फ्रांस की राजनीति में एक बार फिर कॉर्पोरेट फंडिंग और राजनीतिक प्रभाव के गठजोड़ का बड़ा मामला अदालत की चौखट पर पहुंच चुका है। पूर्व फ्रांसीसी मंत्री रशीदा दाती पर कार निर्माता कंपनी रेनो-निसान से भारी भरकम रकम लेकर राजनीतिक प्रभाव का इस्तेमाल करने के संगीन आरोपों में पेरिस की अदालत में कानूनी प्रक्रिया औपचारिक रूप से शुरू हो गई है। जांचकर्ताओं का दावा है कि इस पूरे सौदे को कानूनी परामर्श अनुबंध का रूप देकर असल में पर्दे के पीछे लॉबिंग की गतिविधियों को छिपाने की कोशिश की गई थी। इस मामले में दोषी पाए जाने पर उन्हें भारी जुर्माने और पद से बेदखल होने जैसी कड़ी कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
रेनो-निसान भुगतान और कानूनी अनुबंध का विवाद
जांच के मुख्य केंद्र में 61 वर्षीय रशीदा दाती और कार निर्माता दिग्गज रेनो-निसान के बीच हुए लेन-देन का लेखा-जोखा है। दस्तावेजों के मुताबिक, वर्ष 2009 से 2013 के दौरान उन्हें इस ऑटोमोबाइल समूह द्वारा कुल 900,000 यूरो (770,000 पाउंड) का भुगतान किया गया था। इस भुगतान के समर्थन में वर्ष 2009 में एक अनुबंध तैयार किया गया था। यह अनुबंध ठीक उस दौर में हुआ था जब दाती ने पूर्व राष्ट्रपति निकोलस सरकोजी के मंत्रिमंडल में मंत्री पद छोड़ा था और वह यूरोपीय संसद की सदस्य चुनी गई थीं।
कागजों पर इस अनुबंध को कंपनी के लिए दी जाने वाली कानूनी सेवाओं के पारिश्रमिक के तौर पर दर्ज किया गया था। हालांकि, मामले की जांच कर रहे न्यायिक मजिस्ट्रेटों का स्पष्ट तौर पर कहना है कि यह अनुबंध एक ढाल मात्र था। मजिस्ट्रेटों की दलील के अनुसार, इसका प्राथमिक उद्देश्य यूरोपीय संसद में कार निर्माता समूह के व्यावसायिक हितों के पक्ष में लॉबिंग करने के एवज में दी जाने वाली फीस को गोपनीय रखना और कानूनी रूप देना था। दूसरी तरफ, दाती ने अपने ऊपर लगे इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए खुद को निर्दोष बताया है।
कार्लोस घोसन की भूमिका और राजनीतिक संपर्कों की पड़ताल
अदालत में चल रही इस सुनवाई का दूसरा अहम सिरा रेनो-निसान के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) कार्लोस घोसन से जुड़ा है। जांचकर्ताओं का मानना है कि 72 वर्षीय कार्लोस घोसन ने दाती को खास तौर पर यूरोपीय संसद के भीतर कंपनी के पक्ष में अनुकूल माहौल तैयार करने और लॉबिंग की जिम्मेदारी संभालने के लिए अपने साथ जोड़ा था। इसके अतिरिक्त, मजिस्ट्रेटों का यह भी तर्क है कि दाती का इस्तेमाल निकोलस सरकोजी के साथ कंपनी के शीर्ष प्रबंधन के सीधे संपर्क साधने के लिए एक महत्वपूर्ण माध्यम के रूप में किया जा रहा था, जो वर्ष 2012 तक फ्रांस के राष्ट्राध्यक्ष पद पर आसीन थे।
कार्लोस घोसन पर भी इस मामले में आपराधिक मुकदमा चलाया जा रहा है और उन्होंने भी किसी भी तरह के गलत काम में शामिल होने से इनकार किया है। हालांकि, वह व्यक्तिगत रूप से पेरिस की अदालत में मौजूद नहीं रहेंगे। घोसन वर्ष 2019 से लेबनान में शरण लिए हुए हैं और फ्रांसीसी कानून की नजर में भगोड़े की श्रेणी में आते हैं। उनकी गैरहाजिरी के बावजूद अदालत इस संयुक्त सांठगांठ के कानूनी पहलुओं की सुनवाई आगे बढ़ा रही है।
कड़ी सजा का जोखिम और पेरिस के मेयर पद का चुनाव
रशीदा दाती की कानूनी टीम ने अदालत में इन सभी आरोपों को जोरदार तरीके से चुनौती देने की तैयारी की है। यदि अदालत में अभियोजन पक्ष के आरोप साबित हो जाते हैं, तो फ्रांसीसी कानून के तहत उन्हें अधिकतम 10 साल के कारावास की सजा सुनाई जा सकती है। इसके साथ ही उन पर एक बड़ा वित्तीय जुर्माना लगाया जा सकता है और पांच साल की अवधि के लिए किसी भी सार्वजनिक पद पर आसीन होने से प्रतिबंधित किया जा सकता है।
यदि अयोग्यता का ऐसा कोई फैसला आता है, तो दाती को पेरिस के प्रतिष्ठित 7वें जिले के मेयर पद से अनिवार्य रूप से इस्तीफा देना पड़ेगा। वह वर्ष 2008 से लगातार इस धनी प्रशासनिक क्षेत्र की मेयर के रूप में अपनी सेवा दे रही हैं। दाती का राजनीतिक सफर कई उतार-चढ़ावों से भरा रहा है। वह निकोलस सरकोजी के प्रशासन में न्याय मंत्री रह चुकी हैं और इमैनुएल मैक्रों के शासनकाल में उन्होंने संस्कृति मंत्री का पद संभाला था। वर्ष 2024 में राष्ट्रीय राजनीति में संस्कृति मंत्री के तौर पर वापसी करने के बाद, उन्होंने फरवरी में पेरिस नगर निगम के मुख्य मेयर पद का चुनाव लड़ने के लिए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
मार्च में हुए इस चुनावी मुकाबले में सोशलिस्ट पार्टी के नेता इमैनुएल ग्रेगोइरे ने उन्हें पराजित कर दिया था। उस पूरे चुनाव प्रचार के दौरान उनके विरोधियों ने अदालत में आने वाले इस भ्रष्टाचार के मुकदमे को उनके खिलाफ एक प्रमुख राजनीतिक और नैतिक हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया था।
लॉबिंग नियमों पर बहस और निजी स्वार्थों का टकराव
इस अदालती कार्यवाही में भ्रष्टाचार विरोधी नागरिक अधिकार संगठन भी वादी पक्ष के रूप में औपचारिक रूप से शामिल हुए हैं। इन सामाजिक संगठनों का मुख्य उद्देश्य फ्रांस के शासन तंत्र में राजनीतिक लॉबिंग पर सख्त कानूनी सीमाएं और निगरानी तंत्र लागू करवाना है।
ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल फ्रांस के पैट्रिक लेफास ने इस मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए कहा कि यह पूरा प्रकरण इस बात को स्पष्ट करता है कि सार्वजनिक नीति निर्माण को निजी व्यावसायिक हितों द्वारा नियंत्रित किए जाने का कितना बड़ा जोखिम बना रहता है। इस मुकदमे के जरिए नागरिक समूह यह मांग कर रहे हैं कि सांसदों और पूर्व मंत्रियों के निजी कंपनियों से कारोबारी संबंध रखने के नियमों को बेहद सख्त बनाया जाए, ताकि लोकतांत्रिक संस्थाओं में जनता का भरोसा कायम रखा जा सके।



















