवासन समझौते पर रोक
वर्ष 2019 से 2022 के दौरान यूके की गृह मंत्री रहीं प्रीति पटेल ने अपने कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि भारतीय अधिकारियों ने भगोड़ों के मुद्दे पर ब्रिटिश सरकार पर निरंतर कूटनीतिक दबाव बनाए रखा। भारतीय पक्ष का बहुत स्पष्ट रुख था कि जब तक लंदन में शरण लिए बैठे आर्थिक अपराधियों के खिलाफ ठोस और निर्णायक कार्रवाई नहीं होती, तब तक प्रवासन से जुड़े अन्य संवेदनशील मुद्दों पर आगे बढ़ना संभव नहीं होगा। पटेल के अनुसार, ब्रिटेन की अदालती प्रक्रियाओं में बार-बार होने वाले विलंब के कारण भारत की नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही थी। इस रणनीतिक गतिरोध का सीधा असर दोनों देशों के बीच अवैध प्रवासियों की वापसी से जुड़ी संधियों और प्रशासनिक सहयोग पर पड़ा।
ब्रिटिश कानूनी प्रणाली का दुरुपयोग और करदाताओं का अपमान
कंजर्वेटिव पार्टी की वर्तमान शैडो विदेश सचिव प्रीति पटेल ने ब्रिटेन की न्याय व्यवस्था की कमियों की तीखी आलोचना की। उन्होंने कहा कि नीरव मोदी का इतने वर्षों तक ब्रिटेन में बचे रहना वहां की कानूनी प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग है। पटेल ने इस स्थिति को ब्रिटिश जनता के पैसों की बर्बादी करार देते हुए कहा, "यह हमारी प्रणाली का खुला दुरुपयोग है और ब्रिटिश करदाताओं का भी अपमान है।" उन्होंने जोर देकर कहा कि वैधानिक प्रत्यर्पण प्रक्रिया को बिना किसी रुकावट के पूरा किया जाना चाहिए ताकि आरोपी भारत में न्याय का सामना कर सके।
पीएनबी घोटाला और नीरव मोदी पर दर्ज तीन मुख्य मामले
लंदन की पेंटनविले जेल में बंद 55 वर्षीय नीरव मोदी पंजाब नेशनल बैंक से जुड़े लगभग 2 अरब डॉलर के विशाल वित्तीय घोटाले और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों का सामना कर रहा है। भारतीय जांच एजेंसियां तीन अलग-अलग कानूनी मामलों में उसकी कस्टडी हासिल करने का प्रयास कर रही हैं। पहला मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा दर्ज पीएनबी की अरबों डॉलर की धोखाधड़ी का है। दूसरा मामला प्रवर्तन निदेशालय द्वारा वित्तीय हेराफेरी और धन के अवैध हस्तांतरण से जुड़ा है। वहीं तीसरा मामला सीबीआई द्वारा जांच प्रक्रिया के दौरान सबूतों से छेड़छाड़ करने और गवाहों को प्रभावित करने की कोशिशों को लेकर दर्ज किया गया है।
यूके कोर्ट के फैसले और खारिज हुई कानूनी अपीलें
ब्रिटिश अदालतों ने पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद नीरव मोदी को भारत भेजने के पक्ष में फैसला दिया था और अप्रैल 2021 में यूके के गृह मंत्रालय ने प्रत्यर्पण आदेश पर हस्ताक्षर भी कर दिए थे। इसके बावजूद, मानवाधिकारों की दुहाई देने वाली कानूनी याचिकाओं और गुप्त शरण आवेदन के कारण यह मामला वर्षों तक अटका रहा। हाल ही में शरण का दावा खारिज होने के बाद नीरव मोदी ने इंग्लैंड के हाई कोर्ट में प्रत्यर्पण प्रक्रिया को रोकने की एक और कोशिश की थी, जिसे मार्च 2026 में अदालत ने सिरे से खारिज कर दिया। इसके पश्चात फ्रांस स्थित यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट में दायर उसकी अंतिम कानूनी चुनौती भी विफल हो गई, जिसके बाद अब उसके भारत प्रत्यर्पण का रास्ता पूरी तरह साफ माना जा रहा है।



















