मोगरा की तरह गंधराज का पौधा भी अपनी मनमोहक और तीखी सुगंध के लिए बागवानी प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है। गंधराज, जिसे अंग्रेजी में गार्डेनिया कहा जाता है, के फूलों की भीनी-भीनी खुशबू आसपास के माहौल को तरोताजा कर देती है और मानसिक तनाव को दूर करने में मदद करती है। हालांकि, कई बार यह पौधा पत्तियों के पीले पड़ने, कलियां न बनने या बनी हुई कलियों के असमय गिर जाने जैसी समस्याओं से ग्रसित हो जाता है। गंधराज एक हैवी फीडर पौधा है, जिसे लगातार सही पोषण और देखभाल की जरूरत होती है। सही खाद और देखभाल के सही तरीकों को अपनाकर इस पौधे को फूलों से हरा-भरा बनाया जा सकता है।
सही गमले का चयन और पोषक मिट्टी का निर्माण
गार्डेनिया के पौधे की बेहतर ग्रोथ के लिए सही गमले और उपजाऊ मिट्टी का होना सबसे पहला कदम है। जब भी नर्सरी से नया पौधा लाएं, तो उसे कम से कम 10 से 12 इंच के गमले में ही लगाएं। प्लास्टिक के बजाय मिट्टी का गमला इसके लिए सबसे उपयुक्त माना जाता है। गमले की तली में ड्रेनेज होल यानी जल निकासी का छेद होना बेहद जरूरी है ताकि अतिरिक्त पानी आसानी से बाहर निकल सके।
गार्डेनिया को वेल-ड्रेन यानी हवादार और हल्की मिट्टी पसंद होती है। इस पौधे को कैल्शियम की बहुत अधिक आवश्यकता होती है, इसलिए मिट्टी का मिश्रण तैयार करते समय उसमें पर्याप्त मात्रा में कैल्शियम पाउडर मिलाना चाहिए। इसके अलावा मिट्टी में थोड़ा कोकोपीट या रेत, नीम खली, पत्तियों की खाद या वर्मी कंपोस्ट जरूर शामिल करें। अगर आपके पास फ्लावरिंग ऑर्गेनिक खाद उपलब्ध हो, तो दो मुट्ठी उसे भी मिलाएं। अंत में मिट्टी में किसी अच्छे फंगीसाइड का छिड़काव या मिश्रण करें ताकि जड़ों में फंगस न लगे। यदि गमले में पुराना पौधा पहले से लगा है, तो उसकी मिट्टी की अच्छी तरह गुड़ाई करके उलट-पुलट कर लें।
मौसम के हिसाब से धूप, पानी और रिपॉटिंग का तरीका
गंधराज के पौधे को संतुलित पानी और धूप की बहुत जरूरत होती है। पानी कम या ज्यादा होने पर इसकी पत्तियां तुरंत पीली पड़ने लगती हैं। सर्दियों के मौसम में यह पौधा डोरमेंसी यानी सुप्त अवस्था में चला जाता है और इसकी ग्रोथ थम जाती है। फरवरी के बाद इसमें नए पत्ते निकलने शुरू होते हैं। इसलिए फरवरी और मार्च के दौरान पौधे की विशेष देखभाल करनी चाहिए ताकि अप्रैल महीने से इसमें सुंदर फूल खिलने लगें।
अगर पौधे की पत्तियां पीली पड़ रही हों, तो उन्हें तुरंत काटकर अलग कर दें। गमले का ड्रेनेज सिस्टम जांचें कि पानी रुक तो नहीं रहा। यदि पौधा बहुत पुराना हो गया है और उसकी जड़ें गमले में बुरी तरह फैल चुकी हैं, तो जड़ों की छंटाई यानी प्रूनिंग करें या फिर पौधे की रिपॉटिंग नए सिरे से नई खाद-मिट्टी के साथ करें। पानी देते समय हमेशा पौधे को नहलाते हुए ऊपर से पानी छिड़कें। मई, जून, जुलाई और अगस्त के गर्मी वाले महीनों में पौधे को केवल सुबह की हल्की धूप दिखाएं। वहीं सर्दियों के दिनों में पौधे को पूरे दिन की धूप में रखा जा सकता है।
फूल खिलाने और कलियां बचाने वाले 3 सबसे असरदार उपाय
अगर गंधराज में बिल्कुल फूल नहीं आ रहे हैं या कलियां बनते ही गिर जाती हैं, तो पौधे में सही पोषक तत्वों की कमी है। इसे दूर करने के लिए हर 15 दिन के अंतराल पर आधा चम्मच NPK 19:19:19 खाद का इस्तेमाल करें। इसे आप सीधे मिट्टी में डाल सकते हैं या पानी में घोलकर जड़ों में दे सकते हैं। इससे बड ड्रॉपिंग यानी कलियों के गिरने की समस्या तुरंत समाप्त हो जाती है।
दूसरा प्रमुख उपाय ह्यूमिक एसिड का प्रयोग है। एक चम्मच ह्यूमिक एसिड को पानी में घोलकर गमले की मिट्टी में डालें। यह मात्रा दो पौधों के लिए पर्याप्त होती है। ह्यूमिक एसिड जड़ों के विकास को तेजी से बढ़ाता है और पौधे को नई कलियां बनाने में मदद करता है। आप एक महीने वर्मी कंपोस्ट और अगले महीने ह्यूमिक एसिड का इस्तेमाल बदल-बदल कर कर सकते हैं।
एप्सम सॉल्ट और मिट्टी को एसिडिक बनाने के तरीके
इन उपायों के बाद भी यदि फूल न आएं, तो एप्सम सॉल्ट यानी मैग्नीशियम सल्फेट का प्रयोग करें। एप्सम सॉल्ट पौधे में मैग्नीशियम और सल्फर की कमी को पूरा करता है। यह पत्तियों में क्लोरोफिल का स्तर बढ़ाकर उन्हें गहरा हरा और चमकदार बनाता है। 1 लीटर पानी में 1 छोटा चम्मच एप्सम सॉल्ट घोलकर महीने में एक बार पौधे की जड़ों में डालें या पत्तियों पर स्प्रे करें।
पौधे की एक्स्ट्रा ग्रोथ के लिए सीवीड ग्रेन्यूल्स का इस्तेमाल भी किया जा सकता है, जो एक बेहतरीन जैविक ग्रोथ प्रमोटर है। चूंकि गंधराज की मिट्टी को थोड़ा एसिडिक यानी अम्लीय होना पसंद है, इसलिए गमले में 1 चम्मच प्रयुक्त या फ्रेश चाय पत्ती या फिर कॉफी पाउडर मिलाएं। इसके अतिरिक्त, पानी में नींबू के छिलके भिगोकर उस पानी को गमले में डालने से भी मिट्टी का पीएच स्तर गंधराज के अनुकूल बना रहता है।



















