केरल सहित देश भर में तिरुवोनम के पावन अवसर पर उत्सव का माहौल बना हुआ है। ओणम पर्व का सबसे महत्वपूर्ण और दसवां दिन, यानी तिरुवोनम, बुधवार 26 अगस्त को मुख्य रूप से मनाया जा रहा है। दस दिनों तक चलने वाले इस पारंपरिक त्योहार के चरम पर पहुंचते ही पूरे क्षेत्र में खुशी और सांस्कृतिक गतिविधियों की लहर दौड़ गई है।
राजा महाबली के आगमन का पौराणिक महत्व
ओणम के पावन पर्व का सबसे प्रमुख आधार राजा महाबली की गाथा है। केरल की परंपराओं के अनुसार, यह त्योहार राजा महाबली के अपनी प्रजा से मिलने के लिए वार्षिक आगमन की खुशी में मनाया जाता है। पौराणिक मान्यताओं में राजा महाबली को एक न्यायप्रिय, उदार और महान शासक के रूप में याद किया जाता है। उनके शासनकाल को शांति, समृद्धि और समानता के स्वर्णिम युग के तौर पर देखा जाता है, और यही कारण है कि लोग इस दिन उनके आगमन की स्मृति में खुशियां मनाते हैं।
अथम से शुरू होकर दस दिनों तक चलने वाला उत्सव
तिरुवोनम का यह दिन लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक आयोजनों का समापन बिंदु है। ओणम के दस दिवसीय कार्यक्रमों का शुभारंभ 16 अगस्त को अथम के साथ हुआ था। अथम के दिन से शुरू हुई सजावट और रीति-रिवाज लगातार दस दिनों तक जारी रहते हैं। दसवें दिन तिरुवोनम के आते ही यह पूरा उत्सव अपने सबसे भव्य रूप में पहुंच जाता है, जिसका लोग वर्ष भर इंतजार करते हैं।
तिरुवोनम नक्षत्र का समय और शुभ मुहूर्त
त्योहार की मुख्य तिथि के निर्धारण में नक्षत्र का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष तिरुवोनम नक्षत्र का प्रारंभ 25 अगस्त को रात 10:51 बजे से हो रहा है। यह नक्षत्र 27 अगस्त को तड़के 12:48 बजे तक प्रभावी रहेगा। इस प्रकार नक्षत्र का यह शुभ समय 26 अगस्त यानी बुधवार के मुख्य उत्सव के दिन के साथ पूरी तरह मेल खाता है, जिससे श्रद्धालु सही मुहूर्त में अपने धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन संपन्न कर सकेंगे।


















