गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर देशभर में उत्साह का माहौल देखने को मिलता है, जहां भक्त पूरी श्रद्धा के साथ भगवान गणेश की आराधना करते हैं। इसी कड़ी में पश्चिम उत्तर प्रदेश के मेरठ में भी उत्सव की तैयारियां जोरों पर चल रही हैं। यहां मूर्तिकारों द्वारा भगवान श्री गणेश की बेहद आकर्षक और मनमोहक प्रतिमाएं गढ़ी जा रही हैं। इन कलाकृतियों की मांग केवल स्थानीय स्तर पर ही नहीं, बल्कि आसपास के जिलों के अलावा उत्तराखंड, हरियाणा और दिल्ली तक के खरीदारों के बीच बनी हुई है।
पर्यावरण की सुरक्षा को प्राथमिकता
बदलते समय और प्रकृति की रक्षा को ध्यान में रखते हुए इस बार विशेष रूप से इको-फ्रेंडली प्रतिमाओं का निर्माण किया गया है। मूर्ति बनाने वाले दीपक प्रजापति ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि हर साल गणेश उत्सव के समापन पर भक्त विधि-विधान से पूजा के बाद प्रतिमाओं का विसर्जन करते हैं, जो अक्सर पवित्र गंगा नदी के साथ-साथ घरों पर भी किया जाता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किया गया है जो आसानी से घुल जाए और पर्यावरण को किसी भी तरह का नुकसान न पहुंचाए। मेरठ में इन कलाकृतियों की शुरुआती कीमत १०० रुपए से शुरू होकर ५० हजार रुपए तक जाती है। हालांकि, जो विशाल और भव्य प्रतिमाएं होती हैं, उन्हें विशेष तौर पर एडवांस ऑर्डर पर ही तैयार किया जाता है.
अलग-अलग सवारियों में नजर आ रहे भगवान
इस बार कलाकारों ने मूर्तियों को बेहद अनूठे और रचनात्मक रूपों में ढाला है। पारंपरिक चूहे की सवारी के अलावा भगवान गणेश इस बार मोर, नंदी और शेर जैसी विभिन्न सवारियों पर आसीन दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही भगवान श्री राम और कृष्ण अवतार की थीम पर आधारित मूर्तियां भी तैयार की गई हैं, जिन्हें लोग काफी पसंद कर रहे हैं। यदि आप भी इस गणेश चतुर्थी पर अपने घर में विघ्नहर्ता का स्वागत करना चाहते हैं, तो मेरठ के मेडिकल कॉलेज के पास स्थित बाजार, थापर नगर और जीआईसी कॉलेज के समीप से इन सुंदर प्रतिमाओं को खरीद सकते हैं। इन सभी मूर्तियों को प्रजापति समाज के कारीगरों द्वारा प्रकृति को सहेजने के संकल्प के साथ तैयार किया गया है।



















