तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में अनंत चतुर्दशी के पावन अवसर पर बालापुर गणेश पंडाल का 21 किलोग्राम का प्रसिद्ध महाप्रसाद एक बार फिर देश भर में चर्चा का केंद्र बन गया है। केंद्रीय विसर्जन शोभायात्रा के मुख्य हुसैन सागर मार्ग पर रवाना होने से ठीक पहले इस पवित्र लड्डू की सार्वजनिक नीलामी आयोजित की जाती है। इस वर्ष 25 सितंबर 2026 को शुक्रवार के दिन होने वाली इस खुली बोली में हिस्सा लेने के लिए स्थानीय व्यवसायियों, राजनीतिक हस्तियों और श्रद्धालुओं में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। सभी लोग उत्सुकता से यह देखने का इंतजार कर रहे हैं कि क्या इस बार का सर्वोच्च आंकड़ा पिछले साल बने 35 लाख रुपये के सर्वकालिक रिकॉर्ड को पार कर पाएगा।
35 लाख रुपये का पिछला रिकॉर्ड और इस बार की उम्मीदें
बीते वर्ष 2025 में करमनघाट के निवासी लिंगाला दशरथ गौड़ ने 35 लाख रुपये की रिकॉर्ड बोली लगाकर इस पवित्र प्रसाद को अपने नाम किया था। चांदी के भव्य थाल में रखे जाने वाले इस 21 किलो के लड्डू की हर साल होने वाली नीलामी में भाग लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं। शुक्रवार सुबह जैसे ही नीलामी प्रक्रिया संपन्न होगी, उसके तुरंत बाद हुसैन सागर झील की ओर जाने वाली शहर की विशालकाय गणेश विसर्जन यात्रा औपचारिक रूप से आगे बढ़ेगी। यही कारण है कि सुबह-सवेरे लगने वाली इस बोली के नए आंकड़ों पर पूरे राज्य की निगाहें टिकी रहती हैं।
1994 में 450 रुपये से शुरू हुआ था यह ऐतिहासिक सफर
बालापुर गणेश उत्सव समिति ने सार्वजनिक रूप से इस लड्डू की नीलामी की परंपरा वर्ष 1994 में आरंभ की थी। उस समय गांव के ही एक स्थानीय कृषक कोलनू मोहन रेड्डी ने महज 450 रुपये की बोली देकर इस लड्डू को खरीदा था। जनश्रुति और जन-आस्था के अनुसार, इस प्रसाद को घर लाने के पश्चात उनके परिवार में अपार सुख-समृद्धि आई और उनकी कृषि उपज में कई गुना वृद्धि हुई। इसी अटूट विश्वास के चलते यह आयोजन जन-मानस में आस्था का एक बड़ा केंद्र बन गया। नीलामी जीतने वाले विजेता अक्सर इस प्रसाद के कुछ अंश अपने खेतों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में छिड़कते हैं तथा शेष हिस्सा अपने रिश्तेदारों एवं मित्रगणों में बांटते हैं।
बीते वर्षों में बोलियों का निरंतर बढ़ता ग्राफ
शुरुआती वर्षों में सैकड़ों रुपये से शुरू हुई यह ऐतिहासिक नीलामी धीरे-धीरे लाखों रुपये का आंकड़ा पार करने लगी और हाल के वर्षों में इसने नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
- 2021: रमेश यादव तथा एम. शशांक रेड्डी ने संयुक्त रूप से 18.90 लाख रुपये में खरीदा।
- 2022: वी. लक्ष्मण रेड्डी ने 24.60 लाख रुपये की उच्चतम बोली लगाई।
- 2023: डी. दयानंद रेड्डी ने 27.00 लाख रुपये में इसे हासिल किया।
- 2024: कोलनू शंकर रेड्डी ने 30.01 लाख रुपये का आंकड़ा छुआ।
- 2025: लिंगाला दशरथ गौड़ ने 35.00 लाख रुपये की रिकॉर्ड राशि जमा की।
गाँव के सामाजिक विकास में होता है राशि का उपयोग
बालापुर लड्डू की इस खुली नीलामी से प्राप्त होने वाला शत-प्रतिशत धन गाँव के कल्याण और स्थानीय सुविधाओं को सुधारने में खर्च किया जाता है। समिति इस धनराशि का प्रयोग बालापुर गाँव की सड़कों के निर्माण, पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था, प्राथमिक विद्यालयों के विकास और स्थानीय ऐतिहासिक मंदिरों के जीर्णोद्धार के लिए करती है। धार्मिक आस्था और जन-कल्याण के इस अनोखे मेल के कारण ही हर साल 25 सितंबर की सुबह होने वाली इस नीलामी का हर कोई बेसब्री से इंतजार करता है।



















