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छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों का बिजली बकाया 3035 करोड़ रुपए के पार, कंपनी ने काटे कनेक्शनछत्तीसगढ़
7 सित॰ 2026, 6:14 pm (1 घंटे पहले)· 2

छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों का बिजली बकाया 3035 करोड़ रुपए के पार, कंपनी ने काटे कनेक्शन

छत्तीसगढ़ में सरकारी विभागों पर जून 2026 तक 3035 करोड़ 37 लाख रुपए बिजली बिल बकाया है, जिसके बाद बिजली वितरण कंपनी ने नगरीय निकायों और अन्य दफ्तरों के कनेक्शन काटना शुरू कर दिया है।

छत्तीसगढ़ के सरकारी दफ्तरों पर बिजली बिल का बकाया अब तीन हजार करोड़ रुपए की सीमा पार कर चुका है और राज्य की बिजली वितरण कंपनी ने इसे वसूलने के लिए सख्ती दिखानी शुरू कर दी है। कई सरकारी कार्यालयों की बिजली सप्लाई काटी जा रही है, जिससे विभागों में हलचल मच गई है।

बकाया की असली तस्वीर

जून 2026 तक के आंकड़ों में राज्य के सरकारी विभागों पर बिजली बिल के रूप में कुल 3035 करोड़ 37 लाख रुपए बकाया दिखाया गया है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा नगरीय प्रशासन विभाग का है, जिस पर अकेले 1525.18 करोड़ रुपए बकाया है। इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग का नंबर आता है, जिस पर 1057.56 करोड़ रुपए चुकाने बाकी हैं। राज्यभर में कुल 1 लाख 57 हजार 341 सरकारी बिजली कनेक्शन हैं, और इनमें से एक बड़ी संख्या लंबे समय से बिल जमा नहीं कर रही थी।

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प्रीपेड व्यवस्था लागू होते ही बढ़ी सख्ती

राज्य सरकार ने बीते 1 अगस्त से ब्लॉक स्तर और उससे बड़े सभी सरकारी कार्यालयों में बिजली की प्रीपेड व्यवस्था अनिवार्य कर दी है, यानी अब पहले भुगतान करने पर ही बिजली मिलेगी। इस नई व्यवस्था के साथ ही बिजली वितरण कंपनी ने पुराने बकाए की वसूली का अभियान भी तेज कर दिया है, ताकि विभागों पर जमा हुई पुरानी देनदारी भी निकल सके।

स्ट्रीट लाइट और पानी टंकियों तक असर

वसूली अभियान के तहत नगर निकायों से जुड़ी पानी की टंकियों, स्ट्रीट लाइट और अन्य सार्वजनिक सेवाओं की बिजली आपूर्ति काटी जाने लगी है। बिलासपुर नगर निगम में इस तरह के कुछ कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके हैं। इसके अलावा हाउसिंग बोर्ड पर भी बकाया चुकाने का दबाव बनाया जा रहा है, ताकि आगे कनेक्शन कटने की नौबत न आए।

कांग्रेस का वार, मंत्री ने दी सफाई

इस मामले पर कांग्रेस ने राज्य सरकार को घेरते हुए कहा है कि इस कार्रवाई की असली मार आम जनता पर पड़ेगी, क्योंकि स्ट्रीट लाइट और पानी सप्लाई जैसी सुविधाएं बाधित हो सकती हैं। मंत्री राम विचार नेताम ने इस विवाद पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि सरकार इस मुद्दे पर पहले भी अपना रुख साफ कर चुकी है और विभाग को भी स्थिति की जानकारी है। उन्होंने कहा

"अगर स्ट्रीट लाइट, पानी सप्लाई और दूसरी सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी कीमत आखिर आम जनता को ही चुकानी पड़ेगी."

अब यह देखना बाकी है कि विभाग तय समय में बकाया चुका पाते हैं, या बिजली कंपनी की सख्ती आने वाले दिनों में और बढ़ती है।

सवाल-जवाब

छत्तीसगढ़ के सरकारी विभागों पर कुल कितना बिजली बिल बकाया है?
जून 2026 तक सरकारी विभागों पर 3035 करोड़ 37 लाख रुपए का बिजली बिल बकाया है।
सबसे ज्यादा बकाया किस विभाग पर है?
सबसे ज्यादा बकाया नगरीय प्रशासन विभाग पर है, जिस पर 1525.18 करोड़ रुपए बकाया है, इसके बाद पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग पर 1057.56 करोड़ रुपए बकाया है।
प्रीपेड बिजली व्यवस्था कब से लागू हुई?
यह व्यवस्था 1 अगस्त 2026 से ब्लॉक स्तर और उससे ऊपर के सभी सरकारी कार्यालयों में लागू की गई है।
बिजली कंपनी अभी क्या कार्रवाई कर रही है?
कंपनी नगर निकायों की स्ट्रीट लाइट, पानी टंकियों और अन्य सार्वजनिक सेवाओं के कनेक्शन काट रही है, बिलासपुर नगर निगम में ऐसे कुछ कनेक्शन पहले ही काटे जा चुके हैं।
राज्य में कुल कितने सरकारी बिजली कनेक्शन हैं?
राज्यभर में कुल 1 लाख 57 हजार 341 सरकारी बिजली कनेक्शन हैं।
इस कार्रवाई पर कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस ने कहा कि इस कार्रवाई का असर आम जनता पर पड़ेगा क्योंकि स्ट्रीट लाइट और पानी सप्लाई जैसी सुविधाएं प्रभावित हो सकती हैं।
मंत्री राम विचार नेताम ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
उन्होंने कहा कि अगर स्ट्रीट लाइट, पानी सप्लाई और दूसरी सार्वजनिक सुविधाएं प्रभावित होती हैं, तो इसकी कीमत आखिर आम जनता को ही चुकानी पड़ेगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·38 मिनट पहले

सरकारी महकमों द्वारा तीन हजार करोड़ से अधिक का बिजली बिल न चुकाना प्रशासनिक लापरवाही और वित्तीय अनुशासनहीनता का गंभीर मामला है। बिजली कंपनी द्वारा प्रीपेड व्यवस्था लागू करने और कनेक्शन काटने की यह सख्ती प्रशासनिक सुधार की दिशा में एक जरूरी कदम है, लेकिन इससे जनता से जुड़ी जलापूर्ति और मार्ग प्रकाश जैसी बुनियादी सेवाएं ठप होने का जो संकट खड़ा हुआ है, वह लोक सुरक्षा और व्यवस्था के लिहाज से एक चिंताजनक स्थिति है। यदि समय रहते बजट आवंटन और आंतरिक समन्वय से इसका समाधान नहीं निकाला गया, तो यह प्रशासनिक गतिरोध कानून-व्यवस्था और जनहित के लिए एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

Rohan Verma@rohan-verma·38 मिनट पहले

यह वित्तीय संकट इस बात का प्रमाण है कि क्षेत्रीय स्तर पर विभागों के बीच बजट प्रबंधन और आंतरिक समन्वय का घोर अभाव है। जब तक नगरीय निकायों और ग्रामीण विकास महकमों की वित्तीय प्राथमिकताओं में बिजली भुगतान को शीर्ष पर नहीं रखा जाएगा, तब तक ऐसी दंडात्मक कार्रवाइयों से केवल आम जनता की बुनियादी सेवाएं ही बाधित होंगी। आने वाले दिनों में यदि राज्य सरकार ने तुरंत हस्तक्षेप कर कोई ठोस अंतर-विभागीय समाधान नहीं निकाला, तो जलापूर्ति और मार्ग प्रकाश जैसी सेवाएं ठप होने से जनता का आक्रोश बढ़ना तय है, जो शासन प्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान लगाएगा।

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