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पश्चिम बंगाल दिवालिया होने की कगार पर, पूर्ववर्ती प्रशासन के कुप्रबंधन पर बरसे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारीपश्चिम बंगाल
7 सित॰ 2026, 6:15 pm (58 मिनट पहले)· 2

पश्चिम बंगाल दिवालिया होने की कगार पर, पूर्ववर्ती प्रशासन के कुप्रबंधन पर बरसे मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी

पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने आरोप लगाया है कि पिछली सरकारों के वित्तीय कुप्रबंधन की वजह से राज्य की आर्थिक स्थिति बेहद खराब हो चुकी है और इसे उबरने में लगभग एक साल का समय लगेगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य में बाल विवाह के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

पश्चिम बंगाल की आर्थिक बदहाली को लेकर राज्य के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने सोमवार को बड़ा बयान दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकारों के खराब वित्तीय प्रबंधन के कारण पश्चिम बंगाल व्यावहारिक रूप से दिवालिया स्थिति में पहुंच चुका है। राज्य सचिवालय 'नबान्न' में पत्रकारों से बातचीत के दौरान उन्होंने यह बात कही। उन्होंने कहा कि इस गंभीर वित्तीय संकट से पूरी तरह उबरने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने में अभी कम से कम एक साल का वक्त लगेगा।

केंद्रीय योजनाओं से जुड़ा राज्य

वृद्धावस्था पेंशन की बढ़ी हुई राशि लाभार्थियों को वितरित करने के बाद मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि अब राज्य में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बनने के बाद बंगाल को तमाम केंद्रीय योजनाओं का पूरा फायदा मिलना शुरू हो गया है। उन्होंने भरोसा जताया कि केंद्र से मिलने वाला धन लगातार आ रहा है और आगे भी सुचारू रूप से आता रहेगा। इस दौरान वृद्धावस्था पेंशन की राशि को प्रति लाभार्थी 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति माह कर दिया गया है।

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राजस्व का नुकसान और वित्तीय अनुशासन

पूर्ववर्ती प्रशासनों पर हमला बोलते हुए शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि पहले बड़े पैमाने पर राजस्व का नुकसान हुआ, चोरी हुई और केंद्रीय योजनाओं से दूरी बनाए रखी गई, जिसके चलते सूबे की तिजोरी खाली हो गई। हालांकि, मौजूदा सरकार के वित्तीय अनुशासन की तारीफ करते हुए उन्होंने दावा किया कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष के दौरान राजकोष को लगभग 18 प्रतिशत अधिक राजस्व की प्राप्ति होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि यदि राजस्व की लीकेज और चोरी पर पूरी तरह लगाम कस ली जाए, तो राज्य की आमदनी में और भी अधिक बढ़ोतरी दर्ज की जाएगी।

बाल विवाह के खिलाफ कड़ा रुख

आर्थिक स्थिति के अलावा मुख्यमंत्री ने राज्य में बाल विवाह के बढ़ते मामलों पर भी गहरी चिंता जताई और प्रशासन को सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पिछली तृणमूल कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान पश्चिम बंगाल बाल विवाह के मामलों में शीर्ष पर पहुंच गया था। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य में लगभग 60 हजार किशोरियों के गर्भवती होने के मामले सामने आए हैं, जो कि एक डरावना आंकड़ा है। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि राज्य में इतनी अधिक संख्या में अपराधियों को रखने के लिए जेलें भी कम पड़ जाएंगी।

मुर्शिदाबाद बना सबसे बड़ा केंद्र

बाल विवाह के मामलों पर बोलते हुए शुभेंदु अधिकारी ने विशेष रूप से मुर्शिदाबाद जिले का जिक्र किया और कहा कि यह क्षेत्र बाल विवाह के मामलों में सबसे आगे है। पिछले 6 महीनों के भीतर ही यहां 12 हजार बाल विवाह होने की बात सामने आई है। सरकार ने तय किया है कि ऐसे मामलों में शामिल आरोपियों और शादियां करवाने वाले बिचौलियों को तुरंत गिरफ्तार किया जाएगा। इसके अलावा, बाल विवाह के आरोपी पतियों को कानूनी नोटिस थमाए जाएंगे। ऐसे लोगों को सरकार की तरफ से मिलने वाले किसी भी प्रकार के सामाजिक लाभ और भत्ते नहीं दिए जाएंगे।

सवाल-जवाब

पश्चिम बंगाल की वित्तीय स्थिति को लेकर मुख्यमंत्री ने क्या दावा किया है?
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा है कि पूर्ववर्ती सरकारों के कुप्रबंधन के कारण राज्य व्यावहारिक रूप से दिवालिया हो गया है और इससे उबरने में कम से कम एक साल लगेगा।
वृद्धावस्था पेंशन की राशि कितनी बढ़ा दी गई है?
वृद्धावस्था पेंशन की राशि 1,000 रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 1,500 रुपये प्रति माह कर दी गई है।
बाल विवाह के मामले में कौन सा जिला सबसे ऊपर है?
मुर्शिदाबाद जिला बाल विवाह के मामलों में सबसे ऊपर है, जहां पिछले 6 महीनों में 12 हजार बाल विवाह हुए हैं।
बाल विवाह करने वालों के खिलाफ क्या कार्रवाई की जाएगी?
बाल विवाह के आरोपियों और शादी कराने वालों को गिरफ्तार किया जाएगा, पतियों को नोटिस दिए जाएंगे और उन्हें सरकारी सामाजिक लाभ तथा भत्ते नहीं मिलेंगे।
चालू वित्त वर्ष में राजस्व को लेकर क्या उम्मीद जताई गई है?
सरकार का दावा है कि पिछले वित्त वर्ष की तुलना में चालू वित्त वर्ष में लगभग 18 प्रतिशत अधिक राजस्व प्राप्त होगा।
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टिप्पणियाँ 2

Karan Malhotra@karan-malhotra·39 मिनट पहले

मुख्यमंत्री द्वारा वित्तीय कुप्रबंधन के आरोपों के साथ-साथ बाल विवाह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई और मुर्शिदाबाद जिले में 6 महीने में 12 हजार मामलों का जिक्र करना गंभीर आपराधिक और प्रशासनिक चुनौती है। साठ हजार किशोरियों के गर्भवती होने के आंकड़े पर पुलिस और बाल कल्याण तंत्र को पोक्सो अधिनियम के तहत त्वरित जाँच और ताबड़तोड़ गिरफ्तारियाँ करनी होंगी, जिससे न्याय व्यवस्था की सख्ती साफ दिखे।

Rohan Verma@rohan-verma·38 मिनट पहले

वित्तीय संकट से उबरने की इस प्रशासनिक चुनौती के बीच, मुर्शिदाबाद जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बाल विवाह और किशोरियों की गर्भावस्था के आंकड़े राज्य की कानून-व्यवस्था और सामाजिक ताने-बाने पर बड़ा सवाल खड़े करते हैं। इन मामलों में त्वरित गिरफ्तारियों और सरकारी लाभ रोकने जैसे कड़े कदमों का असर यह होगा कि प्रशासन को अब जमीनी स्तर पर महिला सुरक्षा और बाल अधिकारों के मोर्चे पर अपनी पकड़ और खुफिया तंत्र को अभूतपूर्व रूप से मजबूत करना होगा, अन्यथा अपराधियों पर नकेल कसना मुश्किल हो जाएगा।

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