ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने देश और यूरोपीय संघ के बीच दीर्घकालिक संबंधों को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए महत्वपूर्ण संकेत दिए हैं। उनके अनुसार, भविष्य की रणनीति तैयार करते समय उन सभी विकल्पों पर गौर किया जा सकता है जो ब्रिटेन के हित में हों, जिनमें यूरोपीय संघ में दोबारा शामिल होने की संभावना भी एक विकल्प के रूप में शामिल है। प्रधानमंत्री का मानना है कि वर्तमान ब्रेक्जिट व्यवस्था ने देश को फायदे के मुकाबले अधिक नुकसान पहुंचाया है, इसलिए दोनों पक्षों के संबंधों को सुधारने के लिए जो भी व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं, उन पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब लेबर पार्टी के वार्षिक सम्मेलन में अपने संबोधन के दौरान उन्होंने यूरोप के साथ नजदीकी संबंध स्थापित करने का संकल्प दोहराया था। इस दिशा में एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय शिखर सम्मेलन इस वर्ष के अंत में आयोजित होने जा रहा है, जिसे पहले की तारीखों से आगे बढ़ा दिया गया था। सम्मेलन के मंच से दिए गए उनके बयानों और उसके बाद आए विचारों ने ब्रिटेन के राजनीतिक गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी है, जिससे आने वाले आम चुनाव में यूरोपीय संघ का मुद्दा एक बार फिर प्रमुख चुनावी विभाजन रेखा बन सकता है।
वर्तमान ब्रेक्जिट व्यवस्था पर प्रधानमंत्री के सवाल
प्रधानमंत्री बर्नहैम ने अपने बयानों में स्पष्ट किया कि वह यूरोपीय संघ के साथ रिश्तों के मुद्दे को अनसुलझा या अधर में नहीं छोड़ना चाहते। उनका प्राथमिक उद्देश्य यह तय करना है कि आने वाले दशक में ब्रिटेन किस दिशा में आगे बढ़ना चाहता है। एक प्रसारण कार्यक्रम में जब उनसे सीधे तौर पर पूछा गया कि क्या वह चाहते हैं कि ब्रिटेन यूरोपीय संघ में दोबारा शामिल हो जाए, तो उन्होंने किसी एक रास्ते पर बंधने के बजाय सभी विकल्पों की बारीकी से जांच करने की बात कही।
उन्होंने स्वीकार किया कि वह अपने जीवनकाल में ऐसे कदम के पक्षधर रहे हैं, हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि जरूरी नहीं कि यह स्थिति ठीक इसी समय लागू हो। उनके शब्दों में, वर्तमान स्थिति में बने रहना भी निश्चित रूप से एक विकल्प है, यदि देश की जनता यह मानती है कि यही सही जगह है। बर्नहैम ने रेखांकित किया कि सरकार के सामने कई विकल्प मौजूद हैं और नीति निर्माताओं को यह देखना होगा कि कौन सा रास्ता वास्तव में संभव है और प्रत्येक विकल्प के नफे-नुकसान क्या हैं।
अर्थव्यवस्था और प्रवासन पर ब्रेक्जिट का प्रभाव
पार्टी सम्मेलन के अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन की मौजूदा आर्थिक चुनौतियों और प्रवासन नियंत्रण में आई कमियों के लिए ब्रेक्जिट समझौते को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए दो टूक कहा कि दोनों पक्षों के बीच मौजूदा साझेदारी पर्याप्त नहीं है और इससे देश के बुनियादी हितों की पूर्ति नहीं हो रही है। उनके अनुसार, यूरोपीय संघ से अलग होने के बाद सीमाओं और आर्थिक प्राथमिकताओं पर जो नियंत्रण हासिल करने की उम्मीद की गई थी, उसमें व्यापक सुधार की दरकार है।
इस गतिरोध को दूर करने के लिए बर्नहैम ने साल के अंत में पुनर्निर्धारित शिखर सम्मेलन का उपयोग करने की योजना बनाई है। उनका इरादा इस बैठक के माध्यम से दीर्घकालिक रिश्तों के विभिन्न प्रारूपों को सामने रखने का है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वह एक ऐसा विकल्प तलाशना चाहते हैं जिस पर व्यापक सहमति बन सके, ताकि ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सके, हालांकि उन्होंने इस सहमति को मापने की विस्तृत प्रक्रिया पर फिलहाल कोई रूपरेखा साझा नहीं की है।
मैनिफेस्टो से अलगाव और आर्थिक बदलाव का 10-वर्षीय खाका
बर्नहैम की यह ताजा टिप्पणी लेबर पार्टी के वर्ष 2024 के चुनावी घोषणापत्र से एक बड़े रणनीतिक बदलाव की ओर इशारा करती है। वर्ष 2024 के घोषणापत्र में पार्टी ने ब्रेक्जिट को पूरी तरह से लागू करने और इसे सफल बनाने का वादा किया था, साथ ही यूरोपीय संघ के एकल बाजार या सीमा शुल्क संघ में दोबारा शामिल होने की किसी भी संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया था। पिछले सप्ताह भी प्रधानमंत्री ने अगले आम चुनाव में यूरोपीय संघ की सदस्यता को लेकर नया जनादेश मांगने की संभावना से इनकार नहीं किया था।
सत्ता के गलियारों में बदलाव और सर कीर के पद छोड़ने के बाद गर्मियों में प्रस्तावित यूरोपीय संघ शिखर सम्मेलन को टाल दिया गया था। अब यह बैठक वर्ष के अंत में आयोजित की जाएगी। इस बैठक के साथ ही प्रधानमंत्री ने ब्रिटेन की अर्थव्यवस्था को बदलने के लिए एक 10-वर्षीय विस्तृत योजना पेश करने की भी घोषणा की है। इस आर्थिक रूपरेखा में यूरोपीय बाजार के साथ ब्रिटेन के व्यापारिक और रणनीतिक संतुलन को पुनर्गठित करने की दिशा शामिल हो सकती है।
विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी का तीखा पलटवार
प्रधानमंत्री के इस रुख पर विपक्षी कंजर्वेटिव पार्टी ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। कंजर्वेटिव पार्टी के उप नेता एलेक्स बर्गहार्ट ने इस कदम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि लेबर पार्टी अपने गलत आर्थिक फैसलों का दोष एक दशक से भी पहले हुए ऐतिहासिक जनमत संग्रह पर नहीं मढ़ सकती। विपक्षी दल का आरोप है कि सरकार अतीत की पुरानी लड़ाइयों को दोबारा शुरू करके पुराने राजनीतिक घावों को हरा करने की कोशिश कर रही है।
एलेक्स बर्गहार्ट ने आरोप लगाया कि लेबर सरकार यूरोपीय संघ के साथ नए सिरे से संबंधों की बहाली के नाम पर पिछले दरवाजे से देश को दोबारा उस गुट की ओर खींच रही है। विपक्ष का तर्क है कि जनता ने जनमत संग्रह के जरिए अपना स्पष्ट फैसला सुना दिया था और उस जनादेश से पीछे हटने की कोई भी कोशिश लोकतंत्र की भावना के खिलाफ होगी। इस तकरार से साफ है कि आने वाले समय में यूरोपीय संघ के साथ संबंध सुधारने का एजेंडा ब्रिटेन की राजनीति में गहरे मतभेदों को फिर से हवा दे सकता है।



















