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महाराष्ट्र में क्या फिर बदलेगा सियासी रुख? 4 बड़े घटनाक्रमों से शरद पवार गुट और बीजेपी के बीच खिचड़ी पकने की चर्चाराजनीति
13 अग॰ 2026, 9:08 am (1 दिन पहले)· 2

महाराष्ट्र में क्या फिर बदलेगा सियासी रुख? 4 बड़े घटनाक्रमों से शरद पवार गुट और बीजेपी के बीच खिचड़ी पकने की चर्चा

महाराष्ट्र के राजनीतिक हलकों में शरद पवार गुट और बीजेपी के बीच बढ़ती नजदीकी को लेकर सरगर्मियां तेज हैं। दिल्ली में पीएम मोदी के साथ मुलाकातों और नेताओं की साझी आवाजाही के चार मामलों ने नए सियासी समीकरणों की अटकलों को जन्म दे दिया है।

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर नए सियासी समीकरण बनने और बिगड़ने की सुगबुगाहट तेज हो गई है। हाल के दिनों में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) और भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं के बीच दिखी अप्रत्याशित नजदीकी ने राज्य के राजनीतिक गलियारों में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि दोनों ही दलों की ओर से किसी भी नए राजनीतिक समझौते या गठबंधन का कोई आधिकारिक ऐलान नहीं किया गया है, फिर भी चार अलग-अलग मौकों पर हुई मुलाकातों ने इस सवाल को हवा दे दी है कि क्या यह महज शिष्टाचार भेंट है या पर्दे के पीछे कोई बड़ी राजनीतिक पटकथा लिखी जा रही है।

शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सीधी मुलाकात

इस पूरे घटनाक्रम की पहली अहम कड़ी तब जुड़ी जब राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के अध्यक्ष शरद पवार ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से व्यक्तिगत मुलाकात की। इस बैठक में दोनों दिग्गज नेताओं के बीच विभिन्न विषयों पर विस्तार से बातचीत हुई। महाराष्ट्र की सियासत में लंबे समय से एक-दूसरे के विरोधी खेमे में रहे नेताओं के बीच हुई इस बैठक के तुरंत बाद राज्य के राजनीतिक पंडितों ने भावी समीकरणों का आकलन करना शुरू कर दिया था।

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सुप्रिया सुले के नेतृत्व में आठ सांसदों की पीएम मोदी से भेंट

पहला मामला सामने आने के कुछ ही समय बाद सांसद सुप्रिया सुले की अगुवाई में पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला। आठ सांसदों के इस समूह ने प्रधानमंत्री के समक्ष महाराष्ट्र से जुड़े विकास कार्यों और जनहित से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे रखे। हालांकि पार्टी सूत्रों का कहना था कि यह मुलाकात पूरी तरह प्रशासनिक और राज्य के विकास से संबंधित विषयों पर केंद्रित थी, लेकिन राजनीतिक विश्लेषक इसे दोनों पक्षों के बीच संवाद के बढ़ते रास्ते के रूप में देख रहे हैं।

रेवती सुले के दिल्ली रिसेप्शन में पहुंचे दिग्गज नेता

तीसरा घटनाक्रम एक पारिवारिक समारोह से जुड़ा है। सुप्रिया सुले की बेटी रेवती सुले के विवाह का रिसेप्शन दिल्ली में आयोजित किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी स्वयं पहुंचे और वर-वधू को आशीर्वाद दिया। इस कार्यक्रम में विभिन्न राजनीतिक दलों के कई प्रमुख चेहरे एक ही छत के नीचे मौजूद रहे। यद्यपि किसी निजी व पारिवारिक आयोजन में नेताओं की शिरकत को सीधे तौर पर राजनीतिक गठजोड़ से जोड़ना सही नहीं माना जा सकता, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल के कारण इस मौजूदगी को भी खासा सियासी रंग मिला।

विनोद तावड़े और सुप्रिया सुले की एक कार में यात्रा

चर्चाओं को सबसे ज्यादा बल हालिया चौथे घटनाक्रम से मिला, जब दिल्ली में एक वीडियो सामने आया। इस वीडियो में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की नेता सुप्रिया सुले और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े एक ही गाड़ी में सफर करते हुए नजर आए। दोनों वरिष्ठ नेताओं का इस तरह साथ दिखना महाराष्ट्र की राजनीति में भावी संभावनाओं के नए द्वार खोलता नजर आ रहा है और इसी के बाद से अटकलबाज़ियों का दौर अपने चरम पर पहुंच गया है।

शिवसेना (शिंदे गुट) की प्रतिक्रिया और एनडीए को फायदे का दावा

इन लगातार बदलते घटनाक्रमों पर सत्ताधारी गठबंधन से भी प्रतिक्रियाएं आने लगी हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता और महाराष्ट्र सरकार में मंत्री योगेश कदम ने इन मुलाकातों पर अपनी राय व्यक्त की। योगेश कदम का कहना है कि जिस तरह से शरद पवार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के अन्य नेताओं के बीच संवाद और नजदीकी बढ़ रही है, यदि इन सभी बिंदुओं को मिलाकर देखा जाए तो इस बात में कोई अचरज नहीं होना चाहिए कि शरद पवार आने वाले समय में एनडीए के साथ आ जाएं। उन्होंने यह भी जोड़ा कि शरद पवार जैसे लंबे अनुभव वाले नेता और उनके सहयोगियों के एनडीए में शामिल होने से न केवल सत्तारूढ़ गठबंधन मजबूत होगा, बल्कि इससे देश को भी बड़ा राजनीतिक लाभ मिलेगा।

भावी सियासी राह पर बना हुआ है सस्पेंस

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के एनडीए गठबंधन के निकट आने के विकल्पों पर विचार-विमर्श की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद, अब तक दोनों में से किसी भी खेमे की तरफ से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। महाराष्ट्र की जनता और राजनीतिक जानकारों के सामने फिलहाल यही सबसे बड़ा सवाल है कि क्या ये चार घटनाएं केवल एक संयोग और सामान्य शिष्टाचार हैं, या फिर आने वाले दिनों में राज्य को एक बहुत बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिलने वाला है।

सवाल-जवाब

हाल के दिनों में शरद पवार गुट और बीजेपी नेताओं के बीच कौन सी 4 प्रमुख बैठकें हुई हैं?
शरद पवार और पीएम मोदी की मुलाकात, सुप्रिया सुले के नेतृत्व में 8 एनसीपी (एसपी) सांसदों की पीएम मोदी से भेंट, रेवती सुले के वेडिंग रिसेप्शन में पीएम मोदी की उपस्थिति और सुप्रिया सुले व विनोद तावड़े का एक ही कार में सफर करना प्रमुख घटनाएं हैं।
क्या शरद पवार गुट या बीजेपी ने किसी नए गठबंधन का आधिकारिक ऐलान किया है?
नहीं, दोनों में से किसी भी दल ने नए गठबंधन या राजनीतिक समझौते को लेकर कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।
शिवसेना (शिंदे गुट) के मंत्री योगेश कदम ने इन मुलाकातों पर क्या कहा?
योगेश कदम ने कहा कि यदि शरद पवार जैसे अनुभवी नेता और उनकी पार्टी एनडीए के साथ आती है, तो इससे एनडीए और देश दोनों को फायदा होगा।
सुप्रिया सुले और विनोद तावड़े का कौन सा वीडियो सामने आया है?
दिल्ली से एक वीडियो सामने आया है जिसमें सुप्रिया सुले और बीजेपी के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े एक ही कार में यात्रा करते नजर आ रहे हैं।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

महाराष्ट्र के राजनीतिक घटनाक्रम केवल क्षेत्रीय सत्ता समीकरणों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह भारतीय वित्तीय और कॉरपोरेट हब में नीतिगत स्थिरता के संकेत भी देते हैं। कॉर्पोरेट जगत और निवेशक हमेशा इस बात पर बारीक नजर रखते हैं कि राजनीतिक दल विकास कार्यों और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर क्या रुख अपनाते हैं। यदि राष्ट्रीय राजधानी स्तर पर यह संवाद आगे बढ़ता है, तो इसका सीधा असर राज्य की औद्योगिक नीतियों, निवेश के माहौल और वित्तीय प्राथमिकताओं पर पड़ना तय है, जो आर्थिक दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

Ravikash Gupta@ravikash·1 दिन पहले

महाराष्ट्र के राजनीतिक परिदृश्य में यह हलचल केवल क्षेत्रीय समीकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक असर कॉर्पोरेट निवेश, बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और वित्तीय नीतियों पर भी पड़ सकता है। जब सत्ता के गलियारों में इस तरह के अप्रत्याशित गठजोड़ की चर्चाएं बढ़ती हैं, तो निवेशकों की निगाहें राज्य की आर्थिक स्थिरता और नीतिगत निरंतरता पर टिक जाती हैं। यदि ये राजनीतिक अटकलें किसी ठोस बदलाव में तब्दील होती हैं, तो आने वाले समय में राज्य के औद्योगिक और वित्तीय निर्णयों की गति तेज हो सकती है, जिससे बाजार में नए आर्थिक रुझान देखने को मिल सकते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

रविकेश जी ने आर्थिक और नीतिगत निरंतरता की जो बात उठाई है, उसे उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ संवाददाता के रूप में मैं राष्ट्रीय राजधानी और राज्यों के बीच बदलते शक्ति-संतुलन के चश्मे से देखता हूँ। जब महाराष्ट्र जैसे प्रमुख औद्योगिक राज्य में इस तरह की राजनीतिक सुगबुगाहट तेज होती है, तो उसका सीधा असर केंद्र और राज्य के बीच लंबित बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और वित्तीय समन्वय पर पड़ता है। नीतिगत अनिश्चितता का यह माहौल यदि लंबे समय तक खिंचता है, तो इससे बड़े नीतिगत फैसलों की गति सुस्त हो सकती है, जिसका दूरगामी प्रभाव राष्ट्रीय स्तर के निवेश प्रवाह और भावी चुनावी रणनीतियों पर भी पड़ना तय है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·1 दिन पहले

महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों में इन चार बड़े घटनाक्रमों से उपजी सुगबुगाहट केवल शिष्टाचार तक सीमित नहीं दिखती, बल्कि यह राज्य की बदलती राजनीतिक दिशा की ओर संकेत करती है। हालांकि कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन दिल्ली में पीएम मोदी से शरद पवार और सुप्रिया सुले की मुलाकातें तथा विनोद तावड़े के साथ एक ही कार में यात्रा जैसे दृश्य आने वाले दिनों में नए सियासी समीकरणों के गठन की संभावनाओं को बल देते हैं।

Rohan Verma@rohan-verma·1 दिन पहले

महाराष्ट्र की इस राजनीतिक सरगर्मी को ज़मीनी हक़ीक़त के चश्मे से देखना होगा। जब राष्ट्रीय राजधानी में शीर्ष स्तर पर मुलाकातों का सिलसिला बढ़ता है और विरोधी खेमे के नेता एक साथ यात्रा करते हैं, तो यह केवल व्यक्तिगत शिष्टाचार नहीं रह जाता। महाविकास अघाड़ी के भीतर भी इन संकेतों को लेकर असहजता बढ़ सकती है, जिसका असर आने वाले क्षेत्रीय चुनावों और सीट-बंटवारे के समीकरणों पर पड़ना लाजिमी है।

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