राजस्थान के सड़क नेटवर्क में एक बड़ा विस्तार प्रस्तावित है, जिसके तहत ब्यावर से भरतपुर के बीच 277 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे तैयार किया जा रहा है। इस नए हाई-स्पीड कॉरिडोर के बनने से पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के बीच आवागमन काफी सुगम हो जाएगा। इस पूरे प्रोजेक्ट का सीधा असर राजधानी दिल्ली से राजस्थान के कई प्रमुख जिलों की दूरी और समय पर पड़ेगा, जिससे दिल्ली से अजमेर पहुंचने में महज 4.5 से 5 घंटे और भरतपुर पहुंचने में लगभग 2.5 से 3 घंटे का समय लगेगा।
दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा नया मार्ग
इस ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे नेटवर्क के साथ लिंक होना है। यह नया कॉरिडोर दौसा जिले के लालसोट क्षेत्र के समीप दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जुड़ने जा रहा है। इस इंटरचेंज के तैयार होते ही दिल्ली, गुरुग्राम और सोहना की तरफ से आने वाला ट्रैफिक निर्बाध गति से राजस्थान के आंतरिक हिस्सों में प्रवेश कर सकेगा। वर्तमान में दिल्ली से अजमेर सड़क मार्ग से जाने में करीब 7 से 8 घंटे लगते हैं, जो इस नए मार्ग के चालू होने के बाद घटकर लगभग 4.5 से 5 घंटे रह जाएंगे। वहीं ब्यावर से भरतपुर के बीच का सफर, जिसमें अभी 7 से 8 घंटे का समय लगता है, सिमटकर केवल 3 से 3.5 घंटे का रह जाएगा।
छह जिलों और 210 गांवों से गुजरेगा 4-लेन कॉरिडोर
यह 4-लेन एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे जयपुर जिले के दूदू क्षेत्र में स्थित झाग गांव से प्रारंभ होकर भरतपुर के ऊंचा नगला तक पहुंचेगा। ऊंचा नगला में इसका सीधा जुड़ाव NH-21 से किया जाएगा। अपने 277 किलोमीटर के दायरे में यह मार्ग राज्य के छह प्रमुख जिलों जयपुर, टोंक, दौसा, सवाई माधोपुर, करौली और भरतपुर को आपस में जोड़ेगा। प्रोजेक्ट की रूपरेखा के अनुसार लगभग 210 गांव इस नए अलाइनमेंट के दायरे में आ रहे हैं, जहां भूमि अधिग्रहण और रूट सर्वे से जुड़े कार्य आगे बढ़ाए जा रहे हैं।
120 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार और प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों से इंटरचेंज
इस नए एक्सप्रेसवे को 120 किलोमीटर प्रति घंटे की डिजाइन स्पीड के मानकों पर तैयार किया जा रहा है। तेज रफ्तार के साथ-साथ वाहनों के सुरक्षित प्रवेश और निकास के लिए आधुनिक स्ट्रक्चर्स और इंटरचेंज बनाए जाएंगे। यह एक्सप्रेसवे न केवल क्षेत्रीय शहरों को जोड़ेगा, बल्कि अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे, NH-448 और NH-21 जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय राजमार्गों से भी सीधा संपर्क स्थापित करेगा। इस वैकल्पिक कॉरिडोर के तैयार होने से पारंपरिक रूप से व्यस्त रहने वाले NH-48 और NH-21 पर भारी वाहनों तथा सामान्य यातायात का दबाव काफी हद तक कम होने का अनुमान है।
व्यापार, उद्योग और अंतरराज्यीय परिवहन को मिलेगी गति
इस एक्सेस-कंट्रोल्ड हाईवे के पूरा होने से दिल्ली-NCR और राजस्थान के औद्योगिक केंद्रों के बीच माल ढुलाई की लागत और समय दोनों में बड़ी बचत होगी। अजमेर, ब्यावर, जयपुर और भरतपुर के औद्योगिक क्षेत्रों से राजधानी क्षेत्र तक कच्चे माल और तैयार उत्पादों का परिवहन तेज गति से हो सकेगा। इसके साथ ही, पूर्वी और पश्चिमी राजस्थान के बीच सुगम कनेक्टिविटी स्थापित होने से स्थानीय पर्यटन और वाणिज्यिक गतिविधियों को भी नया संबल मिलेगा।




















